राफेल की नई खेप से वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा

 नई दिल्ली

भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी लड़ाकू ताकत बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही है. हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 114 और राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी है, जो फ्रांस से आएंगे. इससे वायुसेना की स्क्वॉड्रन संख्या में सीधा इजाफा होगा.

साथ ही, स्वदेशी विमान LCA Mk1A, LCA Mk2 और AMCA के साथ यह एक शक्तिशाली कॉम्बो बनेगा. वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 20 स्क्वॉड्रन हैं, जबकि  42 होने चाहिए. समझते हैं कि 114 राफेल से कितनी ताकत बढ़ेगी, स्वदेशी विमानों का क्या रोल है और कुल मिलाकर वायुसेना कैसे मजबूत होगी. 

वायुसेना की मौजूदा स्थिति: स्क्वॉड्रन की कमी

भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 29 लड़ाकू स्क्वॉड्रन हैं, जिसमें Su-30MKI (12-13 स्क्वाड्रन), राफेल (2), मिराज 2000 (3), मिग-29 (3), तेजस Mk1 (2) और जगुआर (6) शामिल हैं. 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत है, लेकिन पुराने विमान रिटायर हो रहे हैं. अगले 10 सालों में 8-10 स्क्वाड्रन और रिटायर हो सकते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है. 

चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से खतरे को देखते हुए स्क्वाड्रन बढ़ाना जरूरी है। वायुसेना का लक्ष्य 2035 तक 42 स्क्वाड्रन पहुंचना है, लेकिन देरी हो रही है.  एक स्क्वॉड्रन में आमतौर पर 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं. राफेल जैसे आधुनिक विमान एक स्क्वॉड्रन में 18 रखे जाते हैं.

114 राफेल से कितनी ताकत बढ़ेगी?

वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल हैं, जो 2 स्क्वॉड्रन में हैं. 114 और राफेल आने से कुल राफेल 150 हो जाएंगे. यह करीब 6 नए स्क्वॉड्रन जोड़ेंगे. इससे वायुसेना की स्क्वॉड्रन संख्या 29 से बढ़कर 35 हो जाएगी, जो कमी को काफी हद तक पूरा करेगी.

राफेल 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर है, जो हवा से हवा, हवा से जमीन हमले और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में माहिर है. इसकी लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 18 तैयार हालत में आएंगे और बाकी भारत में बनेंगे.

यह 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगा. राफेल की रेंज, रडार और मिसाइलें वायुसेना को चीन-पाकिस्तान के खिलाफ बढ़त देंगी. हालांकि, यह स्टॉपगैप (अस्थायी) समाधान है, क्योंकि स्वदेशी विमान लंबे समय के लिए हैं. 

स्वदेशी विमानों का रोल: LCA Mk1A, Mk2 और AMCA
राफेल के साथ स्वदेशी विमान LCA Mk1A, LCA Mk2 और AMCA का कॉम्बो वायुसेना को आत्मनिर्भर बनाएगा. ये 'मेक इन इंडिया' के तहत बन रहे हैं और कुल 400 से ज्यादा स्वदेशी फाइटर्स का प्लान है.

LCA Mk1A (तेजस Mk1A): यह तेजस का एडवांस वर्जन है. 180 विमान ऑर्डर हो चुके हैं (83 + 97), जो 10 स्क्वॉड्रन बनाएंगे. यह पुराने मिग-21 को रिप्लेस करेगा. Mk1A में बेहतर रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मिसाइलें हैं. डिलीवरी 2024-2029 तक होगी. इससे स्क्वाड्रन में 10 का इजाफा.

LCA Mk2 (तेजस Mk2): यह मध्यम वजन का फाइटर है, जो राफेल जैसा शक्तिशाली होगा. 120-130 विमान प्लान हैं (6-7 स्क्वॉड्रन), जो 200 तक बढ़ सकते हैं. इसमें ज्यादा पावरफुल इंजन, पेलोड और रेंज है. पहली उड़ान 2026 में संभव है. यह हाई-ऐल्टीट्यूड (चीन सीमा) पर बेहतर काम करेगा. 

AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट): यह 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर है. शुरुआत में 126 विमान (7 स्क्वॉड्रन) प्लान हैं, जो Mk1 और Mk2 वैरिएंट में बंटेंगे. AMCA में स्टेल्थ, सुपरक्रूज और AI जैसी तकनीकें होंगी. इंडक्शन 2030 के मध्य से शुरू होगा. यह चीन के J-20 जैसे विमानों से मुकाबला करेगा.

राफेल + स्वदेशी कॉम्बो से कुल इजाफा

114 राफेल से 6 स्क्वॉड्रन बढ़ेंगे. स्वदेशी से Mk1A से 10, Mk2 से 6-7, AMCA से 7 – कुल 23-24 स्क्वॉड्रन. इससे वायुसेना 30 से बढ़कर 50+ स्क्वॉड्रन तक पहुंच सकती है, जो तीन मोर्चों (चीन, पाकिस्तान, अन्य) पर लड़ने के लिए काफी होगी. यह कॉम्बो मिश्रित फ्लीट देगा – राफेल हाई-एंड हमलों के लिए, तेजस मीडियम रोल के लिए और AMCA स्टेल्थ ऑपरेशंस के लिए.

चुनौतियां और भविष्य

देरी एक समस्या है – Mk1A की डिलीवरी लेट है, Mk2 और AMCA विकास में हैं. लेकिन राफेल जैसे आयात तुरंत ताकत बढ़ाएंगे. विशेषज्ञ कहते हैं कि स्वदेशी पर फोकस से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. अगर प्लान सफल रहा, तो 2035 तक वायुसेना दुनिया की मजबूत सेनाओं में शुमार होगी.

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