उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकारा, गृह मंत्रालय को भेजी आगे की कार्रवाई के लिए फाइल

नई दिल्ली
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा मंजूर किया। सोमवार शाम को ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को भेजा था। इसी के बाद से सियासी पारा चढ़ गया था।

उनका कार्यकाल अगस्त 2027 में पूरा होना था.राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे इस्तीफे में धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों को का इसका कारण बताया है. धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब उनके उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी. नियमानुसार इसकी कोई समय सीमा तो नहीं है, लेकिन चुनाव जल्द से जल्द कराना होगा. धनखड़ ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है, जब बीजेपी अपने नए अध्यक्ष की तलाश कर रही है. धनखड़ के इस्तीफे से बीजेपी का काम बढ़ गया है. 

धनखड़ के इस्तीफे पर बोले PM मोदी- उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना

जगदीप धनखड़ के एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की है। पीएम मोदी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि श्री धनखड़ को उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है ।

पीएम ने क्या लिखा
प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। उल्लेखनीय है कि धनखड़ ने सोमवार देर शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

हाल ही में हुई थी एंजियोप्लास्टी
धनखड़ (74) ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। राज्यसभा के सभापति धनखड़ का इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आया। हाल में उनकी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस वर्ष मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ अवसरों पर उनकी हालत ठीक नहीं दिखी थी, लेकिन संसद सहित सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अक्सर ऊर्जावान ही दिखे। वहीं, विपक्ष उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर सवाल उठा रहा है।

कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति
गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ सोमवार को कार्यकाल के बीच में पद से इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए। इससे पहले, वीवी गिरि ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, जिन्होंने तीन मई 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला था। वहीं, भैरों सिंह शेखावत ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद 21 जुलाई 2007 को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।

अब बीजेपी क्या करेगी

जगदीप धनखड़ जनता दल और कांग्रेस से होते हुए बीजेपी में शामिल हुए थे. धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी को उनके उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी. उसके पास अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश के साथ ही नए उपराष्ट्रपति के तलाश का भी काम आ गया है. बीजेपी इस समय केंद्र में गठबंधन की सरकार चला रही है. उसे चंद्रबाबू नायडू के तेदेपा, नीतीश कुमार के जेडीयू और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ-साथ कई और छोटे दलों का समर्थन हासिल हैं. इसलिए बीजेपी को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार की तलाश में सहयोगी दलों के हितों का भी ध्यान रखना होगा. नए उम्मीदवार में उसे संसदीय परंपराओं की जानकारी के साथ-साथ सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की क्षमता का भी ध्यान रखना होगा. संसद के मानसून सत्र में सरकार कई विधयेक लेकर आने वाली है, वहीं वन नेशन, वन इलेक्शन, जैसा बिल भी लाया जाना है. इसे पास कराने में नए उपराष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. 

बीजेपी के अध्यक्ष की तलाश

बीजेपी को ये दोनों काम ऐसे समय करने पड़ रहे हैं, जब लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है. ऐसे में बीजेपी को एक ऐसे अध्यक्ष की तलाश है, जो लगातार चौथी बार पार्टी की जीत का रास्ता बना सके. बीजेपी के नए अध्यक्ष पर उम्मीदों का बड़ा बोझ होगा. उसके सामने अमित शाह जैसे प्रदर्शन की चुनौती होगी. वहीं बीजेपी को एक ऐसे उपराष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश करनी होगी, जिसमें सदन के सुचारु रूप से चलाने की क्षमता हो.क्योंकि आने वाला समय बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण है. नरेंद्र मोदी सरकार कई ऐसे बिल लेकर आ रही है, जिन्हें सुचारू रूप से पास कराना चुनौती होगी. 

इन सबके बाद संगठन और सरकार में भी नए बदलाव की उम्मीद की जा रही है. कैबिनेट में विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं. ऐसी भी चर्चाएं हैं कि कुछ मंत्रियों को संगठन और कुछ नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है.इसकी संभावना काफी दिनों से जताई जा रही है. 

कब और कैसे मिलेगा देश को नया उपराष्ट्रपति? जानिए

जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी भूचाल ला दिया है. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है. मानसून सत्र के पहले दिन ही धनखड़ के इस्तीफे से हलचल बढ़ गई. इस इस्तीफे के बाद अब सवाल है कि आगे क्या होगा? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने से उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है. अब सवाल है कि जगदीप धनखड़ का उत्तराधिकारी कौन होगा? दरअसल, भाजपा नीत एनडीए को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं. आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है. भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है. राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है. जगदीप धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे.

अब कौन संभालेगा कमान?

संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत राष्ट्रपति मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया. अब राज्यसभा में सभापति की कमान कौन संभालेगा? नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे. अनुभवी सांसद हरिवंश नारायण सिंह सिंह वह मौजूदा सत्र को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संचालित कर सकते हैं. हालांकि, उनकी यह भूमिका अस्थायी होगी.

कितने दिन के भीतर उपराष्ट्रपति का चुनाव?

संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद खाली होने के 60 दिनों के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव अनिवार्य होता है. इसका मतलब है कि 19 सितंबर 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी. माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी करेगा. उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है. वर्तमान में 543 लोकसभा सांसदों और 245 राज्यसभा सांसदों (नामित सदस्यों सहित) के साथ कुल 788 मतदाता इस प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे. यह चुनाव गुप्त मतदान के माध्यम से होता है.

किस सिस्टम से चुनाव?

उपराष्ट्रपति के चुनाव में केवल राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य ही वोट करते हैं. वह भी सीक्रेट बैलट और प्रोपोर्शनल सिस्टम का इस्तेमाल करके. इसे ऐसे समझें कि उपराष्ट्रपति चुनाव में एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) सिस्टम का उपयोग होता है, जो आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर आधारित है. इस प्रणाली में सांसद उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में रैंक करते हैं. अगगर पहले दौर में कोई उम्मीदवार पूर्ण बहुमत (50% + 1 वैध मत) हासिल नहीं करता, तो सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को हटा दिया जाता है और उनके मत दूसरी प्राथमिकता के आधार पर पुनर्वितरित किए जाते हैं. यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं कर लेता. यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि चुना गया उम्मीदवार संसद के व्यापक समर्थन को प्रतिबिंबित करे.

एनडीए के पास बहुमत

नए उपराष्ट्रपति के लिए उम्मीदवारों को लेकर अटकलें शुरू हो चुकी हैं. एनडीए के पास दोनों सदनों में बहुमत है. ऐसे में अपने राजनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप वह एक उम्मीदवार चुन सकता है. हालांकि, विपक्षी इंडिया गठबंधन भी एक मजबूत उम्मीदवार उतारकर एनडीए को चुनौती दे सकता है, जिससे यह चुनाव राजनीतिक रूप से दिलचस्प हो सकता है. माना जा रहा है कि 19 सितंबर तक देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा.

भाजपा के पास क्या विकल्प

भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है. राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है. नखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. जगदीप धनखड़ के पूर्ववर्ती एम वेंकैया नायडू थे. वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में थे. पार्टी ने 2017 में उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना था। नायडू भाजपा के अध्यक्ष भी रहे.

कौन है रेस में आगे?

जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है.

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