दिल्ली का नया बिल निजी स्कूल फीस पर कसेगा लगाम, लेकिन क्यों हो रहा है इसका विरोध

 

नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस पर लगाम लगाने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है। यह अध्यादेश दिल्ली स्कूल शिक्षा विधेयक, 2025 के लिए होगा। इस अध्यादेश के तहत कई कड़े नियमों का प्रावधान होगा। जिसके उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। बार-बार उल्लंघन होने पर स्कूल की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। फीस निर्धारण के लिए स्कूल,जिला और पुनरीक्षण समितियां बनेंगी।

स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह अध्यादेश एक सप्ताह के भीतर लाया जा सकता है। इस अध्यादेश का उद्देश्य स्कूलों द्वारा फीस में की जाने वाली मनमानी वृद्धि पर लगाम लगाना है। अध्यादेश एक अस्थायी उपाय होगा। इसे दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक पेश करने से पहले लागू किया जाएगा। इस विधेयक में फीस को लेकर सख्त नियम होंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, फीस संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया जाएगा।

बता दें कि राज्य विधानसभा में, अध्यादेश एक कानून होता है। यह तब जारी किया जाता है जब विधायिका सत्र में नहीं होती है। राज्य विधायिका के पास यह अधिकार होता है कि वह अध्यादेश को स्वीकार करे, अस्वीकार करे या उसमें बदलाव करे। दिल्ली सरकार के सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में एक प्रस्ताव पहले ही कानून विभाग को भेजा जा चुका है। सूत्रों ने बताया कि अध्यादेश एक सीमित समय के लिए लागू रहेगा. इसके बाद विधेयक को दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में लाया जाएगा।

पहले इस विधेयक को विशेष सत्र में पारित कराने की योजना थी
पहले इस मसौदे को दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में पारित करने की योजना थी। यह सत्र 13-14 मई को होने वाला था। लेकिन, यह सत्र नहीं हो पाया। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि मसौदा विधेयक का उद्देश्य शहर के सभी स्कूलों के लिए फीस को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश तय करना है।

50 हजार से लेकर संपत्ति जब्त करने का प्रावधान होगा
इसमें फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के लिए सख्त प्रावधान होंगे। उदाहरण के लिए, प्रत्येक छात्र के मामले में शिक्षा निदेशक द्वारा 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रशासन के पास बार-बार उल्लंघन और जुर्माना न भरने की स्थिति में स्कूल की संपत्ति को सील करने और बेचने का भी अधिकार होगा। सूत्रों ने बताया कि अगर जुर्माना तय समय सीमा के भीतर नहीं भरा जाता है तो जुर्माने की राशि को दोगुना करने का भी प्रावधान होगा। इसके अलावा स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो सकता है।

मसौदे में स्कूल स्तर पर शुल्क विनियमन समिति, जिला शुल्क अपीलीय समिति और शुल्क संरचनाओं की निगरानी और शिकायतों के समाधान के लिए एक संशोधन समिति की स्थापना की वकालत की गई है। मसौदे के अनुसार, प्रत्येक स्कूल विधेयक पारित होने के दो महीने के भीतर प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के लिए एक स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समिति का गठन करेगा। इस पैनल में स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक और पांच अभिभावकों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति के पर्यवेक्षक शिक्षा निदेशक होंगे।

जांच में कई उच्च अधिकारियों को मिलेगी जगह
जिला शुल्क अपीलीय समिति में, अध्यक्ष शिक्षा के उप निदेशक होंगे और सदस्य सचिव शिक्षा के उप निदेशक (क्षेत्रीय) होंगे। इसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, माता-पिता और शिक्षक शामिल होंगे। संशोधन समिति में, शिक्षा क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा।

विधेयक में स्कूल स्तर पर एक फीस निर्धारण समिति बनाने की बात कही गई है। यह समिति स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल, तीन शिक्षकों और पांच अभिभावकों को मिलाकर बनेगी। इस समिति का काम होगा कि वह स्कूल की फीस पर नजर रखे और यह सुनिश्चित करे कि फीस में मनमानी वृद्धि न हो।

इसके अलावा, जिले स्तर पर भी एक फीस अपीलीय समिति बनाई जाएगी। इस समिति में शिक्षा विभाग के अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अभिभावक और शिक्षक शामिल होंगे। यह समिति फीस से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करेगी।

संशोधन समिति भी बनाई जाएगी
एक संशोधन समिति भी बनाई जाएगी। इस समिति में शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति फीस से जुड़े मामलों में सुझाव देगी। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का मकसद निजी स्कूलों में फीस को लेकर पारदर्शिता लाना है। सरकार चाहती है कि स्कूल फीस के नाम पर अभिभावकों से मनमानी वसूली न करें।

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक अभिभावकों के हितों की रक्षा करेगा. इससे निजी स्कूलों में फीस को लेकर पारदर्शिता आएगी।

 

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