ज्यादातर पश्चिमी देशों में बुर्का पर प्रतिबंध लगाया, अब कजाकिस्तान ने किया बैन

कजाकिस्तान

कजाकिस्तान की सरकार ने बुर्का और हिजाब पहनने पर बैन लगा दिया है. महिलाएं और लड़कियां सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले ऐसे कपड़े अब नहीं पहन सकेंगी. कजाकिस्तान सरकार के इस फैसले से लोग आश्चर्य में पड़ सकते हैं, क्योंकि यह एक मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाला देश है. हालांकि, कजाकिस्तान ही नहीं, कई दूसरे मुस्लिम देश भी बुर्का पर प्रतिबंध लगा चुके हैं. आइए जान लेते हैं कि बुर्का की परंपरा किस मुस्लिम देश से शुरू हुई और कहां इसको लेकर विवाद है? कहां-कहां इसे बैन किया जा चुका है?

मिडिल ईस्ट के देश कजाकिस्तान में बुर्का और हिजाब पहनने पर राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोकायेव ने पाबंदी लगाई है. कजाकिस्तान में करीब 70 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है. इसके बावजूद वहां बुर्का बैन किया गया है. इस देश में मुस्लिमों के बाद सबसे ज्यादा संख्या ईसाइयों की है. वहां 25 फीसदी ईसाई, चार फीसदी बौद्ध, यहूदी, बहाई और हिन्दू धर्म के लोग रहते हैं. कजाकिस्तान के एक से दो फीसदी नागरिक ऐसे हैं, जो खुद को नास्तिक मानते हैं.

अरबी का शब्द है बुर्का

बुर्का एक अरबी शब्द है, जिसका इस्तेमाल सातवीं शताब्दी से होता आया है. वास्तव में बुर्का शब्द का इस्तेमाल जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए पूरी तरह से ढंकने वाले एक कवर या महिलाओं के शॉल के लिए किया जाता था. माना जाता है कि पहली बार बुर्का पर्शिया (ईरान) में पहना गया था. इस क्षेत्र में इस्लाम के प्रचार-प्रसार के साथ ही फारसी संस्कृति भी इस्लामी संस्कृति में समाहित हो गई. जानकार बताते हैं कि इस्लामिक धार्मिक पुस्तकों में बुर्का शब्द के स्थान पर हिजाब का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब है पर्दा या पर्दे की क्रिया. समय के साथ फारस के मुसलमानों ने बुर्का को इस्लामी संस्कृति के रूप में अपना लिया.

बुर्का किसी भी व्यक्ति को सिर से पैरों तक ढक लेता है. इसमें हाथों और देखने के लिए ही खुली जगह छोड़ी जाती है. आमतौर पर इसे हल्के कपड़ों से बनाया जाता है और काला या फिर नीला होता है. घर में परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में बुर्का पहनने की जरूरत नहीं होती है. हालांकि, बुर्का ढीला-ढाला ही होता है. यह टाइट फिटिंग का नहीं हो सकता.

अरब में भी शुरू में नहीं थी पर्दा प्रथा

बुर्का को लेकर अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर विवाद होता रहता है. ज्यादातर पश्चिमी देशों में इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है. भारत में भी कई बार शिक्षा संस्थानों और अन्य स्थलों पर बुर्का पर प्रतिबंध लगाने को लेकर विवाद हो चुका है.

मीडिया रिपोर्ट्स में जाने-माने इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब के हवाले से कहा गया है कि इस्लाम में पर्दे का चलन तो था पर इससे पहले यूनानी सभ्यता में भी पर्दादारी का ऐतिहासिक प्रमाण मिला है. इरफान हबीब की मानें तो शुरू में अरब में महिलाओं को स्वतंत्रता थी और वहां की सभ्यता में पर्दा था ही नहीं. पर्दा प्रथा वास्तव में पैगंबर मोहम्मद साहब के समय में शुरू हुई.

कई मुस्लिम देश लगा चुके हैं प्रतिबंध

बुर्का पर प्रतिबंध लगाने वाला कजाकिस्तान कोई पहला मुस्लिम देश नहीं है. दुनिया के कई मुस्लिम देशों में बुर्का और हिजाब आदि पर पाबंदी है. इन देशों में अल्जीरिया, तुनिशिया तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान और चाड जैसे मुस्लिम देशों के नाम शामिल हैं. तो इसके अलावा यूरोप के बहुत से देशों में बुर्का और हिजाब को लेकर विवाद होता रहा है. इसके बाद कई देशों में सख्त कानून तक बनाकर इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है.

यूरोप में सबसे पहले फ्रांस ने लगाया प्रतिबंध

यूरोप का पहला देश फ्रांस था, जिसने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने को पूरी तरह से बैन किया था. सबसे पहले साल 2004 में फ्रांस के सरकारी स्कूलों में छात्रों के किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीक पर रोक लगाई गई थी. फिर अप्रैल 2011 में फ्रांस की सरकार ने पूरे चेहरे को ढकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लगा दिया था. फ्रांस में इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर 150 यूरो का जुर्माना है. वहीं, अगर कोई अन्य व्यक्ति किसी महिला को चेहरा ढंकने के लिए मजबूर करता है, तो उस पर 30,000 यूरो का जुर्माना लगाया जाता है.

वहीं, स्विटजरलैंड मार्च 2021 में सार्वजनिक स्थालों पर सिर पर दुपट्टा पहनने पर प्रतिबंध लगा चुका है. इस प्रतिबंध में मुस्लिम महिलाओं का बुर्का और नकाब’ भी शामिल है. इसके लिए वहां के संविधान में बाकायदा संशोधन किया जा चुका है. वहीं, कनाडा के एक राज्य क्यूबेक में अधिकारिक पदों पर बैठे सरकारी कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीक पहनने पर प्रतिबंध है.

इन देशों में विवाद के बावजूद बैन

साल 2011 में बेल्जियम ने सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का अथवा नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया था. इसको लेकर मामला कोर्ट तक पहुंचा पर साल 2017 में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने बेल्जियम के प्रतिबंध को सही ठहराया. अब बेल्जियम में इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना अथवा सात दिनों की जेल हो सकती है. वहीं, डेनमार्क में अगस्त 2018 में बुर्का पर पहली बार प्रतिबंध लगाया गया था. इसके बाद विवाद शुरू हो गया और सैकड़ों लोगों ने कोपेनहेगन में मार्च और प्रदर्शन किया था. हालांकि, डेनमार्क का कानून इस प्रतिबंध को तोड़ने पर जुर्माना तक लगाता है.

श्रीलंका में 29 अप्रैल 2021 को नया कानून लागू कर सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार के घूंघट पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है. साल 2017 में जर्मनी और ऑस्ट्रिया की संसद भी कानून बनाकर ऐसे कपड़ों पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं. हालांकि, जर्मनी में यह प्रतिबंध केवल न्यायाधीशों, सिविल सेवकों और सैनिकों के लिए है. वहीं, साल 2017 में ही चीन भी बुर्का और घूंघट के साथ ही लंबी दाढ़ी पर भी प्रतिबंध लगा चुका है.

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