ट्रंप की ‘मैडमैन थ्योरी’ क्या है? क्यों ईरान पर कभी नरमी तो कभी युद्ध की भभकी देते हैं

ईरान
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से मिडिल-ईस्ट में छिड़े युद्ध के 10 दिन बीत चुके हैं। बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी तक यह स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने की ठोस वजह क्या थी और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। ऐसे में ईरान जंग पर ट्रंप सरकार की न शुरुआत स्पष्ट है और न ही युद्ध अंत करने का कोई रोडमैप सामने आ रहा है। इससे अमेरिका और विश्व राजनीति में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं ट्रंप की ईरान नीति पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति और संदेश लगातार बदलते रहे हैं। दस दिन बाद भी, ट्रंप अभी तक इस बात का कोई पक्का कारण नहीं बता पाए हैं कि उन्होंने युद्ध क्यों किया। अब, वह इशारा कर रहे हैं कि शांति जल्द ही आ सकती है, जबकि दूसरी तरफ वह खुद और उनके टॉप सहयोगी साथ चेतावनी दे रहे हैं कि लड़ाई और तेज और भीषण हो सकती है और ज़्यादा समय तक चल सकती है। ट्रंप एक तरफ कड़ी सैन्य कार्रवाई और तेल आपूर्ति रोकने पर "20 गुना घातक" हमले की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मदद और बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में भारी कन्फ्यूजन का स्थिति है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। शेयर बाजारों में गिरावट और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी खिंचती है तो इसका असर विश्व आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। इसके साथ ही ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों से पूरे मध्य-पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका और गहरा सकती है।

अमेरिका के अंदर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
खबर के मुताबिक, अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आम चुनावों और मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि में महंगाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कई सर्वेक्षणों में यह संकेत मिला है कि अमेरिकी जनता का बड़ा हिस्सा किसी नए विदेशी युद्ध के पक्ष में नहीं था। दूसरी तरफ, फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने हमला नहीं किया होता तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व पर कब्जा कर सकता था। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया।

विशेषज्ञों की अलग राय
ट्रंप ने यह भी कहा कि यह अभियान अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित होगा और अंततः इससे तेल और गैस की कीमतें कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह एक जरूरी सैन्य कार्रवाई थी और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध शुरू होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि ईरान पहले से ही कमजोर स्थिति में था। हाल के वर्षों में हमास और हिज्बुल्ला जैसे ईरान समर्थित समूहों को भारी सैन्य नुकसान हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था भी दबाव में थी।

ट्रंप की "मैडमैन थ्योरी" क्या?
कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह कन्फ्यूजन दरअसल ट्रंप की "मैडमैन थ्योरी" (Madman Theory) का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वे दुश्मन को अनिश्चित रखकर दबाव बनाना चाहते हैं। साथ ही, घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी युद्धों के प्रति अमेरिकी जनता की कम सहनशीलता भी उन्हें जल्द युद्ध खत्म करने का दावा करने पर मजबूर कर रही है। हालांकि, युद्ध शुरू करने के पीछे उनके तर्क बदलते रहे हैं, कभी इसे ईरान का आसन्न परमाणु खतरा बताया, तो कभी दावा किया कि ईरान अमेरिका पर हमला करने वाला था, और कभी इसे इजरायल के हितों की रक्षा से जोड़ा।

असली सवाल: क्या युद्ध खत्म करना आसान होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वे इसे जल्दी समाप्त कर पाएंगे। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अभी तक स्वतंत्र रूप से इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है। बहरहाल, ईरान युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिकी घरेलू राजनीति- तीनों पर गहरा असर डाल रहा है। जब तक स्पष्ट रणनीति और कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आता, तब तक इस संघर्ष के जल्दी समाप्त होने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।

 

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