ठंड की लहर MP में जारी: भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में कोल्ड वेव, नवंबर में रिकॉर्ड तापमान टूटा

भोपाल

 इस बार मध्य प्रदेश में नवंबर माह के भीतर ही कड़ाके की ठंड के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विभाग की मानें तो नवंबर की विदाई तेज सर्दी के साथ हुई है, जिसने राजधानी भोपाल में बीते 84 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। हालांकि, ये तो सिर्फ ठंड की शुरुआत है। आज से शुरु हुए दिसंबर महीने में और कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना जताई गई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि, इस बार नवंबर से ज्यादा ठंड दिसंबर में पड़ने की अधिक संभावना है। इसका कारण ये है कि, इस बार शहर में उत्तरी के साथ-साथ राजस्थान की ओर से पश्चिमी हवा का प्रभाव भी बना हुआ है, जिससे अधिक रफ्तार से सर्द हवा एमपी में एंटर हो रही है। ऐसे में दिसंबर में भी तेज सर्दी का दौर दिखाई दे सकता है। पहले सप्ताह में सर्दी का असर मिलाजुला रहेगा, लेकिन दूसरे सप्ताह से तेज ठंड का दौर शुरु होगा।

बता दें कि प्रदेश में 20 दिसंबर से कड़ाके की ठंड का दौर आता है, जो जनवरी तक बना रहता है। पिछले 10 साल में ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार भी कड़ाके की ठंड और कोल्ड वेव का असर रहेगा। सबसे ज्यादा सर्दी उज्जैन, ग्वालियर-चंबल संभाग में रहेगी। वजह यहां बर्फीली हवाओं का सीधे आना है।

नवंबर में सर्दी ने ऐसे तोड़ा रिकॉर्ड नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का।

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन बताती हैं, इस बार उत्तरी राज्यों में नवंबर के पहले ही सप्ताह में बर्फबारी होने लगी। इस वजह से ठंडी हवाएं प्रदेश में पहुंची। आखिरी सप्ताह में हवा की दिशा बदल गई। जिससे ठंड का असर कम रहा है।

दूसरे हफ्ते से बढ़ेगी ठंड

मौसम विशेषज्ञ ए.के शुक्ला का कहना है कि, इस बार भोपाल में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। इसी तरह का ट्रेंड दिसंबर में भी रहने के आसार है। इसका कारण ये है कि, अबतक जो हवा आ रही है, वह उत्तर और पश्चिम से आ रही है। सर्द हवा को राजस्थान की ओर से भी गति मिल रही है, जो मध्य क्षेत्र तक बनी है। साथ ही, इस बार लानीना का भी प्रभाव है। इसके कारण भोपाल में अपेक्षाकृत नवंबर में ज्यादा सर्दी रही है और रिकांर्ड टूटा है। इसी तरह का ट्रेंड दिसंबर में भी रहने की उम्मीद है।

ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं।

पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है।

अब जानिए दिसंबर में कैसा रहेगी ठंड?

मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी

    ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।
    भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।
    सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।
    जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी।

20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की माने तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है।

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