फिजिक्स पेपर विवाद: छात्रों ने उठाए सवाल, CBSE के खिलाफ PIL से बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली
देशभर में बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिसने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षक प्रशांत किराड ने सीबीएसई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। आरोप है कि परीक्षा के अलग अलग प्रश्नपत्रों की कठिनाई का स्तर समान नहीं रखा गया, जिससे छात्रों के साथ न्याय नहीं हुआ और उनके अंक उनकी मेहनत से ज्यादा किस्मत पर निर्भर हो गए।

शिक्षक का कहना है कि कुछ विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत आसान प्रश्नपत्र मिले, जबकि अन्य को ऐसे प्रश्न हल करने पड़े जिनका स्तर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसा बताया जा रहा है। इससे छात्रों में असमानता की भावना पैदा हुई है और पूरे परीक्षा तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्षों से बोर्ड अलग अलग प्रश्नपत्र तैयार करता रहा है ताकि नकल जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके। लेकिन इस बार प्रश्नपत्रों के बीच कठिनाई का अंतर असामान्य रूप से ज्यादा बताया जा रहा है। आरोप है कि कुछ प्रश्नपत्र सीधे और पाठ्यपुस्तक आधारित थे, जबकि अन्य में अवधारणात्मक और गहराई वाले प्रश्न अधिक थे, जिनके लिए अतिरिक्त तैयारी की जरूरत पड़ी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि बोर्ड इस विषय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और यह बताए कि प्रश्नपत्रों के स्तर को संतुलित रखने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई थी।

कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरे वर्ष नियमित पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा कक्ष में उन्हें अपेक्षा से कहीं कठिन प्रश्न मिले। दूसरी ओर, कुछ छात्रों को सरल प्रश्न मिलने की बातें सामने आईं। इस स्थिति ने छात्रों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समान परीक्षा में भी सभी को समान अवसर मिला। अभिभावकों का भी कहना है कि यदि एक ही विषय की परीक्षा में कठिनाई का स्तर अलग अलग रहा, तो परिणाम वास्तविक योग्यता को नहीं दर्शा पाएंगे। इससे आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ सकता है।

ग्रेस मार्क और नरम मूल्यांकन की मांग
विवाद बढ़ने के साथ ही शिक्षक ने मांग की है कि कठिन प्रश्नपत्र हल करने वाले विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क दिए जाएं या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अधिक उदारता से की जाए। कुछ लोग पुनर्परीक्षा की मांग भी उठा रहे हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

परीक्षा ढांचे में हाल के बदलाव भी बने चर्चा का कारण
हाल के वर्षों में वरिष्ठ कक्षाओं की परीक्षाओं में रटने के बजाय समझ और प्रयोग पर आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गई है। अब प्रश्नों का बड़ा हिस्सा ऐसा होता है जिसमें विद्यार्थियों को अवधारणाओं को वास्तविक जीवन की स्थितियों में लागू करना पड़ता है। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों में तर्क शक्ति, विश्लेषण क्षमता और विषय की गहरी समझ विकसित करना बताया गया है।

हालांकि कई शिक्षकों का कहना है कि बदलाव सही दिशा में है, लेकिन प्रश्नपत्र तैयार करते समय संतुलन बनाए रखना उतना ही जरूरी है, ताकि सभी छात्रों के लिए परीक्षा का अनुभव समान रहे।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी एक अन्य कक्षा की परीक्षा को लेकर इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं। उस समय भी कुछ प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान बताए गए थे, जबकि अन्य को ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना गया। उस घटना ने भी छात्रों के बीच बहस छेड़ दी थी, लेकिन इस बार मामला न्यायालय तक पहुंच गया है, जिससे इसकी गंभीरता बढ़ गई है।

सामाजिक माध्यमों पर छात्रों की आवाज
सामाजिक माध्यमों पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कई छात्र लिख रहे हैं कि परीक्षा के बाद जब उन्होंने अन्य साथियों से प्रश्नों की तुलना की, तो उन्हें कठिनाई के स्तर में स्पष्ट अंतर महसूस हुआ। कुछ छात्रों ने इसे मानसिक दबाव बढ़ाने वाला बताया, क्योंकि परीक्षा के बाद भी उन्हें अपने प्रदर्शन का सही अंदाजा नहीं लग पाया।

आगे क्या हो सकता है
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शिक्षा बोर्ड इस मामले में क्या जवाब देता है और क्या किसी तरह का सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा। यदि जांच में कठिनाई स्तर का अंतर साबित होता है, तो मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव, अनुग्रह अंक या अन्य उपायों पर विचार किया जा सकता है।

admin

Related Posts

बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव के बीच युवाओं का गुस्सा फूटा, सड़कों पर उतरे Gen Z

ईरान ईरान में हुए बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को क्रूर दमन के बाद कुचल दिया गया था, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई। अब 40वें दिन (चेहलम) पर…

देश में नक्सलवाद का सफाया तय, जल्द खत्म होगी चुनौती: शाहनवाज हुसैन

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद के खात्‍मे संबंधी बयान का समर्थन करते हुए भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि देश में नक्सलवाद अब अपने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

सोमवार से गुलमर्ग बनेगा स्पोर्ट्स हब, छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों का शुभारंभ

  • By admin
  • February 22, 2026
  • 0 views
सोमवार से गुलमर्ग बनेगा स्पोर्ट्स हब, छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों का शुभारंभ

ICC Player of the Month: किसके सिर सजेगा ताज? भारत के स्टार सहित तीन दिग्गजों में कड़ी टक्कर

  • By admin
  • February 22, 2026
  • 0 views
ICC Player of the Month: किसके सिर सजेगा ताज? भारत के स्टार सहित तीन दिग्गजों में कड़ी टक्कर

ट्रेड डील पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, बैठक की तारीख पर अटकी निगाहें

  • By admin
  • February 22, 2026
  • 1 views
ट्रेड डील पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, बैठक की तारीख पर अटकी निगाहें

शोएब अख्तर ने कहा सब कुछ, जानिए क्यों भारत ने पाकिस्तान को हराया

  • By admin
  • February 22, 2026
  • 1 views
शोएब अख्तर ने कहा सब कुछ, जानिए क्यों भारत ने पाकिस्तान को हराया

सुपर 8 मुकाबले में इंग्लैंड का दबदबा, 51 रन से जीता मैच

  • By admin
  • February 22, 2026
  • 1 views
सुपर 8 मुकाबले में इंग्लैंड का दबदबा, 51 रन से जीता मैच

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका: टॉस के बाद कप्तानों का प्लान साफ, देखें किसे मिला मौका और कौन बाहर

  • By admin
  • February 22, 2026
  • 2 views
भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका: टॉस के बाद कप्तानों का प्लान साफ, देखें किसे मिला मौका और कौन बाहर