देहरादून
उत्तराखंड में UCC यानी समान नागरिक संहिता लागू हुए एक साल पूरा हो गया है. 27 जनवरी को राज्य में ‘यूसीसी दिवस’ के रूप में मनाया गया – और, ठीक एक दिन पहले 26 जनवरी को कानून में संशोधन प्रस्ताव लाया गया, जिसे राज्यपाल की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की तरफ से सत्ता में लौटने पर राज्य में यूसीसी लागू करने का वादा किया गया था. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सत्ता में लौटने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. जनसंवाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और विधायी प्रक्रिया के बाद 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक उत्तराखंड विधानसभा से पारित हुआ.
11 मार्च, 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करके 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना.
हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक का एक भी केस नहीं
यूसीसी दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले जब उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया गया था, तब कई लोगों ने मजाक उड़ाया. पुष्कर सिंह धामी ने कहा, विपक्ष ने कहा था कि ये सिर्फ घोषणा भर है, और इसे लागू करना संभव नहीं है… लेकिन, सरकार ने कमेटी गठन से लेकर राष्ट्रपति की स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया 27 जनवरी, 2025 तक पूरी करके UCC लागू भी कर दिया.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक, बीते एक साल में हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक का एक भी मामला सामने नहीं आया है. पुष्कर सिंह धामी कहते हैं, अगर भविष्य में कहीं ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
रिपोर्ट के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां औसतन हर रोज 67 विवाह पंजीकरण होते थे, कानून लागू होने के बाद ये संख्या बढ़कर रोजाना 1400 से भी ज्यादा पहुंच गई है.
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026, राज्यपाल (रिटा.) लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की मंजूरी मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. बीजेपी सरकार ने यूसीसी 2024 में आवश्यक संशोधनों के लिए ये अध्यादेश लाया है – फरवरी-मार्च के बजट सत्र में इसे विधेयक के रूप में सरकार विधानसभा में पास कराएगी. अध्यादेश को 6 महीने के भीतर सदन से पास करना जरूरी होता है.
संशोधन में जो बदलाव हुए हैं
संशोधन के तहत दो बड़े बदलाव सबसे महत्वपूर्ण हैं. एक, विवाह में पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने पर अब कठोर सजा का प्रावधान जोड़ा गया है. और, 2010 से 2025 (26 जनवरी तक) के बीच शादी करने वाले सभी दंपतियों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है.
1. विवाह के वक्त पहचान छुपाने या गलत जानकारी देने को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है, जबकि विवाह और लिव-इन संबंधों में बल प्रयोग, जबरदस्ती, धोखाधड़ी या कोई भी गैरकानूनी तरीका अपनाने पर सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं.
2. नए प्रावधानों में समय सीमा का पालन करने पर भी ज्यादा जोर दिया गया है. समय-सीमा का पालन न करने पर अब सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है.
3. संशोधन में ये भी प्रावधान है कि अगर सब-रजिस्ट्रार निर्धारित समय-सीमा के भीतर एक्शन नहीं लेता, तो मामला अपने आप रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल के पास चला जाएगा. और, रजिस्ट्रार जनरल को विवाह, तलाक, लिव-इन संबंधों और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण रद्द करने की शक्ति दी गई है.
4. अध्यादेश में ये भी तय किया गया है कि रजिस्ट्रार जनरल का पद अब केवल अपर सचिव स्तर के अधिकारी को ही दिया जाएगा.
5. लिव-इन संबंध खत्म होने पर रजिस्ट्रार की तरफ से टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करने का प्रावधान किया गया है – और 'विडो' शब्द की जगह 'स्पाउज' शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा.
यूसीसी के संशोधित स्वरूप को नए आपराधिक कानूनों के हिसाब से भी अपडेट किया गया है. अब आईपीसी और CrPC यानी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के नियमों को जोड़ा गया है.









