मोदी सरकार ने वायुसेना को अपग्रेड करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया

नई दिल्ली

Su-30MKI Super-30 Project: पिछले 20-25 साल में डिफेंस सेक्‍टर में आमूलचूल बदलाव आए हैं. टेक्‍नोलॉजी में डेवलपमेंट के चलते कन्‍वेंशनल वॉरफेयर का महत्‍व धीरे-धीरे म हुआ है. मॉडर्न एज में एयरफोर्स और नेवी का रोल काफी अहम हो चुका है. इसके साथ ही ड्रोन पर भी काफी ध्‍यान दिया जा रहा है. रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान के बीच हुए युद्ध में इसका नजारा देखने को मिला है. कहीं भी आर्मी का व्‍यापक पैमाने पर इस्‍तेमाल नहीं किया गया. एयरफोर्स की भूमिका काफी अहम रही. एरियल स्‍ट्राइक से दुश्‍मनों को काफी नुकसान पहुंचाया गया. पहलगाम अटैक के बाद भारत की ओर से लॉन्‍च ऑपरेशन सिंदूर में भी आर्मी का सीमित इस्‍तेमाल हुआ. एयरफोर्स के साथ ही मिसाइल ऑपरेशंस की ही मुख्‍य भूमिका रही. ड्रोन भी एक अहम फैक्‍टर के तौर पर उभरा है. मॉडर्न वॉरफेयर में अब ड्रोन को नजरअंदाज करना संभव नहीं है. बदलते माहौल में हर देश के लिए जरूरी हो गया है कि वे अपने आर्म्‍ड फोर्सेज को अल्‍ट्रा मॉडर्न तकनीक से लैस करे.

जो देश इस दिशा में इन्‍वेस्‍टमेंट करने में कतरा रहे हैं, वे लगातार पिछड़ते जा रहे हैं. रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान की जंग ने हर देश को अपने डिफेंस सिस्‍टम को ज्‍यादा से ज्‍यादा मजबूत करने पर मजबूर कर दिया है. आधुनिक हथियार खरीदने की होड़ सी लग गई है. बदले माहौल में भारत भी पीछे नहीं रह सकता है. भारत लगातार अपने आर्म्‍ड फोर्सेज को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है. आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को मॉडर्न वेपन से लैस करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. फाइटर जेट से लेकर आर्टिलरी गन, एयर डिफेंस सिस्‍टम, मिसाइल सिस्‍टम, एयरक्राफ्ट कैरियर, वॉरशिप आदि पर हजारों करोड़ का निवेश किया जा रहा है. फाइटर जेट को अपग्रेड करने पर भारत का मुख्‍य फोकस है.

भारत में लगातार एयरफोर्स के फाइटर जेट स्‍क्‍वाड्रन को बढ़ाने की बात कही जा रही है. मौजूदा समय में 41 से 42 स्‍क्‍वाड्रन फाइटर जेट की जरूरत है, पर मौजूद महज 31 से 32 स्‍क्‍वाड्रन ही है. ऐसे में इंडियन एयरफोर्स के पास तकरीबन 10 स्‍क्‍वाड्रन फाइटर जेट की कमी है. वायुसेना के साथ ही डिफेंस एक्‍सपर्ट्स की ओर से भी लगातार इसपर गंभीर चिंताएं जताई जाती रही हैं. भारत सरकार और डिफेंस मिनिस्‍ट्री भी इसको लेकर गंभीर हुआ है. खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब इसमें किसी तरह की कोताही बरतने की गुंजाइश न के बराबर बची है. स्‍वदेशी फाइटर जेट के साथ ही पांचवीं पीढ़ी के उन्‍नत लड़ाकू विमान खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने मल्‍टीरोल तेजस फाइटर जेट के उत्‍पादन को रफ्तार दी है. इस साल के अंत से इसकी डिलिवरी शुरू होने की उम्‍मीद जताई जा रही है.

दरअसल, सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी यूनीक है. एक तरफ पाकिस्‍तान है जो आतंकवाद को स्‍टेट पॉलिसी की तरह इस्‍तेमाल करता आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ चीन है जो अपनी विस्‍तारवादी नीतियों को लगातार हवा दे रहा है. साथ ही सीमाई इलाकों में फौज के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को लगातार बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत के लिए आर्म्‍ड फोर्सेज को सशक्‍त बनाना अनिवार्य हो गया है. भारत ने इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. इंडियन एयरफोर्स फ्लीट की रीढ़ Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड के लिए मास्‍टरप्‍लान तैयार किया गया है. इसे सुपर-30 का नाम दिया गया है. रूस के सहयोग से Su-30MKI को अपग्रेड करने का प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है.

सुपर-30 प्रोजेक्‍ट

Su-30MKI 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट है. भारत ने इसे रूस से आयात किया है. समय के अनुसार इसमें अब बदलाव की जरूरत महसूस की जाने लगी है, ताकि इसे आज के जमाने के अनुरूप बनाया जा सके. शुरुआत में 84 Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड करने की प्‍लानिंग है, जिसमें 3 से 4 साल तक का वक्‍त लग सकता है. इसे सुपर-30 प्रोग्राम का नाम दिया गया है. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्‍ट पर 2.4 से 7.8 बिलियन डॉलर (66829 करोड़ रुपये) का खर्च आने की संभावना है. अपग्रेडेशन के बाद Su-30MKI फाइटर जेट साल 2055 तक सेवा देने के योग्‍य हो जाएगा. इस अवधि में भारत का देसी फाइटर जेट प्रोजेक्‍ट भी अपने मुकाम तक पहुंच जाएगा और देश पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान अपने घर में ही बनाने में सक्षम हो जाएगा. बता दें कि डीआरडीओ और एचएएल 5th जेनरेशन का फाइटर जेट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है. इसके लिए एडवांस्‍ड मीडियन कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट (Advanced Medium Combat Aircraft – AMCA) प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. अगले दस साल में भारत में पांचवीं पीढ़ी का विमान बनने की संभावना जताई गई है.

Su-30MKI और होगा घातक

Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड कर उसे और घातक और प्रभावी बनाने की प्‍लानिंग है. सुपर-30 प्रोग्राम के तहत Su-30MKI लड़ाकू विमान में गैलियम नाइट्राइड बेस्‍ड एक्टिव इलेक्‍ट्रॉनिकली स्‍कैन्‍ड ऐरे रडार (AESA) को इंटीग्रेट करने की योजना है. इसे विरुपाक्ष रडार के नाम से भी जानते हैं, जिसे डीआरडीओ ने डेवलप किया है. इसके माध्‍यम से 300-400 किलोमीटर दूर स्थित टारगेट को डिटेक्‍ट किया जा सकता है. युद्ध के समय में यह काफी कारगर सिद्ध होगा. इसके अलावा Su-30MKI के कॉकपिट को पुरी तरह से डिजिटल बनाया जाएगा. साथ ही 300 किलोमीटर दूर से ही दुश्‍मनों को तबाह करने वाली देसी एयर-टू-एयर मिसाइल को भी इसमें फिट किया जाएगा. अस्‍त्र MK-2 और अस्‍त्र MK-3 गांडीव जैसी मिसाइलों को Su-30MKI में इंटीग्रेट करने की योजना है.

F-16 जैसे फाइटर जेट की होगी छुट्टी

Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड करने के बाद पाकिस्‍तान की हालत जहां और भी खराब हो जाएगी तो वहीं चीन भी किसी तरह का दुस्‍साहस करने की कोशिश नहीं करेगा. दरअसल, साल 2019 में बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के दौरान Su-30MKI को पाकिस्‍तानी F-16 लड़ाकू विमान से मुकाबला करने में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. Su-30MKI के पायलट को खासतौर पर रडार लिमिटेशन की वजह से संघर्ष करना पड़ा था. ऐसे में Su-30MKI को अपग्रेड करने से एफ-16 जैसे फाइटर जेट की छुट्टी होनी तय है. दूसरी तरफ, भारत नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी व्‍यापक पैमाने पर निवेश कर रहा है.

 

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