जिलों की सभी 66 हेल्प डेस्क भी अब 24×7 होंगी संचालित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं तकनीक आधारित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग से प्रदेश सरकार महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रभावी पहल कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क एवं इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मध्यप्रदेश सरकार सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ नवजात शिशु की सुरक्षा के संकल्प को तकनीक, संवेदनशीलता और सतत सेवा के माध्यम से साकार कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, शिकायतों के त्वरित समाधान, समयबद्ध रेफरल एवं सतत निगरानी के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त आधार प्रदान कर रही है।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) हेल्प डेस्क व्यवस्था प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद सहायक प्रणाली बनकर उभरी है। राज्य में प्रारंभिक रूप से 57 स्वास्थ्य संस्थाओं से शुरू हुई यह व्यवस्था अब विस्तारित होकर 55 जिला चिकित्सालयों, 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों तथा एम्स भोपाल तक पहुँच चुकी है।

राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया मध्यप्रदेश मॉडल

मध्यप्रदेश के सुमन आइसीसीसी एवं जिला हेल्प डेस्क मॉडल को भारत सरकार द्वारा आयोजित 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन (नेशनल समिट ऑन इनोवेशंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज) में नवाचार एवं सर्वोत्तम कार्य-पद्धति के रूप में सराहा गया है।

जिलों में स्थित सभी 66 हेल्प डेस्क भी अब 24×7 होंगी संचालित

राज्य स्तर पर स्थित आईसीसीसी पूर्व से ही 24 घंटे सातों दिवस कार्यरत था, जबकि जिला स्तरीय हेल्प डेस्क कार्यालयीन समय में संचालित होते थे। इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए मई 2026 से प्रदेश के सभी 66 जिला स्तरीय SUMAN हेल्प डेस्क को भी 24×7 संचालित किया जा रहा है।

सुमन हेल्प डेस्क प्रत्येक जिले में सक्रिय

प्रदेश के प्रत्येक जिले में सुमन हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जहाँ 2 टेली-कॉलर एवं एक सुपरवाइज़र नियुक्त हैं। हेल्प डेस्क का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सभी निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है। लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं में देरी या असुविधा पर हेल्प डेस्क द्वारा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी — एएनएम, सीएचओ अथवा अन्य मैदानी अमले से समन्वय स्थापित कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है। शिकायतों का समयबद्ध निवारण इस प्रणाली की प्रमुख विशेषता है।

आइसीसीसी से जुड़ी हाई-टेक निगरानी व्यवस्था

सुमन हेल्प डेस्क व्यवस्था राज्य स्तरीय सुमन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) से जुड़ी हुई है। कंट्रोल सेंटर से सेवाओं की सतत निगरानी, रिपोर्टिंग एवं समन्वय किया जा रहा है। यह कमांड सेंटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और तकनीक-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

104 टोल फ्री सेवा से मिल रहा व्यापक परामर्श

104 टोल फ्री नंबर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, शिकायत निवारण, शासकीय योजनाओं की जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) सेवाओं की जानकारी, सोनोग्राफी एवं आवश्यक जांच के लिए परामर्श, आईएफए एवं कैल्शियम अनुपूरण संबंधी मार्गदर्शन, बर्थ वेटिंग होम में भर्ती के लिए प्रेरित करना, उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की सतत निगरानी, नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य ट्रैकिंग आदि सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

लाखों माताओं और नवजातों की नियमित मॉनिटरिंग

सुमन हेल्प डेस्क से लाखों गर्भवती महिलाओं, उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली माताओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है। हेल्प डेस्क द्वारा समय-समय पर जागरूकता संदेश, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक जानकारी भी साझा की जाती है, जिससे सुरक्षित प्रसव एवं नवजात देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

 

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