किसानों के लिए PM मोदी का मजबूत रुख, ट्रंप की चुप्पी में छुपी असमंजस की कहानी

नई दिल्ली

डराने-धमकाने और धौंस दिखाने वाले दबंग से निपटने के लिए उससे उलझने के बजाय उसके खेल से अलग रहना चाहिए, फिर चाहे वह टकराव के लिए उकसा ही क्यों न रहा हो. इसके बजाय अपने लोगों को यह भरोसा दें कि आप उनके साथ खड़े हैं और दोस्‍तों का साथ दें. उन तक अपनी बात पहुंचाएं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के लिए ठीक यही रणनीति अपनाते दिख रहे हैं.

 डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इसके बाद मोदी ने उन्हें फोन करने के बजाय गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत की. चर्चा इस बात पर हुई कि कैसे अमेरिका ने दोनों देशों पर सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं और इन हालात में उन्हें एकजुट होकर कदम उठाना चाहिए. गुरुवार सुबह एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि वे भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे, भले इसके लिए उन्हें भारी कीमत क्यों न चुकानी पड़े. यह ट्रंप की दबाव वाली रणनीति के जवाब में उनका साफ संदेश था.

ट्रंप का दबाव, भारत की ड‍िप्‍लोमेसी

रूस के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों से नाराज ट्रंप ने बुधवार को अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगा दिया. इसके बावजूद पीएम मोदी के करीबी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उसी दिन रूस पहुंचे. गुरुवार को मॉस्को में डोभाल ने एलान किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तारीख लगभग तय हो चुकी हैं. इस महीने के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस जाएंगे. 1 सितंबर को मोदी बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है.

दबाव में झुकने को तैयार नहीं…

ये घटनाक्रम डोनाल्‍ड ट्रंप को और भड़का सकते हैं. गुरुवार रात राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक रूसी तेल खरीद का मसला हल नहीं हो जाता. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ऐसे दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, खासकर तब जब अमेरिका भारत से कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में असीमित पहुंच की मांग कर रहा है. इन मांगों को ठुकराकर मोदी किसानों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे उनके असली मसीहा हैं. साल 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने वे कानून वापस ले लिए थे. साथ ही उनकी सरकार पीएम-किसान निधि योजना के तहत हर साल किसानों को 6,000 रुपये की सहायता और फसल बीमा भी देती है. अब अमेरिका के खिलाफ किसानों के हित में खड़े होकर प्रधानमंत्री उनसे अपना जुड़ाव और मजबूत कर रहे हैं.

फोन पर बात…दो टूक जवाब

पिछले 100 दिनों में मोदी और ट्रंप की फोन पर केवल दो बार बात हुई है. एक बार 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद और दूसरी बार जून में जब ट्रंप ने कनाडा में मौजूद मोदी को फोन किया. उस समय मोदी ने साफ तौर पर ट्रंप के इस झूठे दावे को खारिज कर दिया था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया. संसद में भी मोदी ने कहा था कि किसी भी विश्व नेता ने भारत को ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए राजी नहीं किया. फिलहाल पीएम मोदी संयम बरतते हुए अपने मित्र देशों को अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. भारत ने अमेरिकी कदमों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अनुचित, अनुचित और अव्यवहारिक बताया है, जो दशकों में वॉशिंगटन के खिलाफ भारत की सबसे कड़ी भाषा है.

ट्रंप अचानक ले सकते हैं यू-टर्न

भारत जानता है कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं और अचानक यू-टर्न ले सकते हैं, इसलिए इंतजार करना सबसे बेहतर कूटनीतिक विकल्प है. अगर जल्द ही ट्रंप-पुतिन की मुलाकात होती है और रूस-यूक्रेन युद्ध सुलझ जाता है, तो ट्रंप का भारत विरोध भी खत्म हो सकता है. आखिरकार रूस से तेल खरीदने के लिए पहले अमेरिका ने ही भारत को प्रोत्साहित किया था और खुद भी रूस से यूरेनियम जैसी चीजें आयात करता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तभी होगा जब वह राष्ट्रीय हित में होगा और भारतीय किसानों से कोई समझौता नहीं होगा. तब तक मोदी अपने काम में लगे रहेंगे और अपने तरीके से संदेश देते रहेंगे. जैसे कि गुरुवार को संसद में तमिलनाडु के किसानों के एक दल से मुलाकात.

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