मंत्री शाह की ऑनलाइन माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई, सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को निष्ठाहीन बताते हुए किया खारिज

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह को इंडियन आर्मी की अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि वह कोर्ट के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि मंत्री का आचरण अदालत को उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह पैदा कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में साेमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शाह के मामले में सुनवाई की।

कोर्ट ने शाह द्वारा सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को निष्ठाहीन बताते हुए खारिज कर दिया। यह देखते हुए कि अपने माफीनामे वाले वीडियो में शाह ने जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात स्वीकार नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा– वह आत्मचिंतन करें कि अपनी सजा कैसे चुकाएं। आपकी वह सार्वजनिक माफी कहां है? हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।

 रिपोर्ट के मुताबिक, शाह की तरफ से पेश हुए वकील के परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और यह ऑनलाइन मौजूद है और इसे अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा, ‘इस तरह की माफी से आपका क्या मतलब है? यह आदमी हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है। यह बयान उसने पहली तारीख को दिया था। यह रिकॉर्ड में कहां है? यह (ऑनलाइन माफी) उसके इरादों को दर्शाता है, इससे हमें उसकी ईमानदारी पर और शक होता है।’

एसआईटी के सदस्य से सवाल किया

जब उन्होंने बताया कि एसआईटी ने शाह का बयान दर्ज कर लिया है, तो जस्टिस कांत ने कोर्ट में मौजूद एसआईटी के एक सदस्य से सवाल किया कि पीड़ित या आहत लोगों के बयान दर्ज करने के बजाय शाह का बयान दर्ज करने का क्या महत्व है। जस्टिस ने कहा , ‘उसका बयान दर्ज करना इतना जरूरी क्यों है? जो लोग पीड़ित हुए हैं, उनके बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे।’ इसके बाद, पीठ ने एसआईटी सदस्य से जांच पूरी करने में लगने वाले समय के बारे में पूछा।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक स्थगित की

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मंत्री द्वारा दिए गए बयानों की जांच के लिए गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम को 13 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच टीम ने 87 लोगों से पूछताछ की है। वह इस समय उनके बयानों की जांच कर रही है। बेंच ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा शाह के इस्तीफे की मांग वाली याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि रिट याचिका में पिछले मामलों के बारे में लगाए गए कुछ आरोपों की तीन सदस्यीय एसआईटी द्वारा जांच की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

कांग्रेस नेत्री जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई से इनकार इस मामले में मंत्री विजय शाह को पद से हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस की नेता जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। याचिका 23 जुलाई दाखिल की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस याचिका में जो तथ्य विजय शाह को लेकर दिए गए हैं, एसआईटी उन बिंदुओं पर भी जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट में देगी।

मंत्री विजय शाह ने आखिर कहा क्या था…?

मंत्री विजय शाह ने 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था, 'उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।'

शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा, कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।'

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑपरेशन और अन्य जानकारियां दे रहे थे।

इस बयान पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए शाह के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे तो सुप्रीम कोर्ट ने भी 19 मई को सुनवाई करते हुए शाह को फटकार लगाई थी। साथ ही SIT को जांच के निर्देश दिए थे।

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