7 महीने में सबसे कम, सब्जियां-दालें हुई सस्ती; जनवरी में महंगाई 4.31% पर थी

नई दिल्ली

 आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर फरवरी में थोड़ी राहत मिलती हुई दिखाई दे रही है. बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई दर फरवरी में अपने 7 महीने के निचले स्तर पर आई. फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.61 फीसदी रही है. बता दें कि फरवरी में खुदरा महंगाई दर के 4 फीसदी रहने का अनुमान था.

महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महंगाई महीने-दर-महीने आधार पर 5.97% से घटकर 3.75% हो गई है। वहीं ग्रामीण महंगाई 4.59% से घटकर 3.79% और शहरी महंगाई 3.87% से घटकर 3.32% हो गई है।

जून तक कम ही रहेंगी सब्जियों की कीमतें

बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा- सब्जियों के दाम में गिरावट आई है। सबसे ज्यादा टमाटर और आलू के भाव घटे हैं। यह स्थिति जून तक बने रहने की संभावना है।

ये चीजें हुईं सस्‍ती

टमाटर, प्‍याज, आलू और हरी सब्जियों के दाम में गिरावट देखी गई है, जिस कारण महंगाई दर में कटौती हुई है. वहीं कज्‍युमर प्रोडक्‍ट्स और खाने की चीजों में भी गिरावट देखी गई है.

एनएसओ ने कहा कि फरवरी के दौरान महंगाई और खाद्य महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, अंडे, मांस और मछली, दालों और उत्पादों; और दूध और उत्पादों की महंगाई में गिरावट के कारण हुई है. इसका मुख्‍य कारण सब्जियों और प्रोटीन युक्‍त वस्‍तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी में कमी आना है.

आरबीआई कट कर सकता है रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में कटौती की थी, जिस कारण लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिली थी. वहीं अब महंगाई में बड़ी कमी आना ऐसा माना जा सकता है कि भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर अपनी अगली मॉनिटरी पॉलिसी में ब्‍याज दर में कमी कर सकता है.

एक और राहत की खबर
इस बीच मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर्स के अच्छे प्रदर्शन से देश के इंडस्‍ट्रीज प्रोडक्‍शन (IIP) में इस साल जनवरी में 5 फीसदी की वृद्धि हुई. इंडस्‍ट्रीज प्रोडक्‍शन इंडेक्‍स के संदर्भ में मापा जाने वाला औद्योगिक उत्पादन जनवरी, 2024 में 4.2 प्रतिशत बढ़ा था. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने दिसंबर, 2024 में 3.2 फीसदी वृद्धि के अस्थायी अनुमान को संशोधित किया है, इसे अब संशोधित कर 3.5 प्रतिशत कर दिया गया है.

क्‍यों इतनी कम हुई महंगाई?
गिरावट की एक बड़ी वजह खाने की कीमतों में गिरावट थी. फरवरी में कंज्‍युमर फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) महंगाई 3.75% रही, जो जनवरी से 222 आधार अंक कम है. यह मई 2023 के बाद से सबसे कम फूड महंगाई है.

आंकड़ों से पता चला कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरी इलाकों से ज्‍यादा रही. ग्रामीण इलाकों में फरवरी में कुल महंगाई दर 3.79% रही, जो जनवरी में 4.59% थी. ग्रामीण भारत में खाद्य महंगाई दर जनवरी में 6.31% से घटकर फरवरी में 4.06% हो गई. शहरी क्षेत्रों में महंगाई जनवरी के 3.87 फीसदी से घटकर फरवरी में 3.32 फीसदी हो गई. जबकि खाद्य महंगाई 5.53 फीसदी से घटकर 3.20 फीसदी हो गई.

गौरतलब है कि फरवरी में आवास महंगाई 2.91% थी, जो जनवरी में 2.82% से थोड़ी अधिक थी. ईंधन और एनर्जी महंगाई जनवरी में -1.49% की तुलना में -1.33% पर नकारात्मक रही. एजुकेशन में महंगाई 3.83% पर स्थिर रही, जबकि हेल्‍थ में महंगाई 3.97% से बढ़कर 4.12% हो गई. परिवहन और संचार सेक्‍टर्स में महंगाई 2.87% रही, जो जनवरी में 2.76% थी.

महंगाई कैसे प्रभावित करती है?

महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है। उदाहरण के लिए यदि महंगाई दर 6% है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य सिर्फ 94 रुपए होगा। इसलिए महंगाई को देखते हुए ही निवेश करना चाहिए। नहीं तो आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी।

इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

CPI से तय होती है महंगाई

एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है।

कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मेन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी होती हैं, जिनकी रिटेल महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका होती है। करीब 300 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है।

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