जयपुर
भीड़भाड़ वाले बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या किसी पार्क में अगर कोई घबराया हुआ शख्स आपसे कहे भाई साहब, एक जरूरी कॉल करनी है” तो जरा ठहर जाइए। यह मासूम सी लगने वाली गुजारिश अब एक खतरनाक साइबर साजिश का हिस्सा बन चुकी है। राजस्थान में तेजी से फैल रहे इस नए फ्रॉड ने पुलिस और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग अब सीधे डिजिटल फ्रॉड करने के बजाय लोगों की भावनाओं और इंसानियत को निशाना बना रहे हैं। “एक कॉल” का बहाना बनाकर वे कुछ ही सेकंड में ऐसा खेल कर जाते हैं कि पीड़ित को देर तक पता ही नहीं चलता कि उसके साथ क्या हो गया।
कैसे रचते हैं ठगी का जाल?
डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, ठग पहले सार्वजनिक जगहों पर ऐसे लोगों को तलाशते हैं जो जल्दी मदद करने को तैयार दिखें। फिर वे इमरजेंसी का हवाला देकर मोबाइल मांगते हैं कभी कहते हैं बैटरी खत्म हो गई, कभी किसी परिजन की तबीयत खराब होने की बात करते हैं।
जैसे ही मोबाइल उनके हाथ में आता है, वे तेजी से एक खास कोड डायल करते हैं। यही वह पल होता है, जब खेल शुरू हो जाता है। इस कोड के जरिए कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव कर दी जाती है, जिससे आपके फोन पर आने वाले ओटीपी सीधे ठग के नंबर पर पहुंचने लगते हैं।
इसके बाद ठग को आपके बैंक खाते, यूपीआई ऐप, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप तक पहुंच बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता। वह आराम से पासवर्ड रीसेट करता है और खाते से पैसे साफ कर देता है और आपको भनक तक नहीं लगती।
स्पाइवेयर का भी खतरा
मामला यहीं खत्म नहीं होता। कई मामलों में ठग आपके फोन में चुपके से स्पाइवेयर या की-लॉगर इंस्टॉल कर देते हैं। ये ऐसे खतरनाक टूल होते हैं जो आपके हर टाइप किए गए शब्द, पासवर्ड, बैंक डिटेल और निजी बातचीत को रिकॉर्ड कर लेते हैं।
यानि, एक बार फोन हाथ में देने के बाद आपकी पूरी डिजिटल जिंदगी किसी अनजान व्यक्ति के नियंत्रण में जा सकती है।
रिश्तों का भी कर सकते हैं दुरुपयोग
साइबर अपराधी यहीं नहीं रुकते। वे आपके कॉन्टैक्ट्स चुरा लेते हैं और फिर आपके परिवार या दोस्तों को मैसेज या कॉल कर “इमरजेंसी” का ड्रामा रचते हैं। “मैं मुसीबत में हूं, तुरंत पैसे भेजो” ऐसे मैसेज भेजकर वे आपके करीबी लोगों से भी पैसे ठग लेते हैं।
कानूनी झंझट में भी फंस सकते हैं आप
इस पूरे खेल का एक और खतरनाक पहलू है। अगर कोई ठग आपके फोन से किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए कॉल करता है, तो जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आपका नंबर सामने आएगा। ऐसे में आप बिना गलती के भी पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया में उलझ सकते हैं।
कैसे बचें इस ‘एक कॉल’ के जाल से?
राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मदद जरूर करें, लेकिन सतर्कता के साथ। अगर कोई कॉल करने के लिए कहता है, तो फोन खुद अपने हाथ में रखें, नंबर खुद डायल करें और स्पीकर पर बात कराएं। किसी भी अनजान व्यक्ति को अनलॉक मोबाइल देना खतरनाक हो सकता है।
अगर गलती से आपने फोन दे दिया है, तो तुरंत अपने मोबाइल में *#21# डायल कर कॉल फॉरवर्डिंग चेक करें और ##002# डायल कर उसे बंद कर दें। साथ ही अपने सभी पेमेंट ऐप्स पर मजबूत पिन और बायोमेट्रिक लॉक जरूर लगाएं।
शिकायत कहां करें?
अगर आप या आपका कोई परिचित इस तरह की ठगी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर कार्रवाई से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।









