आंगनबाड़ी में पोषण आहार वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने नई व्यवस्था लागू

रायपुर

छत्‍तीसगढ़ सरकार ने महतारियों और बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाले पोषण आहार को पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। टेक होम राशन (टीएचआर) के लिए फेस वेरिफिकेशन और ओटीपी व्यवस्था एक जनवरी से लागू हो जाएगी। जो महिलाएं केंद्रों तक पोषण आहार लेने आएंगी, उनका फेस रीडर बायोमेट्रिक सिस्टम से सत्यापन किया जाएगा। यानी महिलाओं को चेहरा पढ़ने के बाद ही उन्हें आहार दिया जाएगा। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वास्तविक लाभार्थी के पास ही खाद्य चीजों की डिलीवरी हुई है। दूसरा गर्भवती महिलाएं अगर केंद्र तक नहीं आ पाएंगी तो उनकी जगह उनका पोषण आहार लेने आने वाले अन्य स्वजन के माध्यम से मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर भी सत्यापन किया जा सकेगा।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैक एप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी ट्रैकिंग व्यवस्था चल रही है। उसमें ये दो व्यवस्थाएं और लागू हो जाएंगी। इस प्रक्रिया में लाभार्थियों का पंजीकरण करते समय उनके फोटो खींचने, आधार डेटाबेस से उनके प्रमाणीकरण या ई-केवाईसी और राशन वितरण के दौरान खींचे गए फोटो से मिलान करने का काम शामिल है।

इसके अलावा लाभार्थियों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक विशिष्ट ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे कार्यकर्ता को दिखाना होगा, ताकि राशन डिलीवरी प्रक्रिया पूरी हो सके। प्रदेश में 52 हजार 400 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं काम कर रहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य सरकार ने स्मार्ट फोन भी दे रखा है। फेस वैरिफिकेशन के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

क्या है टेक होम राशन?
पोषण आहार को टेक होम राशन (टीएचआर) कहा जाता है। आंगनबाडी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए सूखा राशन वितरित किया जाता है। यह सूखा राशन चयनित किशोरियों को भी उपलब्ध होता है। इसे टेक होम राशन कहते हैं।

इसलिए व्यवस्था होगी लागू
कई बार शिकायतें मिलती हैं कि पोषण आहार लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता है और इसमें हेराफेरी की जाती है। पोषण आहार देने का मकसद कुपोषण की समस्या को दूर करना है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था से कुछ हद तक सुधार होगा। साल 2019 में छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण 23.37 प्रतिशत था, जो 2021 में घटकर 19.86 प्रतिशत रह गया और 2022 में घटकर 17.76 प्रतिशत पर आ गया।

वर्तमान में करीब 16 प्रतिशत है। इस तरह, पिछले तीन सालों में कुपोषण की दर में 5.61 प्रतिशत की कमी आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, किसी भी प्रदेश में एक साल के भीतर अगर कुपोषण की दर में दो प्रतिशत या इससे ज़्यादा गिरावट आती है, तो यह संतोषजनक स्थिति मानी जाती है।

देश के 10 राज्यों में पहले से ही व्यवस्था
वर्तमान में ये व्यवस्था देश के 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में पायलट परियोजना के रूप में लागू है और इसे दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 तक पूरे देश में लागू करने की योजना है। अभी चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडू, गुजरात, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र में फेस वेरिफिकेशन और ओटीपी व्यवस्था दोनों ही लागू हो चुकी है।

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