DA मर्जर पर फिर गरमाया मुद्दा: कर्मचारियों ने 50% महंगाई भत्ता बेसिक में जोड़ने की रखी मांग

नई दिल्ली
देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को एक आधिकारिक पत्र लिखकर अंतरिम राहत की मांग की है। फेडरेशन का प्रस्ताव है कि 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी रूप से कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) में 50% महंगाई भत्ते (DA) को समाहित (Merge) कर दिया जाए।

महंगाई और वेतन में देरी बनी मुख्य वजह
FNPO के महासचिव शिवाजी वेसिरेड्डी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों के क्रियान्वयन में होने वाली संभावित देरी को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य है। फेडरेशन का तर्क है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बुरी तरह प्रभावित किया है।
 
पत्र के मुख्य अंशों के अनुसार
    बेसिक सैलरी में 50% DA मर्ज करने से कर्मचारियों को तुरंत वित्तीय राहत मिलेगी और समाज में उनका आर्थिक सम्मान बना रहेगा।
    महंगाई भत्ता सीधे तौर पर जीवन यापन की लागत से जुड़ा होता है। इसमें तेजी से बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान मूल वेतन संरचना अब वास्तविक खर्चों को वहन करने में सक्षम नहीं है।
    स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास, ईंधन और परिवहन जैसी बुनियादी जरूरतों की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी हैं।

क्या होता है DA/DR और इसका गणित?
केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को DA (Dearness Allowance) और पेंशनभोगियों को DR (Dearness Relief) प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती कीमतों के प्रभाव को बेअसर करना होता है।

क्या है वर्तमान स्थिति?
    फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को 58% की दर से DA मिल रहा है।
    संभावित बढ़ोतरी: अनुमान है कि AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर इसमें जल्द ही 2% की और वृद्धि हो सकती है।
    संशोधन चक्र: सरकार हर साल दो बार (जनवरी और जुलाई में) महंगाई भत्ते की समीक्षा और संशोधन करती है।

क्यों जरूरी है DA का मर्जर?
जब महंगाई भत्ता मूल वेतन के 50% या उससे अधिक हो जाता है, तो कर्मचारी संगठन अक्सर इसे बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग करते हैं। इससे न केवल मासिक वेतन में वृद्धि होती है, बल्कि HRA (मकान किराया भत्ता), ग्रेच्युटी और अन्य भत्ते भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि वे सीधे मूल वेतन पर आधारित होते हैं। FNPO ने उम्मीद जताई है कि वेतन आयोग इस मानवीय और आर्थिक पहलू पर विचार करेगा ताकि देश भर के लाखों परिवारों को महंगाई के इस दौर में संबल मिल सके।

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