‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य पथ’: मोदी सरकार की नेम चेंज पॉलिसी में ये हैं अहम बदलाव

नई दिल्ली

पिछले कुछ सालों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य और सेवा की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा का विषय रही है. अब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव यह हुआ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और उसके आसपास के प्रशासनिक ब्लॉक का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है. 

यह नया परिसर पहले Executive Enclave के नाम से जाना जाता था और सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाया गया है. इसी नए भवन परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित होंगे. नया नाम सेवा तीर्थ इसलिए चुना गया है क्योंकि यह सरकार के कामकाज में 'सेवा की भावना' को प्राथमिकता देने का प्रतीक है. यानी शासन केवल सत्ता और अधिकार के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा और कल्याण के लिए है.

चर्चा में रहा नाम परिवर्तन
पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को गुलामी के दौर की पहचान से बाहर निकलने और भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा में रही है. सड़कें, सरकारी इमारतें, शहर या संस्थान कई जगहों पर पुराने नामों की जगह नए नाम रखे गए हैं.

1. राजपथ- कर्तव्य पथ (2022)
दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ अब कर्तव्य पथ कहलाता है. यह बदलाव जनसेवा और कर्तव्य को प्राथमिकता देने के विचार से किया गया.

2. 7 रेस कोर्स रोड – लोक कल्याण मार्ग (2016)
प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास अब लोक कल्याण मार्ग के नाम से जाना जाता है. यह नाम जनता के कल्याण का प्रतीक माना गया.

3. योजना आयोग – नीति आयोग (2015)
आजादी के बाद बना योजना आयोग समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया. इसका उद्देश्य राज्यों को साथ लेकर नीति बनाना है.

4. प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर- सेवातीर्थ (2025–26)
पीएमओ के नए कॉम्प्लेक्स का नाम सेवातीर्थ (Seva Teerth) रखा गया. यह नाम सेवा भावना और सार्वजनिक जिम्मेदारी को दर्शाता है.

5. केंद्रीय सचिवालय- कर्तव्य भवन
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए सचिवालय भवनों को कर्तव्य भवन कहा गया. यह बदलाव सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य बोध को दर्शाने के लिए किया गया.

6. दलहौजी रोड- दारा शिकोह रोड
ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के नाम पर बनी सड़क का नाम बदलकर मुगल राजकुमार दारा शिकोह के नाम पर रखा गया. दारा शिकोह को भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है.

7. राजभवन- लोकभवन (कई राज्य)
कई राज्यों में राज्यपाल के आवास राजभवन को लोकभवन कहा जाने लगा. यह बदलाव पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम जैसे राज्यों में लागू हुआ.

8. राज निवास- लोक निवास
लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास किया गया.

शहरों और स्थानों के बड़े नाम परिवर्तन

9. इलाहाबाद- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए नाम बदला गया.

10. फैजाबाद जिला- अयोध्या जिला
राम जन्मभूमि से जुड़ी धार्मिक पहचान को प्रमुखता दी गई.

11. मुगलसराय स्टेशन- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन
एक प्रमुख रेलवे स्टेशन का नाम बदला गया.

12. औरंगाबाद- संभाजीनगर (महाराष्ट्र)
छत्रपति संभाजी महाराज के सम्मान में नाम बदला गया.

13. उस्मानाबाद- धाराशिव (महाराष्ट्र)
प्राचीन भारतीय नाम को फिर से अपनाया गया.

Indian Penal Code का भी बदला नाम
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) का नाम बदल चुका है, लेकिन यह सिर्फ नाम नहीं बदलकर पूरी तरह नई संहिता में बदल गया है. पुरानी Indian Penal Code (IPC), 1860 जिसे ब्रिटिश शासन के समय बनाया गया था और आजादी के बाद भी लागू रहा. अब 1 जुलाई 2024 से यह हटकर नई संहिता में बदल गया है.

नया नाम क्या है?
Indian Penal Code (IPC) की जगह अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 लागू हो गया है. New criminal law (Bharatiya Nyaya Sanhita) 1 जुलाई 2024 से लागू हो गया है और इससे IPC पूरी तरह बदल गया है. सरकार का कहना है कि पुराने IPC को आधुनिक समय के अनुसार बदलने और भारत की पहचान के हिसाब से नया नाम देने की जरूरत थी. 

सरकार का तर्क क्या है?
केंद्र सरकार का कहना है कि देश में सड़कों, शहरों, सरकारी इमारतों और संस्थानों के नाम बदलने का निर्णय सिर्फ एक नाम बदलने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे तीन बड़े उद्देश्य हैं. 

1.  गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति
कई पुरानी सड़कों, भवनों और संस्थानों के नाम ब्रिटिश शास अधिकारी के नाम पर थे. जैसे राजपथ, डलहौजी रोड, कुछ रेलवे स्टेशन आदि. सरकार का कहना है कि इन नामों से भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पहचान को ठीक तरह से नहीं दिखाया जाता था. नाम बदलकर अब ये स्वदेशी और भारतीय प्रतीकों से जुड़े हुए हैं. जैसे- राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, डलहौजी रोड का नाम दारा शिकोह रोड.

2. भारतीय इतिहास और संस्कृति का सम्मान
नाम बदलने का दूसरा उद्देश्य यह है कि इतिहास और संस्कृति को सही सम्मान मिले. पुराने नाम अक्सर उपनिवेशिक काल या विदेशी प्रभाव को दर्शाते थे. नए नाम ऐसे चुने गए हैं जो भारतीय संस्कृति, वीरता, लोककथा और राष्ट्रीय नेताओं को समर्पित हैं. जैसे-औरंगाबाद- छत्रपति संभाजीनगर, इलाहाबाद-प्रयागराज.

3. लोककल्याण और सेवा की भावना को बढ़ावा देना
सिर्फ जगह का नाम बदलना ही नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों और भवनों के नाम बदलकर कर्तव्य और सेवा का संदेश दिया गया. जैसे 7 रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग, राजभवन  का नाम बदलकर लोक भवन, राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास हो गया.

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