उड़ा अबीर-गुलाल महाकाल की नगरी में, पंडे-पुजारियों ने शिव-पार्वती के संग मनाया उत्सव

उज्जैन
 धार्मिक नगरी उज्जैन में विराजमान बाबा महाकाल के दरबार में हर त्योहार विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले ही शहर रंगों और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सान्निध्य में शयन आरती परिवार पिछले 26 वर्ष से अनोखी होली की परंपरा निभा रहा है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भगवान महाकाल की नगरी में इस बार होली का पर्व बेहद खास अंदाज में मनाया गया. शिप्रा नदी के किनारे नृसिंह घाट स्थित कुमार धर्मशाला में भक्त भक्ति में लीन होकर झूमते-गाते नजर आए. पूर्णिमा तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, माता हरसिद्धि मंदिर और महाकाल वन में विशेष होली उत्सव का आयोजन किया गया।

शिव-पार्वती की प्रतीकात्मक उपस्थिति
इस भव्य आयोजन का दृश्य उस समय और भी खास हो गया, जब शिव और माता पार्वती प्रतीकात्मक रूप में मंच पर प्रकट हुईं. ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी के साथ भक्तों के बीच पधार गए हों. जैसे ही शिव-पार्वती ने नृत्य आरंभ किया, वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और भजनों की मधुर धुन पर भक्त अपने भावों को रोक नहीं सके. हर चेहरा खिल उठा।

गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर

सोमवार को संध्या आरती के दौरान मंदिर का गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर नजर आया। पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर उनके साथ होली खेली। जैसे ही पुजारी ने बाबा पर केसरिया और हर्बल गुलाल छिड़का, पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा। यहां मौजूद हर कोई शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका दहन किया गया।

महाकाल करते हैं सभी त्योहारों की शुरुआत

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल ही समस्त त्योहारों की शुरुआत करते हैं, इसलिए यहां सबसे पहले होलिका प्रज्वलित की जाती है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने विशेष इंतजाम किए थे। गर्भगृह में केवल प्राकृतिक और हर्बल गुलाल के उपयोग की ही अनुमति दी गई, ताकि मंदिर की मर्यादा और गर्भगृह की सुरक्षा बनी रहे।

शिवगणों के साथ भक्तों की टोलियां
भगवान महाकाल के साथ होली खेलने के लिए शिवगण, भूत-पिशाच और नंदी विशेष वेशभूषा में नजर आए. पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे साक्षात शिव की सेना धरती पर उतर आई हो, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच भक्तों की टोलियां नाचते-गाते जुलूस के रूप में आयोजन स्थल तक पहुंचीं. हर ओर रंग, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने पूरे माहौल को शिवमय कर दिया।

ग्रहण के चलते केवल शकर का भोग अर्पित

धुलेंडी पर्व पर चंद्र ग्रहण होने के कारण महाकाल मंदिर में भस्मारती से लेकर शाम को ग्रहण समाप्त होने तक पट बंद नहीं किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, सुबह भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद ही भगवान को भोग अर्पित किया जाएगा।

शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले 14 मिनट के इस ग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।

ऐसे होगा महाकाल का पूजन

    3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। उसका वेध काल सुबह सूर्योदय से शुरू हो जाएगा।
    वेध काल के चलते सुबह की दद्योदक एवं भोग आरती में केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।
    ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान एवं पूजन किया जाएगा। इसके बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती होगी।

कल से ठंडे जल से होगा स्नान

महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय तय किया जाता है।

इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिससे भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में परिवर्तन किया जाएगा।

इसलिए ग्रहण का असर नहीं

महाकाल मंदिर पर ग्रहण का प्रभाव क्यों नहीं होता, इस पर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल कालों के काल कहलाते हैं। दक्षिण दिशा काल की मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है, इसलिए वे काल पर नियंत्रण रखते हैं। इस कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या ग्रहण महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता।

ग्रहण के दिन मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य दिनों की तरह रहेंगी, लेकिन ग्रहण के चलते न पुजारी और न ही श्रद्धालु भगवान को स्पर्श करेंगे। इस दौरान गर्भगृह में पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद पुजारी स्नान कर मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे, फिर भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भोग अर्पित किया जाएगा।

भजन-कीर्तन और अबीर-गुलाल
इस दौरान महिला भक्तों ने शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गाए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया. यह आयोजन महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें मंदिर के पुजारी, भक्त और आम श्रद्धालु शामिल होते हैं. आयोजन के दौरान कुछ भक्त चौसर खेलते नजर आए, तो वहीं दूसरी ओर भांग भी तैयार की जा रही थी. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है

 

admin

Related Posts

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों की संगठित धोखाधड़ी का पर्दाफाश सीआईडी ने दर्ज की दो एफआईआर

भोपाल पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा एक बड़े संगठित बीमा धोखाधड़ी गिरोह का खुलासा किया गया है। इस मामले में अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस मुख्यालय…

पुलिस विभाग में 2070 महिला आरक्षकों को दिये जायेंगे नियुक्ति पत्र

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के पालन में पुलिस विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी रिक्त पदों पर बढ़ाने के प्रयास जारी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

RCB की पारी ढही: 155 रन पर खत्म, अरशद-होल्डर चमके

  • By admin
  • April 30, 2026
  • 3 views
RCB की पारी ढही: 155 रन पर खत्म, अरशद-होल्डर चमके

पंत की मुश्किलें बढ़ीं, संजू सैमसन बन सकते हैं भारत के नए विकेटकीपर

  • By admin
  • April 30, 2026
  • 3 views
पंत की मुश्किलें बढ़ीं, संजू सैमसन बन सकते हैं भारत के नए विकेटकीपर

गुजरात टाइटंस ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ जीता टॉस

  • By admin
  • April 30, 2026
  • 3 views
गुजरात टाइटंस ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ जीता टॉस

IPL 43वां मैच: राजस्थान और दिल्ली के बीच कड़ी टक्कर, जानें पूरी डिटेल

  • By admin
  • April 30, 2026
  • 3 views
IPL 43वां मैच: राजस्थान और दिल्ली के बीच कड़ी टक्कर, जानें पूरी डिटेल

264 से लेकर 5 वर्ल्ड कप शतक तक: क्यों खास है रोहित शर्मा का ‘हिटमैन’ अवतार

  • By admin
  • April 30, 2026
  • 1 views
264 से लेकर 5 वर्ल्ड कप शतक तक: क्यों खास है रोहित शर्मा का ‘हिटमैन’ अवतार

243 रन के बावजूद मुंबई की हार, हैदराबाद ने 6 विकेट से जीता मुकाबला

  • By admin
  • April 30, 2026
  • 3 views
243 रन के बावजूद मुंबई की हार, हैदराबाद ने 6 विकेट से जीता मुकाबला