होलिका दहन का शुभ मुहूर्त तय: 2 या 3 मार्च किस दिन जलेगी होलिका और कब उड़ेंगे रंग

जयपुर

होली को लेकर लोगों में उत्साह चरम पर है। बाजारों में रंग-बिरंगे गुलाल सज चुके हैं, दफ्तरों में छुट्टियों की गिनती शुरू हो गई है और युवाओं में होली पार्टियों का उत्साह साफ नजर आ रहा है। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार होली कब मनाई जाएगी। होलिका दहन और दुलंडी की तारीखों को लेकर अलग-अलग मत सामने आने से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

इस भ्रम को दूर करते हुए ज्योतिषाचार्य शास्त्री भवानी शंकर शर्मा ने शास्त्रीय आधार स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि होलिका दहन के लिए शास्त्रों में प्रदोष काल में व्यापिनी पूर्णिमा तिथि का होना अनिवार्य माना गया है। उनके अनुसार सोमवार, 2 मार्च को चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। चूंकि 2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए शास्त्रों के अनुसार उसी दिन होलिका दहन करना उचित होगा।

उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात भद्रा का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों में भद्रा की ‘पूंछ’ में होलिका दहन को शुभ माना गया है। यह शुभ मुहूर्त रात 1 बजकर 25 मिनट से 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में विधि-विधान से होलिका दहन करने को शास्त्रसम्मत बताया गया है।

शास्त्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि 3 मार्च को होलिका दहन नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि नहीं रहेगी। साथ ही 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से शाम 6 बजकर 45 मिनट तक चंद्रग्रहण भी रहेगा, जिसके कारण उस दिन होलिका दहन अशुभ माना गया है। इसलिए शास्त्रसम्मत निर्णय यही है कि होलिका दहन 2 मार्च की रात किया जाए और दुलंडी यानी रंगों की होली 3 मार्च, मंगलवार को मनाई जाए।

विधि-विधान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास की प्रतिपदा को होलिका का डंडा रोपित किया जाता है और पूर्णिमा के दिन विधिवत दहन किया जाता है। अष्टमी से पूर्णिमा तक के आठ दिन ‘होला अष्टक’ कहलाते हैं, जिन्हें शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कई स्थानों पर होलिका दहन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जहां विधि-विधान और प्रह्लाद की परंपरा की अनदेखी की जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि होलिका दहन केवल लकड़ी जलाने का कर्मकांड नहीं, बल्कि बुराई के त्याग और अच्छाई के संकल्प का प्रतीक पर्व है। अतः सभी को शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार ही इस पर्व को मनाना चाहिए।

admin

Related Posts

ईरान-इजराइल टकराव का प्रभाव: जयपुर से उड़ान भरने वाले यात्रियों को झटका, खाड़ी रूट बाधित

जयपुर ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में लगाई गई अस्थायी बंदिशों का असर अब जयपुर से संचालित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी दिखने लगा है।…

सर्दी को विदाई, राजस्थान में समय से पहले गर्मी की एंट्री; मार्च में हीटवेव से बढ़ेगी परेशानी

जयपुर राजस्थान में समय से पहले गर्मी ने दस्तक दे दी है और लोगों को अभी से तीखी धूप का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

महामुकाबले की शुरुआत: टॉस भारत के नाम, कैरेबियाई टीम को मिला बैटिंग न्योता

  • By admin
  • March 1, 2026
  • 0 views
महामुकाबले की शुरुआत: टॉस भारत के नाम, कैरेबियाई टीम को मिला बैटिंग न्योता

दुख को ताकत बनाया: पिता को मुखाग्नि देकर क्रिकेट की जिम्मेदारी निभाने लौटे रिंकू सिंह

  • By admin
  • March 1, 2026
  • 1 views
दुख को ताकत बनाया: पिता को मुखाग्नि देकर क्रिकेट की जिम्मेदारी निभाने लौटे रिंकू सिंह

एयरस्ट्राइक के बाद पीवी सिंधू के कोच का पहला रिएक्शन, बोले- ‘सुरक्षित हैं, मगर डर अभी भी कायम’

  • By admin
  • March 1, 2026
  • 1 views
एयरस्ट्राइक के बाद पीवी सिंधू के कोच का पहला रिएक्शन, बोले- ‘सुरक्षित हैं, मगर डर अभी भी कायम’

भारत की गेंदबाजी फेल, हीली के बाद मूनी ने मचाई तबाही, 409 रन से बने कई नकारात्मक रिकॉर्ड

  • By admin
  • March 1, 2026
  • 2 views
भारत की गेंदबाजी फेल, हीली के बाद मूनी ने मचाई तबाही, 409 रन से बने कई नकारात्मक रिकॉर्ड

WI के खिलाफ सिर्फ एक जीत, इतिहास ने बढ़ाई सूर्या-गंभीर की मुश्किलें

  • By admin
  • March 1, 2026
  • 2 views
WI के खिलाफ सिर्फ एक जीत, इतिहास ने बढ़ाई सूर्या-गंभीर की मुश्किलें

टॉस जीतते ही जिम्बाब्वे का अटैक मोड ऑन, साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले बल्लेबाजी

  • By admin
  • March 1, 2026
  • 2 views
टॉस जीतते ही जिम्बाब्वे का अटैक मोड ऑन, साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले बल्लेबाजी