अपने राज्य एवं प्रजा की रक्षा के लिए उन्होंने न केवल अस्त्र-शस्त्र उठाया

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर विशेष
उपलब्धियों, तकनीक, शस्त्र उत्पादन, उद्योग, व्यापार को साझा किया

समदर्शी शासन, सेवा ने उनको लोकमाता बनाया

भोपाल

होलकर रियासत के राजा मल्हारराव होलकर के जमाने से ही अहिल्याबाई ने शासन व्यवस्था में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। वे नीतिगत फैसलों में मल्हारराव होलकर का न केवल हाथ बंटाती थी, बल्कि वे सलाह भी देती थीं। उनकी सलाह से शासन व्यवस्था में कई सुधार हुए। शासन व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ-साथ शस्त्रागार का आधुनिकीरण और दूसरी रियासतों से भाईचारे का संबंध स्थापित करना रहा। एक दूसरे को अपने तकनीकी ज्ञान, अपनी उपलब्धियों से परिचित कराना और तकनीक को साझा करना, यह सब वे अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से ही कर पाईं।

महाराजा मल्हारराव होलकर के समय ही उन्होंने रियासतों में प्रतिनिधियों की नियुक्ति करना शुरु कर दिया था। जिसको आज हम कह सकते हैं कि कूटनीतिक संबंध स्थापित करना। अपनी कूटनीति के जरिए होलकर राज्य को कैसे समृद्ध और प्रगतिशीलता के साथ-साथ औद्योगिक, व्यावसायिक राज्य बनाया जा सकता है, इस पर उन्होंने काफी काम किया।

संपर्क, संवाद प्रणाली विकसित की

आगे जाकर जब शासन की बागडोर उनके हाथ में आई तब उन्होंने इस काम को बहुत तेजी से आगे बढ़ाया था। उनकी शासन व्यवस्था में एक बात और थी कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों और अपने संपर्कों, अपनी संवाद प्रणाली और सक्रियता के जरिए तमाम रियासतों में खासकर उन स्थानों पर जहां भारतीय परंपरा और संस्कृति के श्रद्धा केंद्र, धार्मिक स्थलों में अपनी सेवा को माध्यम बनाया। इससे वे होलकर राज्य को तो समृद्धशाली बना ही रहीं थीं, उन्होंने अपने आप को भी लोकमाता के रूप में स्थापित कर लिया।

अकेली अहिल्याबाई थीं, जिन्होंने कर दिखाया

शासन व्यवस्था तब राजशाही कहलाती थी, उसको कैसे उसको कैसे समदर्शी लोक कल्याणकारी और सेवा के जरिए लोकप्रिय बनाया जा सकता है, यह प्रयोग शायद अकेली अहिल्याबाई थीं जिन्होंने कर दिखाया था। भारत के शक्ति केंद्र यानी धार्मिक स्थानों को जिन्हें आक्रांताओं ने खंडहर बना दिया था, लूट लिया था, उनका जिर्णोद्धार कर देश भर में अहिल्याबाई ने अपने आपको एक लोक माता के साथ-साथ सेवाभावी शासक के रूप में स्थापित किया। यह सब वे इसलिए कर पाईं कि उन्होंने सभी रियासतों में खास प्रमुख केदों पर अपने सेवा कार्यों के साथ-साथ अपने ऐसे प्रतिनिधियों की नियुक्ति की या ऐसे शासनदूतों को स्थापित किया, जो आज के दौर की कूटनीतिक व्यवस्था या जिसे कहा जा सकता है कि राजदूत व्यवस्था कह सकते हैं।

एक बेटी, एक बेटे की माँ थीं

महारानी अहिल्याबाई ने 1745 में एक पुत्र एवं उसके तीन वर्ष पश्चात एक कन्या को जन्म दिया। पुत्र का नाम मालेराव और कन्या का नाम मुक्ताराव रखा गया। कहा जाता है कि खंडेराव में भी जिम्मेदारी-बोध का स्फुरण-जागरण महारानी अहिल्याबाई की प्रेरणा से ही हुआ। वे उन्हें राज-काज एवं शासन-व्यवस्था में सहयोग प्रदान करती थीं। उन्होंने बड़ी कुशलता से अपने पति के स्वाभिमान एवं गौरव-बोध को जागृत किया। अपने पिता के मार्गदर्शन में खंडेराव कुशल योद्धा एवं निपुण शासक बनते जा रहे थे। मल्हारराव होल्कर अपनी पुत्रवधू अहिल्याबाई को भी राज-काज की शिक्षा देते रहते थे। अपनी पुत्रवधू की बुद्धि, कार्य-कुशलता, नीतिनिपुणता से वे बहुत प्रसन्न थे। परंतु दुर्भाग्य से 1754 ई. में खंडेराव का निधन हो गया। 1766 ई. में मल्हारराव भी इस संसार को छोड़कर देवलोक गमन कर गए।

मल्हारराव के निधन के बाद शासन संभाला

श्वसुर के देहावसान के पश्चात अहिल्याबाई के नेतृत्व में उनके बेटे मालेराव होल्कर ने शासन की बागडोर संभाली। पर उस समय अहिल्याबाई और मालवा पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा, जब 5 अप्रैल 1767 को शासन की बागडोर संभालने के कुछ ही महीने बाद उनके बेटे की मृत्यु हो गई। कोई भी स्त्री जिससे थोड़े-थोड़े अंतराल पर उसके पति, श्वसुर, पुत्र का सहारा छिन जाए, उसके दुःख एवं मनःस्थिति की सहज ही कल्पना की जा सकती है! परंतु रानी अहिल्याबाई ने नियति एवं परिस्थिति के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने मालवा राज्य की प्रजा को अपनी संतान मानते हुए 11 दिसंबर 1767 ई. को शासन की बागडोर अपने हाथों में ली। थोड़े ही दिनों में महारानी की लोकप्रियता राज्य भर में फैल गई।

शस्त्र भी उठाए और मुकाबला भी किया

परिस्थितियों का लाभ उठाने के उद्देश्य से मालवा पर कुदृष्टि रखने वाले लोगों को मुंह की खानी पड़ी। अपने राज्य एवं प्रजा की रक्षा के लिए उन्होंने न केवल अस्त्र-शस्त्र उठाया, बल्कि अनेक युद्धों-मोर्चों पर स्वयं आगे आकर अपनी सेना का कुशल नेतृत्व किया।

इस तरह कूटनीति से युद्ध टाला

इतना ही नहीं, जब आवश्यकता पड़ी उन्होंने कूटनीति से भी काम लिया। राज्य हड़पने के उद्देश्य से जब राघोवा पेशवा ने मालवा पर आक्रमण के लिए अपनी सेना भेजी तो महारानी अहिल्याबाई के केवल एक पत्र से यह युद्ध टल गया और पेशवा ने उन्हें उनके राज्य की सुरक्षा का वचन दिया। उस पत्र ने पेशवा राघोवा की सुप्त चेतना को जागृत किया। उस पत्र के एक-एक शब्द ने उन पर नुकीले तीर-सा असर किया और उन्होंने महारानी से युद्ध का इरादा बदल दिया।

व्यापारी बनकर आए अंग्रेजों को भाप लिया था

महारानी इतनी कुशल एवं दूरदर्शी थीं कि व्यापारी बनकर आए अंग्रेजों और ईस्ट इंडिया कंपनी के फूट डालो और शासन करो की नीति को उन्होंने सबसे पूर्व भांप लिया था। उन्होंने तत्कालीन पेशवा प्रमुख को इस संदर्भ में पत्र लिखकर उन्हें सतर्क भी किया था। वे प्रतिभा को पहचानती थीं। उन्होंने अपने विश्वसनीय सेनानी सूबेदार तुकोजीराव होल्कर (मल्हारराव के दत्तक पुत्र) को सेना-प्रमुख बनाया था। वे उन पर भरोसा करती थीं और तुकोजीराव भी उनके प्रति अखंड निष्ठा एवं श्रद्धा रखते थे।

बेमिसाल सेवा के जरिये बनी लोकप्रिय

महारानी अहिल्याबाई का शासन-काल भले ही अल्प रहा, पर उन्होंने भावी भारत पर बहुत गहरा एवं व्यापक प्रभाव छोड़ा। अल्पावधि के अपने शासन-काल में उन्होंने अनगिनत निर्माण-कार्य करवाए। न केवल राज्य की सीमाओं के भीतर बल्कि संपूर्ण भारत वर्ष के प्रमुख तीर्थों और स्थानों में उन्होंने मंदिर बनवाए, पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया, कुओं, तालाबों, बावड़ियों का निर्माण करवाया, मार्ग बनवाए, सड़कों की मरम्मत करवाई, भूखों के लिए अन्नसत्र खुलवाए, प्यासों के लिए स्थान-स्थान पर प्याऊ लगवाए, तीर्थस्थलों पर धर्मशालाओं का निर्माण करवाया, शास्त्रों के अध्ययन-चिंतन-मनन-प्रवचन हेतु मंदिरों में विद्वान आचार्यों की नियुक्ति की।

· सतीश जोशी

 

admin

Related Posts

इंदौर में 9 हजार सफाईकर्मियों के घरों को सोलर से रोशन किया जाएगा, 270 करोड़ रुपये की बचत होगी

इंदौर  सस्टेनेबल लिविंग सिटी प्रोग्राम के तहत इंदौर में 9 हजार सफाईकर्मियों के घर सोलर से रोशन करने के लिए नगर निगम और यूनिटी ऑफ नेशनल एक्शन फॉर क्लाइमेट चेंज…

बालाघाट में सीएम हेल्पलाइन बैठक के दौरान हंसी और पान चबाने पर दो ASI सहित छह पुलिसकर्मी सस्पेंड

 बालाघाट बालाघाट में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की समीक्षा के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस में अनुशासनहीनता पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ गई। एसपी आदित्य मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए दो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

पंजाब का तूफानी हमला! लखनऊ के सामने रखा पहाड़ जैसा लक्ष्य, प्रियांश-कोनोली शतक से चूके

  • By admin
  • April 19, 2026
  • 4 views
पंजाब का तूफानी हमला! लखनऊ के सामने रखा पहाड़ जैसा लक्ष्य, प्रियांश-कोनोली शतक से चूके

आखिरी ओवर तक चला थ्रिल! कोलकाता ने राजस्थान को हराकर IPL 2026 में दर्ज की पहली जीत

  • By admin
  • April 19, 2026
  • 4 views
आखिरी ओवर तक चला थ्रिल! कोलकाता ने राजस्थान को हराकर IPL 2026 में दर्ज की पहली जीत

BCCI का अहम निर्णय, अगरकर का कार्यकाल 2027 तक वर्ल्ड कप के लिए होगा जारी

  • By admin
  • April 19, 2026
  • 4 views
BCCI का अहम निर्णय, अगरकर का कार्यकाल 2027 तक वर्ल्ड कप के लिए होगा जारी

IPL में आज पंजाब vs लखनऊ: PBKS ने अबतक हर मैच जीता, LSG के खिलाफ हेड-टू-हेड बराबरी पर

  • By admin
  • April 19, 2026
  • 4 views
IPL में आज पंजाब vs लखनऊ: PBKS ने अबतक हर मैच जीता, LSG के खिलाफ हेड-टू-हेड बराबरी पर

आज हो सकता है KKR का IPL 2026 से बाहर होना, एक और हार से होगा सफाया

  • By admin
  • April 19, 2026
  • 5 views
आज हो सकता है KKR का IPL 2026 से बाहर होना, एक और हार से होगा सफाया

आरसीबी की हार में 5 विलेन का हाथ, स्टार खिलाड़ी ने फैंस का दिल तोड़ा

  • By admin
  • April 19, 2026
  • 2 views
आरसीबी की हार में 5 विलेन का हाथ, स्टार खिलाड़ी ने फैंस का दिल तोड़ा