दो दिन बाद आ सकती है बड़ी खुशखबरी, रेपो रेट घटाने पर विचार कर सकता है RBI

मुंबई
 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो चुकी है. इस अहम बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा कर रहे हैं. पिछली तीन बैठकों में रिजर्व बैंक पहले ही रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर चुका है, जिससे फिलहाल रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करेगा या उन्हें स्थिर रखेगा. बैठक के नतीजे 6 अगस्त को घोषित किए जाएंगे.

रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत ब्याज दर में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती का मजबूत कारण है. अमेरिका के टैरिफ के चलते भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है और इससे समग्र आर्थिक गतिविधियों में मंदी आ सकती है.

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और अपेक्षाकृत कम मुद्रास्फीति को देखते हुए आरबीआई अगस्त की बैठक में 25 बीपीएस की कटौती कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम त्योहारी सीजन से पहले ऋण प्रवाह को तेज कर सकता है और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है.

अब तक हो चुकी है तीन बार कटौती, क्या फिर घटेगा ब्याज?

RBI ने पहले ही लगातार तीन बार रेपो रेट में कटौती की है, जिससे कुल 100 बेसिस प्वाइंट यानी 1% की कमी हो चुकी है. फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है. यही वो दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं. इसी के आधार पर लोन और EMI पर ब्याज तय होता है.

कुछ जानकारों का मानना है कि RBI अब रुक सकता है और इस बार रेपो रेट को स्थिर रख सकता है. उनका कहना है कि जून में महंगाई दर यानी रिटेल इंफ्लेशन 2.1% रही, जो काफी कम है. ऐसे में RBI पहले की गई कटौतियों का असर देखने के लिए कुछ समय ले सकता है.
कुछ एक्सपर्ट्स को है और कटौती की उम्मीद

हालांकि कई जानकार ये भी कह रहे हैं कि मौजूदा हालात में RBI एक और 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25% की कटौती कर सकता है. ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और ग्लोबल अनिश्चितता से GDP ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. ऐसे में RBI एक आखिरी कटौती कर सकता है ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिले.

Crisil के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का भी यही मानना है कि ग्रोथ पर खतरा फिलहाल महंगाई से बड़ा है, इसलिए RBI 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है.
SBI की रिपोर्ट में भी  रेपो रेट घटने की उम्मीद

SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर RBI अब कटौती करता है, तो इसका फायदा सीधे फेस्टिव सीजन में मिलेगा. बैंक का मानना है कि पहले ही त्योहारों का सीजन आ रहा है और अगर रेपो रेट घटती है, तो क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन की डिमांड बढ़ सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि RBI को देर नहीं करनी चाहिए, वरना सही समय निकल सकता है.

CareEdge Ratings का कहना है कि RBI पहले ही रेपो रेट में कटौती कर चुका है और अब कुछ समय तक उसका असर देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब तक ग्रोथ में कोई बड़ी गिरावट न दिखे, तब तक और कटौती नहीं होगी.

Bank of Baroda के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि जून की महंगाई दर या अमेरिका की टैरिफ नीति से अब पॉलिसी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. RBI पहले ही इस डेटा को ध्यान में रख चुका है. इसलिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन टोन यानी बयान में सतर्कता रहेगी.
महंगाई पर काबू, तेल की कीमत और टैरिफ से चिंता

रिजर्व बैंक को सरकार ने 4% महंगाई का टारगेट दिया है जिसमें 2% ऊपर-नीचे की छूट है. जून में महंगाई 2.1% रही है जो इस दायरे में बहुत कम है. लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ अभी भी चिंता का कारण हैं.
EMI घटेगी या नहीं?

RBI की MPC मीटिंग काफी अहम है. कुछ एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि एक और छोटी कटौती होगी, जिससे होम लोन सस्ता हो सकता है. वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि फिलहाल RBI इंतजार करेगा. अब देखना यह है कि 6 अगस्त को RBI कौन सा रास्ता अपनाता है .

अगर आप भी होम लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से EMI भर रहे हैं, तो RBI की इस मीटिंग पर नजर जरूर रखें.

समय पर नीतिगत कदम की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब भी त्योहारी सीजन जल्दी आता है और उससे पहले ब्याज दरों में कटौती होती है, तो क्रेडिट ग्रोथ (ऋण वृद्धि) में तेज़ उछाल देखने को मिला है. रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि केंद्रीय बैंक को सही समय पर कदम उठाना चाहिए, ताकि नीतिगत खिड़की का लाभ उठाया जा सके.

मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में बदलाव संभव
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे जा सकती है. इसके चलते आरबीआई इस वित्तीय वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को नीचे कर सकता है.

जीडीपी अनुमान बरकरार, बाहरी दबावों पर नजर
CareEdge ने कहा है कि वे वित्त वर्ष 2026 के लिए 6.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर के पूर्वानुमान पर कायम हैं, लेकिन अमेरिका और अन्य देशों से आने वाले बाहरी दबावों की बारीकी से निगरानी की आवश्यकता है.

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