ब्रह्मोस से तेज रफ्तार, चीनी मिसाइल DF-12 का बड़ा भाई K-4, पाकिस्तान जैसे दुश्मनों के लिए ‘ब्रह्मास्‍त्र’

नई दिल्ली

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी तकनीक से बनी ‘प्रलय’ टैक्टिकल क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह परीक्षण 31 दिसंबर 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया. खास बात यह रही कि एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलें एक के बाद एक (साल्वो लॉन्च) दागी गईं और दोनों ने तय लक्ष्य को पूरी सटीकता से भेदा. इस ट्रायल में मिसाइल सिस्टम की सटीकता, भरोसेमंदी और युद्धक्षेत्र में उपयोग की क्षमता साबित हुई. परीक्षण के दौरान आधुनिक ट्रैकिंग सेंसरों ने मिसाइलों की उड़ान पर नजर रखी और यह पुष्टि की कि दोनों मिसाइलें तय रास्ते पर ही आगे बढ़ीं. बंगाल की खाड़ी में तैनात विशेष जहाजों से मिले टेलीमेट्री डेटा ने भी लक्ष्य पर सटीक प्रहार की पुष्टि की. ‘प्रलय’ पूरी तरह स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है.

इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है. यह एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, यानी यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तरह ऊंची और तय दिशा में नहीं उड़ती, बल्कि कम ऊंचाई पर रास्ते में दिशा बदल सकती है. इसी वजह से दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणालियों के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है. प्रलय मिसाइल रूस की इस्‍कंदर-एम और चीन की DF-12 से कई मायनों में उन्‍नत और ज्‍यादा ताकतवर है.

प्रलय मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान रास्ते में तेज मोड़ लेने और दिशा बदलने में सक्षम है. इससे यह दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है. इसमें आधुनिक रिंग लेजर जाइरो आधारित नेविगेशन सिस्टम और अंतिम चरण में लक्ष्य भेदने के लिए उन्नत तकनीक लगी है. डीआरडीओ पहले भी 2021 और 2022 में प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण कर चुका है, लेकिन इस बार का साल्वो लॉन्च ट्रायल बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साबित हो गया कि एक ही प्लेटफॉर्म से तेजी से कई मिसाइलें दागी जा सकती हैं. यह आधुनिक युद्ध में बेहद जरूरी क्षमता है. इस सफल यूजर ट्रायल के बाद प्रलय मिसाइल के भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है.

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करती है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रलय मिसाइल के विकास में किसी विदेशी तकनीक पर निर्भरता नहीं है. इससे भारत की सीमाओं पर, खासकर मौजूदा क्षेत्रीय हालात में, सैन्य ताकत और रोकने की क्षमता (डिटरेंस) मजबूत होगी. इस परियोजना में DRDO के साथ निजी कंपनियों की भी अहम भूमिका रही है. मिसाइल का कैनिस्टराइज्ड लॉन्चर लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने बनाया है. इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन और सेना की कई यूनिटों को तेजी से यह सिस्टम देने में मदद मिलेगी.

प्रलय मिसाइल इस्‍कंदर-M मिसाइल (रूस) DF-12 मिसाइल (चीन)
रेंज: 150 से 500 किलोमीटर रेंज: 500 किलोमीटर रेंज: 420 किलोमीटर
रफ्तार: मैक 6.1 (7500 KMPH से ज्‍यादा) रफ्तार: मैक 6 से 7 (8000 KMPH) रफ्तार: हाइपरसोनिक (अनुमानित)
वॉरहेड: अधिकतम 1000 किलोग्राम वॉरहेड: अधिकतम 800 किलोग्राम वॉरहेड: 480 किलोग्राम
प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, टू-स्‍टेज प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, सिंगल स्‍टेज प्रोपल्‍शन: सॉलिड फ्यूल, सिंगल स्‍टेज

प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता क्या है?
प्रलय मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर तक की दूरी तक मार कर सकती है. यह एक ठोस ईंधन से चलने वाली अर्ध-बैलिस्टिक (क्वासी-बैलिस्टिक) मिसाइल है. इसमें अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक (Conventionl) वारहेड लगाए जा सकते हैं, जिन्हें विभिन्न तरह के लक्ष्यों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

प्रलय मिसाइल का परीक्षण कैसे किया गया?
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 31 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे एक ही लॉन्चर से प्रलय मिसाइलों का परीक्षण किया. यह उड़ान परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन ट्रायल के तहत किया गया था. रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों मिसाइलें तय किए गए रास्ते पर चलीं और ट्रैकिंग सेंसरों ने पुष्टि की कि सभी उड़ान लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए.

प्रलय मिसाइल किसने विकसित की है?
प्रलय मिसाइल को रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने विकसित किया है. इसके विकास में डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग किया है. इनमें शामिल हैं – डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी, एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी. इन सभी संस्थानों के संयुक्त प्रयास से प्रलय मिसाइल का विकास किया गया है.

कम लागत, ज्यादा ताकत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO की टीम को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सैन्य तैयारियों को और मजबूत करेगी. आमतौर पर ऐसे सफल परीक्षणों के बाद ही बड़े स्तर पर खरीद और उत्पादन के फैसले लिए जाते हैं. प्रलय मिसाइल प्रोग्राम को किफायती भी माना जा रहा है. स्वदेशी होने के कारण इसकी लागत विदेशी मिसाइल प्रणालियों की तुलना में कम है. इससे रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और भविष्य की तकनीकों पर निवेश बढ़ेगा. नए साल की शुरुआत से ठीक पहले हुआ यह सफल परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों के लिए एक मजबूत संदेश है. प्रलय मिसाइल ने साबित कर दिया है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सकता है, बल्कि आधुनिक और प्रभावी हथियार प्रणालियों के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.

क्या है प्रलय मिसाइल की खासियत?

प्रलय एक ठोस ईंधन से चलने वाली, अत्याधुनिक सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका वजन करीब 5 टन है और यह 1 टन तक का पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है. पूरी क्षमता के साथ यह मिसाइल 350 किलोमीटर तक मार कर सकती है, जबकि आधा पेलोड होने पर इसकी रेंज 500 किलोमीटर तक पहुंच जाती है. इस मिसाइल में आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह बेहद सटीक निशाना साध सकती है. परीक्षण के दौरान मिसाइल ने तय किए गए रास्ते का पूरी तरह पालन किया और अधिकतम तथा न्यूनतम दोनों रेंज पर अपने सभी लक्ष्य हासिल किए. प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज रफ्तार और सटीकता है. इसकी अंतिम गति मैक 6 (7500 KMPH से ज्‍यादा) से अधिक है. इस तरह प्रलय मिसाइल ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के मौजूदा वर्जन से कहीं ज्‍यादा तेज है. ब्रह्मोस फिलहाल 3500 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दुश्‍मन पर प्रहार करने में सक्षम है. इसके हाइपरसोनिक वर्जन को डेवलप करने पर काम चल रहा है. यह हवा में रास्ता बदलने की क्षमता रखती है, जिससे दुश्मन की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली इसे रोक नहीं पाती. इसकी सटीकता इतनी अधिक है कि इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 10 मीटर से भी कम है, जिसे आगे चलकर 4 मीटर से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है.

 

 

 

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