मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया

भोपाल

नागरिकों को अधिसूचित सेवाएँ प्रदाय करने की कानूनी गारंटी देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश में 25 सितम्बर 2010 से लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम प्रभावशील है। वर्तमान में अधिनियम अंतर्गत 748 सेवाएँ अधिसूचित की जा चूंकि है। इन सेवाओं में लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों के लिए 342 सेवाएँ ऑनलाईन प्रदाय की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया हैं। नागरिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए समाधान एक दिन तत्काल सेवा, सीएम हेल्पलाईन 181 कॉल सेन्टर, महिला हेल्पलाईन, सीएम जन सेवा, दिव्यांग हेल्पलाईन आदि का क्रियान्वयन जनोन्मुखी प्रशासन के गवाही देते है।

मध्यप्रदेश सरकार ने नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने और सेवा प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए सुशासन की दिशा में समय-समय पर अनेक कदम उठाएँ है। मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम 2010 के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पृथक से लोक सेवा प्रबंधन विभाग का गठन किया गया। वर्ष 2013 में राज्य लोक सेवा अभिकरण की स्थापना की गई। राज्य लोक सेवा अभिकरण में लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के साथ-साथ लोक सेवा केन्द्रों की स्थाना और संचालन का सीएम हेल्पलाईन कॉल सेंटर का संचालन और सीएम डेशबोर्ड का संचालन भी शामिल है।

लोकसेवा केन्द्रों के माध्यम से नगारिकों को एक समयावधि में सेवाएँ प्रदाय करने के लिए सभी तहसीलों में 439 लोकसेवा केन्द्रों की स्थापना की गई है, जिनके माध्यम से विभिन्न विभागों की अधिसूचित सेवाएँ नागरिकों को प्रदाय की जा रही हो। अधिनियम के अंतर्गत विभाग की अधिसूचित सेवा "जाति प्रमाण पत्र प्रदाय" अभियान के तहत लोकसेवा केन्द्रों द्वारा प्रदेश भर के स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने का अभियान सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस अभियान में अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख डिजिटल हस्ताक्षरित रंगीन प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा चुके है। प्रदेश में लोकसेवा गारंटी अंतर्गत अधिसूचित समस्त सेवाओं में 10 करोड़ 62 लाख आवेदनों का अब तक निराकरण किया जा चुका है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 अंतर्गत सेवाओं की प्रदाय की गारंटी हैं। प्रत्येक सेवा को प्रदाय करने की एक समयावधि भी तय की गई है। इसमें समय पर सेवा नहीं देने पर जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। अधिकारी वर्ग प्रतिदिन 250 रूपये से लेकर अधिकतम 5000 हजार रूपये तक की जुर्माना राशि जमा करने का प्रावधान है।

समाधान एक दिन तत्काल प्रदाय सेवा

नागरिकों को केवल एक दिन की समयावधि में सेवा उपलब्ध कराने की मंशा से मध्यप्रदेश शासन ने फरवरी 2018 में "समाधान एक दिन तत्काल सेवा" व्यवस्था शुरू की। इस व्यवस्था में आवेदक द्वारा दोपहर पूर्व तक दिए गए आवेदन का निराकरण दोपहर पश्चात कर दिया जाता है। इस सेवा में डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र व्हाटसअप, ई-मेल के माध्यम से भी आवेदकों को भेजे जा रहे है, जिससे आवेदक अपनी सुविधा अनुसार प्रमाण-पत्र समाधान एक दिन तत्काल सेवा व्यवस्था में अब तक दो करोड़ 63 लाख से अधिक आवेदन निराकृत किए गए है। समाधान एक दिन में दी जाने वाली 32 सेवाओं में आय प्रमाण-पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, ट्रेड लाइसेंस, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को डुप्लीकेट पात्रता पर्ची जारी चालू खसरा, बी-1 खतौनी चालू नक्शा, खसरा की प्रतिलिपि (खाते के समस्त), अभिलेखागार प्रतिलिपि, राजस्व प्रकरण में आदेश की प्रतिलिपि, भू-अधिकार पुस्तिका का प्रथम बार प्रदाय, जिला स्तरीय रिकॉर्ड रूम से पारित आदेश/अंतरिम आदेश आदि की सत्यप्रतिलिपि इत्यादि कई सुविधाएँ प्रदान की जाती है।

संयुक्त राष्ट्र संघ से मिली सराहना

मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम अपनी तरह का पहला विशेष अधिनियम है जो निर्धारित समय-सीमा में नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं के प्रदान की गारंटी देता है। इसे वर्ष 2012 में अधिनियम को यूएनपीएसए पुरूस्कार प्राप्त हुआ। "लोक सेवाओं के वितरण में सुधार वर्ग में इस अधिनियम को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2012 को लोक सेवा पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ है।

 

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