गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक, रोजाना सैकड़ों लोग बन रहे शिकार

गाजियाबाद

लावारिस कुत्तों के चलते लोगों में दहशत है। गलियों और पार्कों में ये लोगों को काट रहे हैं। जनपद के 80 इलाकों में सबसे अधिक लावारिस कुत्ते हैं। सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने इन इलाकों के लोग सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं।

जिले में कॉलोनी और सोसाइटी में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। घरों से बाहर निकलते ही कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। शहरी क्षेत्र के लोग इससे निजात दिलाने की निगम अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में रोजाना 400 मरीज कुत्ते काटने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार जनपद में 80 इलाके ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा कुत्ते काटने के मामले हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र के कैला भट्टा, नंदग्राम, लाल कुआं, बम्हेटा, अकबरपुर-बहरामपुर, गोविन्दपुरम, लोहियानगर, पंचवटी, भाटिया मोड़, जटवाड़ा, साहिबाबाद, अर्थला, शालीमार गार्डन, पसौंड़ा आदि क्षेत्र हैं। इसके अलावा मोदीनगर, लोनी, मुरादनगर, डासना आदि जगह पर भी कुत्ते काटने के मामले बढ़ रहे हैं।

रोजाना 400 मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे : स्वास्थ्य केंद्रों में 90 प्रतिशत मरीज कुत्ते काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं। इस वजह से एआरवी की सबसे ज्यादा खपत कुत्ते काटने के मामलों में ही हो रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 350 से 400 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से बहुत कम मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कुत्ते के काटने से जख्म हो जाता है। यानि कुत्ते काटने से मांस फट जाता है और उससे खून निकलने लगता है। ऐसे मरीज को एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ सीरम लगाया जाता है। यह सुविधा अभी केवल एमएमजी अस्पताल में है।

अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन प्रियादर्शी के मुताबिक रोजाना तीन से चार मरीजों को सीरम लगाया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो मई महीने में 11008, जून में 11213 और जुलाई में 11213 मरीजों को एआरवी लगाई गई। इस साल जुलाई तक 66923 मरीजों को रेबीज का कवच दिया गया।
केवल शहरी क्षेत्र में टीकाकरण और नसबंदी हो रही

नगर निगम के दो एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। इसमें एक दिन में लगभग 30 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। नसबंदी के बाद कुत्तों को तीन दिन सेंटर में रखना होता है। इसके बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने का नियम है, जहां से उन्हें पकड़ा जाता है। नगर पालिका और नगर पंचायत में लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण नहीं हो रहा।

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