चित्रकूट में 500 साल पुरानी पांडुलिपियां मिलीं, उर्दू में मिला ‘कालिया मर्दन’ का अनूठा वर्णन

चित्रकूट 

मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगरी चित्रकूट में किए गए सर्वेक्षण के दौरान 500 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान की गई है। इन पांडुलिपियों का अध्ययन वर्तमान में तुलसी शोध संस्थान में किया जा रहा है। यह खोज भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में मिली पांडुलिपियां
इस सर्वेक्षण में मिली पांडुलिपियों की खास बात यह है कि ये विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं। अधिकांश पांडुलिपियां देवनागरी और संस्कृत में हैं, जबकि कुछ दुर्लभ पांडुलिपियां उर्दू भाषा में भी प्राप्त हुई हैं यह विविधता भारतीय समाज में भाषाई और सांस्कृतिक समन्वय की गहरी परंपरा को दर्शाती है।

उर्दू पांडुलिपि में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन का वर्णन
इन पांडुलिपियों में एक अत्यंत रोचक तथ्य सामने आया है। उर्दू लिपि में लिखी एक पांडुलिपि में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन, जिसे 'कालिया मर्दन' कहा जाता है, का चित्रण किया गया है। आमतौर पर यह प्रसंग संस्कृत, ब्रजभाषा या अवधी साहित्य में मिलता है, लेकिन उर्दू में इसका वर्णन भारतीय सांस्कृतिक समावेश का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

तुलसीदास जी और भगवान गणेश का भी उल्लेख
उर्दू पांडुलिपि में गोस्वामी तुलसीदास का चित्र और उल्लेख भी दर्ज है।  साथ ही भगवान गणेश का भी चित्रण इसमें देखने को मिला है। यह पांडुलिपि धार्मिक ग्रंथ “पोथी सतनाम” का हिस्सा बताई जा रही है। इसे ऐतिहासिक रूप से मुंशी नवल किशोर प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था। इसमें मंगलाचरण, दोहा और चौपाई जैसे पारंपरिक काव्य रूप भी सम्मिलित हैं। 

रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से जुड़ी सामग्री
चित्रकूट में हुई खोज में तुलसी शोध संस्थान के प्रबंधक ओम प्रकाश पटेल ने बताया कि चित्रकूट क्षेत्र में रामचरितमानस की हस्तलिखित पांडुलिपियों के अंश भी सुरक्षित मिले हैं और इसके साथ ही रामायण और महाभारत कालीन परंपराओं से संबंधित देवनागरी लिपि में लिखी गई पांडुलिपियां भी आज तक संरक्षित हैं। हालांकि, इनमें से कई पांडुलिपियां आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं और उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण व अध्ययन किया जा रहा है।

350 पांडुलिपियां संस्थान में जमा, विशेषज्ञ कर रहे अध्ययन
मध्यप्रदेश संस्कृत विभाग द्वारा लगभग 350 पांडुलिपियां चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान में जमा कराई गई हैं। यहां विशेषज्ञ इनकी भाषा, लिपि, विषयवस्तु और ऐतिहासिक महत्व को समझने में जुटे हैं। इन पांडुलिपियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और साहित्य के कई अनछुए पहलुओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। 

 ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चल रहा राष्ट्रीय अभियान
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण का अभियान 16 मार्च से प्रारंभ किया गया है। यह अभियान तीन माह तक चलेगा। अभियान से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया कि इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुनः प्रकाश में लाना और उसे आम जनमानस तक पहुंचाना है।

इन तीन चरणों में होगा संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य
सरकार द्वारा इस मिशन को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में पांडुलिपियों की खोज, पहचान व दस्तावेजीकरण का कार्य होगा। दूसरे चरण में एकत्रित पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। वहीं, तीसरे चरण में विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन, संरक्षण और अर्थ स्पष्ट करने कार्य पूर्ण होगा। तीन माह बाद इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
 
आम नागरिक भी कर सकते हैं योगदान
संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘ज्ञान भारतम’ एप भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से आम लोग भी इस अभियान में भाग ले सकते हैं। जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियां हैं, वे एप पर लॉगिन कर उनकी फोटो, भाषा और स्थान की जानकारी अपलोड कर सकते हैं।

भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का जीवंत उदाहरण
उर्दू भाषा में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन, तुलसीदास जी और भगवान गणेश का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल एक भाषा या परंपरा तक सीमित नहीं है। यह विविधता और एकता का अद्भुत संगम है, जो देश की साझा विरासत को दर्शाता है।

डिजिटल रूप में भी कर सकते है इस्तेमाल
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय दिल्ली में प
दस्थ चंद्रमौली त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने पहले चरण में ज्ञान भारतम एप को आम जनमानस के लिए खोल दिया है जिनके पास भी ऐसी पांडुलिपियां हैं, वह एप में लाागिन कर लोकेशन बताते हुए उसकी भाषा बताकर फोटो अपलोड कर सकता है और आसानी से इस एप के जरिए ज्ञान को सहेजने का काम कर सकते है और इससे लोगों को एक नया तरीका भी उपलब्ध हो गया है का

 

admin

Related Posts

राजधानी भोपाल में स्मार्ट ट्रैफिक निगरानी, कंट्रोल रूम से ड्रोन कैमरों के जरिए जारी हो रहे चालान

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप अपनी गाड़ी किसी व्यस्त सड़क किनारे पार्क करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। भोपाल पुलिस अब आसमान से आप…

डिप्टी CM देवड़ा का बड़ा निर्देश, आबकारी नीति लागू करने में किसी तरह की ढील नहीं

कलेक्टर्स आबकारी नीति का कड़ाई से कराएं पालन: उप मुख्यमंत्री देवड़ा नियमों का उल्लंघन करने वाली मदिरा दुकानों पर होगी सख्त कार्रवाई भोपाल  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने जिलों के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

IPL प्लेऑफ में रन बरसे: पाटीदार की शानदार बल्लेबाजी से गुजरात पर बढ़ा दबाव

  • By admin
  • May 26, 2026
  • 3 views
IPL प्लेऑफ में रन बरसे: पाटीदार की शानदार बल्लेबाजी से गुजरात पर बढ़ा दबाव

वनडे-T20 के लिए श्रीलंका को नया कप्तान, तीनों फॉर्मेट की टीम का हुआ ऐलान

  • By admin
  • May 26, 2026
  • 2 views
वनडे-T20 के लिए श्रीलंका को नया कप्तान, तीनों फॉर्मेट की टीम का हुआ ऐलान

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का बड़ा ऐलान, T20 क्रिकेट में 200 रन ठोकने का जताया भरोसा

  • By admin
  • May 26, 2026
  • 3 views
युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का बड़ा ऐलान, T20 क्रिकेट में 200 रन ठोकने का जताया भरोसा

धर्मशाला में भिड़ेंगी दिग्गजों की फौज, कोहली की टीम के सामने रबाडा और राशिद का दमदार हमला

  • By admin
  • May 26, 2026
  • 2 views
धर्मशाला में भिड़ेंगी दिग्गजों की फौज, कोहली की टीम के सामने रबाडा और राशिद का दमदार हमला

फ्लॉप प्रदर्शन पड़ा भारी? IPL 2026 के बाद 5 टीमों में हो सकता है बड़ा कप्तानी बदलाव

  • By admin
  • May 26, 2026
  • 2 views
फ्लॉप प्रदर्शन पड़ा भारी? IPL 2026 के बाद 5 टीमों में हो सकता है बड़ा कप्तानी बदलाव

French Open 2026: जोकोविच बने सबसे बड़े रिकॉर्डधारी, रोजर फेडरर को छोड़ा पीछे

  • By admin
  • May 25, 2026
  • 2 views
French Open 2026: जोकोविच बने सबसे बड़े रिकॉर्डधारी, रोजर फेडरर को छोड़ा पीछे