इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के अंतर्गत विभागीय समन्वय हेतु संयुक्त जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

अलीराजपुर

 दिनांक 13 मई 2025 को पुलिस नियंत्रण कक्ष, जिला अलीराजपुर में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (Inter-Operable Criminal Justice System – ICJS) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विभागीय समन्वय सुदृढ़ करने हेतु एक संयुक्त जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में माननीय न्यायालय, पुलिस विभाग, जिला लोक अभियोजन कार्यालय, जेल प्रशासन तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न आपराधिक प्रकरणों के निपटान हेतु डिजिटल प्रणाली को सशक्त बनाना, विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करना एवं ICJS के पांच प्रमुख स्तंभों–पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल एवं फॉरेंसिक प्रयोगशाला के मध्य सूचना के निर्बाध आदान-प्रदान की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं त्रुटिरहित बनाना था।
संयुक्त वर्कशॉप मे सर्वप्रथम पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर श्री राजेश व्यास द्वारा संयुक्‍त वर्कशॉप में उपस्थित हुये माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलीराजपुर श्री अनीष कुमार मिश्रा, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री राजेन्द्र सेवतिया एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री ज्योत्सना आर्य का स्वागत किया। इसके पश्चात श्री व्यास द्वारा सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रणाली के अंतर्गत "इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS)  पोर्टल से संबंधित एक प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया। इस प्रेजेंटेशन में निम्नलिखित सात मुख्य बिंदुओं पर विशेष जानकारी दी गई, जो निम्‍नानुसार है-
Police to Court (e-Signed Chargesheet):चार्जशीट को डिजिटल रूप से तैयार कर न्यायालय को ई-साइन के माध्यम से भेजा जाना, जिससे समयबद्धता, प्रामाणिकता और कागज रहित प्रक्रिया सुनिश्चित हो। इसमें वर्तमान में तकनीकी सहयोग एवं प्रशिक्षण की निरंतर आवश्यकता है।

एफएसएल रिपोर्ट की इलेक्ट्रॉनिक उपलब्धता:FSL रिपोर्ट अब CCTNS पर SHO एवं SP स्तर तक उपलब्ध होनें पर प्रकरण मे त्‍वरित कार्यवाही हो सकती है।  

MedLeaPR (MLC रिपोर्ट का डिजिटल एकीकरण):CCTNS पोर्टल से MLC हेतु अनुरोध भेजे जा रहे हैं, किन्तु समस्त MLC रिपोर्ट अभी भी डिजिटल माध्यम से नहीं मिल पा रही हैं। यदि चिकित्सा संस्थानों के द्वारा MLC रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से भेजी जायेगी तो इससे भी प्रकरण में त्‍वरित निराकरण सुनिश्चित होगा।

अभियोजन विभाग – E-Prosecution Portal:मसौदा चार्जशीट एवं विधिक राय अब ई-पोर्टल के माध्यम से भेजनें हेतु पुलिस विभाग के द्वारा अधिक से अधिक विवेचकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे भविष्‍य मे फिजिकल दस्तावेजों की निर्भरता कम की जा सके।

Online Summon/Warrant (e-Court Integration):e-Court एवं CCTNS के माध्यम से समन/वारंट भेजनें व प्राप्‍त होनें पर समय/मानव संसाधन की बचत होगी, इस हेतु पुलिस विभाग के अधि/कर्म0 को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

E-Sakshya App (डिजिटल साक्ष्य एकत्रीकरण):यह ऐप जांच अधिकारियों को घटनास्थल से फोटो/वीडियो प्रमाण एकत्र कर डिजिटल रूप से सुरक्षित करने में सहायक है। इसके उपयोग में तकनीकी जानकारी, उपकरणों की कमी जैसी चुनौतियाँ सामने आई हैं परंतु इसमें भी अधिक से अधिक अनुसंधान अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाकर कार्य किया जा रहा है।

BAMS (जमानत पचिका मॉड्यूल) एवं उच्च न्यायालय से एकीकरण:उच्च न्यायालय द्वारा केस डायरी की मांग CCTNS माध्यम से की जाती है, एवं उत्तर भी डिजिटल रूप से भेजे जानें के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाकर दस्‍तावेजों को ऑनलाईन भेजनें हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। संयुक्त वर्कशॉप के समापन के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनीष कुमार मिश्रा द्वारा संबोधन में कहा गया कि पुलिस अनुसंधान की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक, तकनीकी और त्रुटिरहित बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को अनुसंधान की बारीकियों से अवगत कराया और सुझाव दिया कि समयबद्ध एवं तकनीकी-आधारित अनुसंधान से प्रकरणों में शीघ्र न्याय संभव है। साथही अनुसंधान के दौरान महिलाओं/बच्‍चीयों पर होनें वाले अपराधों में पीडिता की उम्र का निर्धारण निहित दस्‍तावेजों के आधार पर किये जानें हेतु पुलिस अधिकारियों को बताया। इस संयुक्त वर्कशॉप में पुलिस विभाग के समस्त राजपत्रित अधिकारीगण, थाना प्रभारी, जिला अभियोजन अधिकारी, जेल विभाग, एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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