महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) 

 इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) 
 
 महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) 

 गोरखपुर
गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं। 

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।  

उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं। 

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है।

असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

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