नौरादेही जंगल में बढ़ेगा रोमांच, बाघों के साथ दौड़ेंगे अफ्रीकन चीते, बाड़ा बनाने के लिए तैयारियां शुरु

सागर 
 मध्य प्रदेश का वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, एक ऐसा जंगल है जहां बाघों की दहाड़ गूंजती है, हिरणों की छलांगें दिखती हैं और पेड़ों की छांव में सैकड़ों कहानियां छुपी हैं. लेकिन अब इस जंगल की पहचान और भी खास होने वाली है. क्योंकि यहां आने वाले हैं अफ्रीका से आए मेहमान, यानी रफ्तार के सौदागर चीते.वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम ने नौरादेही का दौरा किया उन्होंने यहां के मोहली, सिंगपुर और झापन रेंज में करीब 600 वर्ग किलोमीटर का इलाका चुना जहां चीतों का नया घर बनाया जाएगा.

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व के रूप में वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व भले ही नया हो, लेकिन जल्द ये पूरे देश में मशहूर होने वाला है. क्योंकि यहां बाघों की आबादी तो बढ़ ही रही है, वहीं दूसरी तरफ वहां अफ्रीकन चीतों का नया बसेरा बसने वाला है. पिछले दिनों मई माह में चीता प्रोजेक्ट से जुडे़ विशेषज्ञों के दल ने नौरादेही का दौरा किया था और चीतों को बसाने की संभावनाओं के साथ-साथ चीतों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाने के निर्देश दिए थे. इसी सिलसिले में प्रबंधन द्वारा तैयारियां तेज कर दी गयी है. यहां चीतों के लिए बाड़ा बनाने के लिए प्रबंधन ने योजना बनाने का काम शुरू कर दिया है.

मई में विशेषज्ञों के दौरे के बाद चीतों को बसाने हरी झंडी
देश में बसाए जा रहे चीतों के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को नोडल एंजेसी बनाया गया है. मई महीने की शुरूआत में एंजेसी के विशेषज्ञों ने नौरादेही टाइगर रिजर्व का तीन दिनों का दौरा किया था. जिनमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के डीआईजी डॉ. वी बी माथुर और डब्ल्यूआईआई के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी के साथ दौरा किया था. उसके बाद 19 मई 2025 को नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन को चिट्ठी लिखकर चीता बसाने के लिए तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं.

ये व्यवस्थाएं करने कहा विशेषज्ञों ने
भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने नौरादेही टाइगर रिजर्व के मोहली, सिंगपुर और झापन रेंज में चीतों को बसाने के लिए कहा है. ये करीब 600 वर्ग किमी का एरिया होगा, जहां चीतों को बसाया जाएगा. यहां पर टाइगर रिजर्व प्रबंधन को ये तैयारियां करने कहा गया है.

बाड़ा बनाने की तैयारियों में लगा नौरादेही प्रबंधन
जहां तक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की बात करें, तो उन्होंने नौरादेही टाइगर रिजर्व प्रबंधन के लिए डेढ साल का समय इन तैयारियों को पूरा करने के लिए कहा है. माना जा रहा है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरूआत में यहां चीतों की शिफ्टिंग की जाएगी. इस लिहाज से यहां अन्य काम तेजी से शुरू हो गए हैं.

बाघ की दहाड़ से टकराएगी चीतों की रफ्तार 

अब चीतों के लिए बाड़ा बनाने की तैयारी करने कहा गया है. इसके लिए नौरादेही टाइगर रिजर्व की एक टीम जल्द कूनो नेशनल पार्क पहुंचेगी और वहां बाड़ा बनाने की जानकारी और प्रशिक्षण लेगी. क्योंकि वन्यप्राणियों को अलग-अलग तरह के बाडे़ बनाए जाते हैं और चीतों के लिए किस तरह बनाना होगा, इसके लिए टीम को कूनो भेजा जाएगा.

चीतों के लिए क्यों खास है नौरादेही टाइगर रिजर्व
मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व नौरादेही टाइगर रिजर्व है. यह तीन जिलों सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले में फैला हुआ है. इसका कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर है. जिसमें 1414 वर्ग किमी कोर एरिया और 925.12 किमी का बफर एरिया है. इस विशाल वनक्षेत्र में बडे़-बडे़ घास के मैदान है और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है. क्योंकि जिन गांवों का विस्थापन हो रहा है, वहां खेती की जगह पर प्रबंधन द्वारा घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के लिए बड़े घास के मैदान हैं. घास के मैदान ज्यादा होने से शाकाहारी जानवर बहुत हैं यहां शाकाहारी प्राणी होने से चीतों को शिकार करने में आसानी होगी.

600 वर्ग किमी क्षेत्र में बसेंगे अफ्रीकन चीते 

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सबसे पहले नौरादेही में हुआ था चीता बसाने के लिए सर्वे
जहां तक चीतों की बसाहट की बात करें, तो नौरादेही जब वन्यजीव अभ्यारण्य हुआ करता था. तब 2010 में यहां पर चीतों को बसाने के लिए डब्ल्यूआईआई (Wildlife Institute of India) ने यहां सर्वेक्षण किया था. उस वक्त भी मोहली, सिंहपुर और झापन को चीतों की बसाहट के लिए अनूकूल माना गया था. जानकारों के मुताबिक, ये तीनों रेंज चीतों की बसाहट के लिए आदर्श हैं. करीब 600 वर्ग किमी में फैली इन तीनों रेंज में बडे़ और लंबे ग्रासलैंड है. जो चीतों के लिए काफी उपयुक्त माने जाते हैं.

क्या कहना है प्रबंधन का
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. ए ए अंसारी बताते हैं कि, ''हम लोगों को चीता के लिए शुरूआत करनी है. हमें कहां फेसिंग करनी है, कहां चीतों के लिए कौन से बाडे़ बनाने हैं, अभी हम लोगों को जैसे निर्देश मिलेगा, तो हम लोग उसी अनुसार यहां पर काम शुरू करेंगे. जो तीन रेंज मोहली, सिंगपुर और झापन के लगभग 600 वर्ग किमी क्षेत्र में चीतें बसाएं जाएंगे.''

''बाड़े को लेकर हमें जैसे निर्देश होंगे, वैसे हम आगे काम करेंगे. वन्यप्राणियों के लिए कई तरह के बाडे़ बनाए जाते हैं. एक क्वारनटाइन बाड़ा होता है, जब वन्यप्राणी बाहर से आते हैं, वहां करीब 20 दिन के लिए उन्हें रखा जाता है. एक एसआरव्ही बाड़ा होता है. हमें जिस तरह के बाडा बनाने के निर्देश मिलेंगे, हम वहां वैसा काम शुरू करेंगे.

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