शिप्रा तीर्थ परिक्रमा को लेकर अहम फैसले, CM डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी से बढ़ेगा उत्साह

उज्जैन

उज्जैन में प्रतिवर्ष गंगा दशहरा होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में 26 मई को सीएम मोहन यादव शिप्रा नदी के तट पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसको लेकर भाजपा नगर द्वारा मंडलों की महत्वपूर्ण बैठक मंडल में तय हुआ कि शिप्रा तीर्थ परिक्रमा 25 मई को प्रातः 9:00 बजे रामघाट से मां क्षिप्रा एवं धर्म ध्वजा के पूजन के साथ प्रारंभ होगी। परिक्रमा का समापन 26 मई गंगा दशहरा के अवसर पर शाम 5:00 बजे मां क्षिप्रा को चुनरी अर्पित कर किया जाएगा।

जिला मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने बताया कि क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा विगत कईं वर्षों से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है। यात्रा की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा 23 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण के लिए की गई थी। इस वर्ष 25 मई को यात्रा का शुभारम्भ मोक्षदायिनी मां शिप्रा के राम घाट पर पूजन से होगा।

यात्रा वापस 26 मई को पहुंचेगी
यात्रा जिले में नर्सिंह घाट, लालपुल से त्रिवेणी होकर शहर के मार्गों से निकलकर वापस रामघाट 26 मई को पहुंचेगी। साथ ही 26 मई ,गंगा दशहरा को यात्रा के समापन अवसर पर राम घाट पर गंगा दशहरा उत्सव आयोजित किया जाएगा।

इस वर्ष भी परिक्रमा को सफल, भव्य बनाने तथा श्रद्धालुओं की सेवा हेतु कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा की तैयारी एवं व्यवस्थाओं के संदर्भ में भाजपा नगर द्वारा मंडलों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

सीएम मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी करेंगे अर्पित
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि गंगा दशमी के अवसर पर आयोजित शिप्रा तीर्थ परिक्रमा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे।

मैथिली ठाकुर और इंडियन नेवी बैंड की प्रस्तुति
26 मई को आयोजित मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) बैंड की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और प्रसिद्ध लोक गायिका Maithili Thakur अपने साथियों के साथ भजनों की प्रस्तुति देंगी।

भारत भवन में होगा ‘सदानीरा समागम’
भोपाल स्थित भारत भवन में 27 मई से दो जून तक आयोजित होने वाले सदानीरा समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर इसरो हैदराबाद के भू-विज्ञान समूह के निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। 

जल संरक्षण में बना जनभागीदारी का रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के न्यासी श्रीराम मिवारी ने बताया, "मध्य प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर चल रहे अभियान के तहत अब तक 1 लाख 77 हजार से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं. तालाब, कुएं, बावड़ियां और नदियों के संरक्षण के साथ लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है. यह अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का बड़ा आंदोलन बन चुका है। 

उज्जैन की शिप्रा परिक्रमा से होगी शुरुआत
श्रीराम तिवारी के अनुसार, मुख्य आयोजन से पहले 25 और 26 मई को उज्जैन में शिप्रा तीर्थ परिक्रमा निकाली जाएगी. यह यात्रा रामघाट से शुरू होकर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों से गुजरेगी. इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे. इस दौरान लोकगायिका मैथिली ठाकुर, भारतीय नौसेना बैंड और कई प्रसिद्ध कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे. आयोजकों के अनुसार, पिछले 22 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब जल संरक्षण आंदोलन की प्रेरणा बन रही है। 

भारत भवन में जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ
तिवारी ने बताया कि भोपाल के भारत भवन में होने वाले सदानीरा समागम में देश-विदेश के वैज्ञानिक, पर्यावरणविद्, नीति विशेषज्ञ और संस्कृति जगत की हस्तियां शामिल होंगी. इसमें फिजी, नेपाल, मैक्सिको, सूरीनाम, त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित 9 देशों के राजदूत और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे. इस कार्यक्रम में इसरो के वैज्ञानिकों से लेकर कार्पाेरेट संस्थानों के प्रतिनिधि भी जल संरक्षण पर अपने विचार रखेंगे। 

पंचमहाभूतों पर होगा गहन मंथन
सदानीरा समागम में जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि तत्वों पर अलग-अलग वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे. इसमें मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह सहित कई विशेषज्ञ जल संकट, भूगर्भीय जल, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण पर चर्चा करेंगे. आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल सांस्कृतिक मंच नहीं बल्कि जल और प्रकृति को लेकर गंभीर चिंतन का अवसर होगा। 

संस्कृति, फिल्म और लोककला का अनूठा संगम
श्रीराम तिवारी ने आगे बताया, "हर शाम भारत भवन में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगीत, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां होंगी. इस दौरान प्रवाह फिल्म समारोह के तहत जल संकट और पर्यावरण पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा. इसके अलावा जल, जंगल और जीवन विषय पर चित्रकला कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और जल विषयक पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। 

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