पुलिस ने कर्नाटक के कॉफी बागान में बंधक बनाए गए 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया

 अशोकनगर

कर्नाटक के कॉफी बागान में बंधक बनाकर रखे गए मध्यप्रदेश के 12 मजदूरों को पुलिस ने मुक्त करवा लिया है. सभी मजदूर मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से कॉफी बागान में काम करने गए थे.

दरअसल, अशोकनगर एसपी विनीत जैन को 30 जनवरी को मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस की एक टीम कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में गई थी. टीम के सदस्यों ने सबसे पहले कॉफी बागान में बंधक बनाए गए मजदूरों को ढूंढा.

अशोकनगर थाने के प्रभारी मनीष शर्मा ने बताया कि मजदूरों के स्थान का पता लगाने के बाद पुलिस ने चिकमंगलूर जिले के जयापुरा थाने से संपर्क किया और स्थानीय पुलिस की मदद से 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया और मध्यप्रदेश वापस लाया गया.

वहीं, ठेकेदार अफसर अली को बाद में पकड़ लिया गया और अशोकनगर लाया गया. अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. कॉफी बागान मैनेजमेंट से 90 हजार रुपये का एडवांस लेकर ठेकेदार अली अशोकनगर से मजदूरों को कर्नाटक ले गया था. लेकिन वह वहां से भाग निकला था.

एसपी ने बताया कि ये लोग कुछ हद तक बंधुआ मजदूरों की तरह काम कर रहे थे. उन्होंने बताया कि कुछ और लोग भी इसी तरह से वहां काम कर रहे हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है.

मजदूरों को कर्नाटक लेकर गया ठेकेदार फरार

जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्र टकनेरी से कई मजदूरों को ठेकेदार अफसर अली मजदूरी के लिए कर्नाटक लेकर गया। वह उनको कर्नाटक के घने जंगलों में कॉफी के फल को तोड़ने के काम के लिए लेकर गया था। ठेकेदार करीब 2 महीने पहले उनको लेकर गया था। उनको वहां छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया। वहां काम करने गए मजदूरों ने अपने घर पर ऐसी बात बताई की परिजन हैरान परेशान हो गए। साथ ही पुलिस में शिकायत करने पहुंच गए।

पुलिस के पास पहुंचे परिजन

मजदूरों के परिजन में से एक मनकुंवर बाई ने पुलिस में शिकायत की गई। उसने बताया कि उनके परिवार और आसपास के रहने वाले कई मजदूर कर्नाटक में फंसे हुए हैं। उन्हें घर नहीं आने दिया जा रहा। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत सुन मामले को गंभीरता से लिया।

पुलिस ने तुरंत लिया एक्शन

एसपी विनीत कुमार जैन ने तुरंत एक्शन लेते हुए निर्देश दिए। जिस पर थाना कोतवाली प्रभारी मनीष शर्मा के नेतृत्व में एक टीम बनाकर जांच शुरू की गई। उनकी तरफ से कॉफी कंपनी के लोगों से मामले को लेकर चर्चा की गई। साथ ही वहां के मैनेजर को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। इसके बाद कंपनी ने मजदूरों को वहां से छोड़ा। वहां से छूटते ही बुधवार की सुबह मजदूर शहर लौटे और एसपी से मुलाकात की।

मजदूरों के छूटने में महाराज सिंधिया ने की मदद

बंधक से आजाद होकर आई मजदूर इंदर बाई ने बताया कि उन्होंने वहां फंसे होने की सूचना बीजेपी नेता उपेंद्र पाराशर को बताई थी। जिसके बाद उन्होंने मामले को क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संज्ञान में लाया। इसके बाद एसपी को शिकायत की गई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां फंसे मजदूरों को यहां लाने की कार्रवाई शुरू की थी।

बाउंड्री वॉल के अंदर बने थे मजदूरों के मकान

कर्नाटक से लौटे मजदूर मोतीलाल ने बताया कि उन्हें वहां पर घने जंगल के बीच एक बाउंड्री वॉल के अंदर रखा जाता था। साथ ही मजदूरी के लिए पहाड़ी इलाके में ले जाया जाता था। बाहर जाने के लिए भी अनुमति लेना पड़ता था। राशन लेने के लिए भी एक ही व्यक्ति जंगल से कुछ ही दूरी पर स्थित बाजार से आता था। उसके लिए भी एक ही मजदूर को भेजा जाता था जो सभी मजदूरों का राशन लेकर आता था।
छोड़ने आए व्यक्ति ने जो बताया कर देगा हैरान

कर्नाटक से मजदूरों को लेकर आए राम सिंह ने बताया कि वह भी यहां से मजदूरों को 380 रुपए रोज में लेकर जाते हैं। हालांकि फंसे हुए मजदूरों का ठेकेदार अफसर अली वहां से एडवांस पैसा लेकर भाग आया। मजदूरों लेकर आए व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने मेरी पत्नी और बच्चे को भी वही रोका है और कंपनी के लोगों ने मुझे इन मजदूरों को यहां छोड़ने के लिए कहा है। अब इन्हें छोड़ कर वापस भी जाना है। वहीं मजदूरों ने अभी भी वहां अन्य 70 मजदूरो के फंसे होने की बात भी बताई।

एसपी ने बताया कि जिले के टकनेरी ग्राम के कुछ मजदूर पिछले दो माह पहले कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के अन्नापुरई में काम करने के लिए गए थे। जहां उन्हें पैसे के लेनदेन के कारण रोक लिया गया। इसके बाद उनके परिजनों ने शिकायत की तो लगभग एक दर्जन मजदूर घर लौट आए। जिनमें इंदर बाई आदिवासी, मोटीलाल आदिवासी, जानकी बाई, सिमरन आदिवासी, गीता आदिवासी, कृष्ण, मोतीलाल, कल्लू, रामसिंह सहित अन्य मजदूर शामिल हैं।

 

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