बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज 29 साल के हुए ,’बंजर’ गढ़ा को बना दिया बागेश्वर धाम?

छतरपुर
बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज अपना 29वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके बर्थडे को खास बनाने के लिए दूर-दूर से भक्त गढ़ा ग्राम पहुंच रहे हैं। हालांकि, कल हुए हादसे के बाद उन्होंने अपना जन्मदिन बेहद साधारण तरीके से मानाने का फैसला किया है। 

भक्तों से उपहार के बदले मांगी ईंट

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने जन्मदिन पर भक्तों से उपहार के बदले ईंट मांगी है। बता दें कि बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल बन रहा है। इसके निर्माण के लिए उन्होंने सहयोग में एक-एक ईंट भेंट करने की अपील की है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी दी बधाई 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी पंडित धीरेंद्र शास्त्री को जन्मदिन की बधाई दी है। सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर, पूज्य पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। श्री बजरंग बली जी से प्रार्थना है कि सनातन संस्कृति की सेवा के लिए आप सदैव ऊर्जावान रहें, उत्तम स्वास्थ्य के साथ आप दीर्घायु हों।”

बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्मदिन आज, 29 साल के हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, वही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बागेश्वर बाबा को दी जन्मदिन की बधाई, सीएम भजनलाल ने कहा- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर परम पूज्य पंडित श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के जन्मदिवस पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं, श्री बालाजी महाराज की कृपा से आप सदैव स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों एवं अपने दिव्य सत्संग, प्रवचनों व आध्यात्मिक मार्गदर्शन से समाज को सत्य, धर्म और सेवा के पथ पर अग्रसर करते रहें

'बंजर' गढ़ा को पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कैसे बना दिया बागेश्वर धाम

तरपुर जिले के एक छोटे से गांव गढ़ा में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म 4 जुलाई 1996 को हुआ था। शास्त्री अपनी उम्र के 30वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। बागेश्वर धाम में गुरु के जन्मदिन पर हर साल हजारों की संख्या में उनके भक्त आते हैं। साथ ही भव्य कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है। इस बार भी तैयारी भव्य थी लेकिन टेंट गिरने की वजह से एक श्रद्धालु की मौत हो गई। इसके बाद धाम में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। मगर बागेश्वर धाम में भक्तों की भीड़ कम नहीं हुई है। गढ़ा में भक्तों का मेला लगा हुआ। भारी बारिश के बीच भी वहां भक्त डंटे हुए हैं। आइए आपको बताते हैं कि इतने कम दिनों में बागेश्वर सरकार यह प्रसिद्धि कैसे हासिल की। साथ ही गढ़ा और उसके आसपास के अर्थव्यवस्था को उन्होंने पूरी तरह से बदल दिया है।

कहां है गढ़ा गांव

दरअसल, जब आप छतरपुर से खजुराहो की ओर नेशनल हाइवे पकड़कर आगे की ओर बढ़ेंगे। करीब 10 किमी आगे बढ़ने के बाद गढ़ा के लिए रास्ता जाता है। हाइवे से सटा एक मुख्य द्वार बना है, जिस पर बागेश्वर धाम जाने का रास्ता लिखा हुआ है। यही से रौनक की शुरुआत हो जाती है। कुछ साल पहले तक सुनसान रहने वाले इस जगह पर अब कई होटल और मार्केट खुल गए हैं। साथ ही सवारी गाड़ियों की भीड़ रहती है जो श्रद्धालुओं को धाम तक लेकर जाते हैं। यहां से गढ़ा गांव की दूरी करीब चार से पांच किमी है। गढ़ा गांव के लोग पहले पूरी तरह से खेती पर आश्रित होते थे। पहाड़ी इलाका होने की वजह से गर्मियों में भीषण पानी की किल्लत होती थी। साथ ही जमीन भी पथरीली है।

गढ़ा गांव में ही धीरेंद्र शास्त्री का पैतृक गांव

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पैतृक घर भी गढ़ा में ही है। परिवार पूजा पाठ से ही जीवकोपार्जन करता था। आर्थिक स्थिति परिवार की ठीक नहीं थी। गांव में इनका खपरैल घर था। अब उसकी जगह पर पक्का मकान है। हालांकि छोटा ही है, जहां उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं। गांव से कुछ दूर आगे बढ़ने के बाद पहाड़ी के करीब ही बालाजी का मंदिर है। जहां धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दादा गुरु की समाधि है। बालाजी का मंदिर अब भव्य बन रहा है। मंदिर के आसपास अब सैकड़ों एकड़ जमीन में धाम फैल गया है, जिसे बागेश्वर धाम कहते हैं।

ऐसे बढ़ा बागेश्वर धाम

दरअसल, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुरुआती दिनों मंदिर या फिर आसपास के गांवों में ही कथा सुनाते थे। साथ ही लोगों की पर्ची निकालते थे। धीरे-धीरे इनकी प्रसिद्धि बढ़ी और लोगों की भीड़ जमा होने लगी। कोविड के बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जिंदगी में 360 डिग्री का बदलाव हुआ। उनकी कथाओं की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी। मध्य प्रदेश की सीमा को लांघकर वह देश और विदेश के अलग-अलग कोनों में जाकर कथा सुनाने लगे। इसके साथ ही बागेश्वर धाम पर श्रद्धालुओं की भीड़ भी उमड़ने लगी। तेजी से उस इलाके की तस्वीर बदलने लगी।

बदल गई इलाके की अर्थव्यवस्था

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जिंदगी में जितने बदलाव आए हैं, उतने ही बदलाव गढ़ा और उसके आसपास के इलाकों में देखने को मिला है। गढ़ा, बागेश्वर धाम और उसके आसपास के इलाकों में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार मिल गया है। गांवों में होम स्टे खुल गए हैं। हजारों की संख्या में धाम में दुकान हैं। इसके साथ ही अब बड़े-बड़े होटल भी खुल रहे हैं। हजारों लोगों हर दिन धाम आते हैं औसतन 10-20 लाख से अधिक का कारोबार होता है। सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बाहर से भी लोग आकर यहां व्यापार कर रहे हैं।

खपरैल घर से फाइव स्टार होटल तक का सफर

वहीं, बागेश्वर धाम सरकार का बचपन खपरैल घर में बीता है। अब वह जब कथाओं के लिए जाते हैं तो भक्त फाइव और थ्री स्टार होटल में उन्हें ठहराते हैं। अंबानी के घर लग्जरी प्राइवेट जेट से जाते हैं। हालांकि धाम पर होते हैं तो अभी भी वह मंदिर के करीब बने सामुदायिक भवन के ही एक कमरे में ठहरते हैं। जन्मदिन के मौके पर उन्हें बधाई देने का सिलसिला जारी है। अब बागेश्वर धाम पर सिर्फ आम नहीं, खास श्रद्धालुओं का भी तांता लगा रहता है। 

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