भारत पर अमेरिकी टैरिफ का वार, जानें कौन से सेक्टर सुरक्षित और कौन से नहीं

नई दिल्ली

अमेरिका द्वारा भारत से आने वाले माल पर बुधवार से 50% तक के टैरिफ लागू किए जाने के बाद भारत के परिधान, वस्त्र, रत्न-आभूषण, झींगा, कालीन और फर्नीचर जैसे श्रम प्रधान और कम मार्जिन वाले उद्योग पर असर पड़ सकता है। ट्रेड थिंक-टैंक Global Trade Research Initiative (GTRI) का अनुमान है कि 2025-26 में भारत का अमेरिका को माल निर्यात लगभग 43% घटकर 87 अरब डॉलर से 49.6 अरब डॉलर पर आ सकता है। इनमें से लगभग दो-तिहाई निर्यात मूल्य पर 50% शुल्क लगेगा।

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ आज (बुधवार) से प्रभावी हो जाएगा. इस कदम का सीधा असर भारत के परिधान, टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, झींगा, कालीन और फर्नीचर जैसे श्रम आधारित और कम मुनाफे वाले उद्योगों पर पड़ सकता है. ट्रेड थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 43% घटकर 87 अरब डॉलर से घटकर 49.6 अरब डॉलर पर आ सकता है. अनुमान है कि कुल निर्यात मूल्य का करीब दो-तिहाई हिस्सा अब 50% ड्यूटी के दायरे में आएगा. 

अमेरिकी प्रशासन द्वारा इसे पहले जुलाई 2025 में 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था. इसके बाद अब दूसरी बार 27 अगस्त 2025 लगाया जा रहा है. अमेरिका का कहना है कि भारत रूस से लगातार तेल की खरीद कर रहा है जिस कारण से यह नया टैरिफ लगाया गया है.

ट्रंप प्रशासन ने यह शुल्क दो चरणों में लगाया है। ट्रंप की अमेरिकी फर्स्ट नीति के तहत 25% टैरिफ जुलाई 2025 से लागू की गई है। वहीं, अतिरिक्त 25% टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू की गई है। भारत के द्वारा रूस से तेल और डिफेंस डील जारी रखने की वजह से यह कार्रवाई की है।

पाकिस्तान को फायदा
करीब 30% एक्सपोर्ट ड्यूटी फ्री रहेगा। इनमें दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स शामिल हैं। इसी तरह 4% भारतीय एक्सपोर्ट पर 25% टैरिफ होगा। इसमें मुख्य रूप से ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। भारत को हुए इस नुकसान का फायदा बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को मिलेगा जिन पर भारत से कम टैरिफ लगाया गया है। भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिका के बाजार में टिके रहना संभव नहीं है।

अमेरिका के साथ भारत ट्रेड सरप्लस की स्थिति में है जबकि चीन, रूस और यूएई जैसे टॉप पार्टनर्स के साथ वह घाटे में है। भारत से होने वाले कुल मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी 20% है। सबसे ज्यादा मार टेक्सटाइल्स और जेम्स एंड जूलरी सेक्टर पर पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि इनका 30% एक्सपोर्ट अमेरिका को होता है। ये सेक्टर सरकार से उसी तरह के सपोर्ट की मांग कर रहे हैं जिस तरह कोरोना काल में दिया गया था।

कंपनियों ने रोका प्रोडक्शन
निर्यातकों का कहना है कि तमिलनाडु के तिरुपुर, नोएडा और सूरत में कपड़ा बनाने वाली कंपनियों ने काम करना बंद कर दिया है क्योंकि वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से सस्ती चीजें आ रही हैं, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है। झींगा मछली के कारोबार में भी परेशानी हो सकती है। अमेरिका भारत से आने वाली लगभग 40% झींगा मछली खरीदता है। टैक्स बढ़ने से झींगा मछली का स्टॉक जमा हो सकता है, सप्लाई में दिक्कत आ सकती है और किसानों को नुकसान हो सकता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के इस टैरिफ से भारत की GDP में 0.3% से 0.8% तक की कमी आ सकती है। यही वजह है कि सरकार भी इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है। बड़े अधिकारियों की बैठकें हो रही हैं ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके। हालांकि, अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि भारत अमेरिका के खिलाफ कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। एक अधिकारी ने कहा कि "सरकार में इस बारे में लगातार बातचीत चल रही है और उद्योगों के साथ भी बैठकें हो रही हैं।"

एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन और SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र) में बदलाव जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा सकती है। पिछले हफ्ते ET वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते "बहुत महत्वपूर्ण" हैं, लेकिन भारत हमेशा अपने देश के हित को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेता है। उन्होंने कहा कि भारत व्यापार और भू-राजनीति को अलग-अलग रखता है।

निर्यातकों को इस नुकसान से बचाने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय 25,000 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन शुरू करने जा रहा है। इसमें कई चीजें शामिल होंगी, जैसे कि व्यापार के लिए पैसे की व्यवस्था करना, नियमों और मानकों को आसान बनाना, भारतीय ब्रांड को बढ़ावा देना, ई-कॉमर्स हब और वेयरहाउस बनाना, और व्यापार को आसान बनाना।

कौन-कौन से सेक्टर प्रभावित होंगे?

टेक्सटाइल और परिधान – निर्यात का 30% हिस्सा अमेरिका पर निर्भर है। 50% टैरिफ से प्रतिस्पर्धा खत्म होने की संभावना है।

रत्न व आभूषण – 10 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगी। हजारों नौकरियां खतरे में आ जाएंगी।

झींगा– 48% बिक्री अमेरिका में होती है। 50 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद इसके दाम बढ़ जाएंगे।

होम टेक्सटाइल और कालीन – होम टेक्सटाइल का 60% और कालीन का 50% निर्यात अमेरिका को जाता है। इनकी भी बिक्री घटने का अंदेशा है।

फर्नीचर, चमड़ा, हैंडीक्राफ्ट्स- उच्च टैरिफ से अमेरिकी बाजार से बाहर होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
कौन से उत्पाद बचेंगे?

भारत से अमेरिका जाने वाले करीब 30% निर्यात टैरिफ से मुक्त रहेंगे। जैसे कि फार्मास्यूटिकल्स (12.7 अरब डॉलर), इलेक्ट्रॉनिक्स (10.6 अरब डॉलर) इनमं स्मार्टफोन और चिप्स आदि आते हैं। रिफाइंड पेट्रोलियम का व्यापार करीब 4.1 अरब डॉलर है। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका में नहीं बनाए गए तो भविष्य में उन पर भी 200% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
नौकरियों पर असर

GTRI का अनुमान है कि प्रभावित सेक्टरों से अमेरिका को निर्यात 70% तक घटकर 18.6 अरब पर आ सकता है। इससे लाखों निम्न और अर्ध कुशल श्रमिकों की नौकरियां खतरे में हैं। टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वैलरी उद्योग ने कोविड काल जैसी राहत (कैश सपोर्ट, लोन मोरेटोरियम) मांगी है।

भारत की जगह अब वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को अमेरिकी बाजार से फायदा होगा, क्योंकि उनके उत्पादों पर कम शुल्क लग रहा है।

अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन समेत कई विशेषज्ञों का मानना है कि ये टैरिफ अमेरिका में मुद्रास्फीति को और बढ़ाएंगे, जिससे पहले से माहौल और बिगड़ेगा।

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