राष्ट्रपति चुनाव पर असर: बंगाल में बीजेपी की जीत से 2024 की रणनीति

नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2024 लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाई थी, इसके बाद माना जा रहा था कि उसका दबदबा घटने लगेगा. लेकिन अब हालात फिर बदले हैं. पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई से ज्यादा सीटों पर जीतना हो, या फिर दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव, सब में बीजेपी का प्रदर्शन दमदार रहा. ऐसे में अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को अपर हैंड मिलेगा। 

महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बीजेपी ने चुनाव जीते. ये तीनों राज्य राष्ट्रपति चुनाव में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक महत्व वाले माने जाते हैं। 

तीनों में NDA की जीत ने मानो लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई कर दी है. क्योंकि विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन से सहयोगियों के साथ भी शर्तों को तय करने की उसकी शक्ति कमजोर हो सकती थी। 

बता दें कि 2024 में बीजेपी की सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 हो गई थी.
इस गिरावट से 2022 में 10,86,431 की कुल संख्या वाले निर्वाचक मंडल (राष्ट्रपति चुनने वाले) में बीजेपी के वोटों को 44,100 का झटका लगा था. तब बीजेपी बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा पार करने के लिए टीडीपी और जेडीयू पर निर्भर थी, तब विपक्ष ने दावा किया था कि सरकार जल्द ही गिर जाएगी। 

हालांकि, दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत है.

कैसे मिलेगा फायदा
राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद और विधानसभाओं के सभी निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल बनाते हैं. इसमें हर एक सांसद के वोट की वैल्यू बराबर (2022 में 700 थी) होती है. लेकिन विधायक के वोट का महत्व उसकी विधानसभा की जनसंख्या (1971 की जनगणना के अनुसार) के आकार पर निर्भर करता है। 

जैसे, 2022 में उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट की वैल्यू 208 थी, जो सिक्किम के एक विधायक के वोट की वैल्यू (7) से लगभग 30 गुना अधिक थी. 2027 राष्ट्रपति चुनाव में भी यह नंबर कमोबेश उतना ही रहने के आसार हैं. ऐसे में बड़े राज्यों में जीत से बीजेपी को सीधा फायदा होगा। 

जैसे, हरियाणा में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल. महाराष्ट्र विधानसभा में एनडीए की संख्या, जो 288 सदस्यों वाली है, पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 150 से अधिक से बढ़कर 237 विधायक हो गई है. बिहार विधानसभा में भी उसकी संख्या 125 से बढ़कर 202 हो गई है. पश्चिम बंगाल में अब उसके पास 77 विधायकों के मुकाबले 207 विधायक हैं। 

ऐसे में अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले, उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्वाचक मंडल में उसके 83,800 से अधिक वोटों का भारी दबदबा है। 

 

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