6 नवंबर से आरंभ मार्गशीर्ष मास — जानिए धार्मिक मान्यताएँ और खास नियम

मार्गशीर्ष मास को अग्रहायण और अगहन मास का महीना भी कहते हैं. यह हिंदू पंचांग का नौवें महीना होता है, जिसका नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति के कारण ‘मृगशीर्ष’ नक्षत्र से लिया गया है. धर्म शास्त्रों में मार्गशीर्ष मास को सर्वाधिक पवित्र महीना माना गया है. मान्यता है कि इसी महीने से सतयुग की शुरुआत मानी जाती है. इस लेख में आपको बताते हैं कि यह महीना इतना शुभ क्यों माना जाता है और कब से कब तक चलेगा.

मार्गशीर्ष महीना शुभ क्यों माना जाता है?

मार्गशीर्ष के महीने में भगवान विष्णु, भगवान श्रीकृष्ण और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस महीने को “मार्गशीर्ष” इसलिए कहा जाता है, क्योंकि भगवान कृष्ण ने स्वयं इसे महीनों में सबसे श्रेष्ठ बताया है. इसी वजह से यह महीना भगवान कृष्ण की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित माना जाता है.

मार्गशीर्ष महीना कब से कब तक है?

मार्गशीर्ष मास की शुरुआत कार्तिक पूर्णिमा के अगले दिन से हो जाती है. पंचांग के मुताबिक, मार्गशीर्ष का महीना 6 नवंबर 2025 से शुरू होगा और इसका समापन 4 दिसंबर 2025 को हो जाएगा.

मार्गशीर्ष माह में क्या करना चाहिए?

मार्गशीर्ष मास में विष्णुसहस्त्र नाम, भगवतगीता और गजेन्द्रमोक्ष का पाठ करना चाहिए. इसके अलावा, मार्गशीर्ष मास के दौरान भगवान कृष्ण, श्रीहरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है. इस माह में स्नान करने के बाद ब्राह्मण के माध्यम से पितृ तर्पण और पितृ पूजा करनी चाहिए.

मार्गशीर्ष महीने में क्या नहीं करना चाहिए

मार्गशीर्ष महीने में तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) नहीं करना चाहिए और गुस्सा, आलस, छल-कपट और ईर्ष्या जैसे दुर्गुणों से दूर रहना चाहिए. इसके अलावा, गुरुजनों, माता-पिता या बड़ों का अपमान नहीं करना चाहिए और किसी को भी कटु वचन नहीं बोलने चाहिए. मार्गशीर्ष मास में सूर्यास्त के बाद झाड़ू-पोंछा और नाखून काटना भी वर्जित है.

मार्गशीर्ष महीने में क्या नहीं खाना चाहिए?

मार्गशीर्ष महीने में तामसिक भोजन (जैसे मांसाहार, प्याज, लहसुन) नहीं खाना चाहिए और जीरे का सेवन भी नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, अगहन मास में बासी भोजन और कुछ सब्जियों जैसे बैंगन, मूली आदि से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है. इस महीने के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए.

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