कानूनी मोर्चे पर ट्रंप कमजोर: सामने आया नया मामला, बढ़ी चुनौती

वॉशिंगटन

 अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। फेडरल कोर्ट ने उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के लिए जारी फंड को तुरंत रोकना चाहता था। यह फैसला उस समय आया है जब ट्रंप सरकार कई विश्वविद्यालयों पर यह आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है कि वे नस्लीय भेदभाव और यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

सैन फ्रांसिस्को की जिला अदालत की जज रीटा लिन ने साफ कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय को न तो फंड में कटौती कर सकता है और न ही उस पर कोई त्वरित जुर्माना लागू कर सकता है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उन यूनियनों और संगठनों की याचिका पर भी सहमति जताई है, जो छात्रों, कर्मचारियों और फैकल्टी के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन विरोधी आवाज़ों को दबाने के इरादे से कार्रवाई कर रहा है, जो अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है।

क्या था ट्रंप प्रशासन का दावा?
ट्रंप ने कई प्रतिष्ठित कॉलेजों को “उदारवादी और यहूदी-विरोधी विचारधारा से प्रभावित” बताते हुए दर्जनों विश्वविद्यालयों की जांच शुरू करवाई थी। उनका कहना है कि विविधता और समावेशन के नाम पर श्वेत और एशियाई छात्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो नागरिक अधिकार कानून के खिलाफ है।

1.2 अरब डॉलर का जुर्माना और फंड पर रोक
ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय पर 1.2 अरब डॉलर का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया था और रिसर्च फंड पर रोक लगा दी थी। यही नहीं, कोलंबिया सहित कुछ निजी विश्वविद्यालयों के फेडरल फंड भी इसी तरह की कार्रवाई के तहत रोक दिए गए।

यूसी अध्यक्ष जेम्स बी. मिलिकेन ने इस जुर्माने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इतना बड़ा दंड संस्था की बुनियाद को हिला देगा और उसके संचालन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। कोर्ट का यह फैसला फिलहाल विश्वविद्यालयों को बड़ी राहत देता है और ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिसके तहत वह विश्वविद्यालयों पर राजनीतिक और वैचारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

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