Delhi EV Policy 2.0: 2030 तक रोड टैक्स फ्री, कार पर 1 लाख की छूट! दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी के प्रमुख लाभ

 नई दिल्ली

Delhi EV Policy 2.0 Explained: दिल्ली की हवा में अब सिर्फ ठंडक नहीं, एक बेचैनी भी घुली है. सुबह का आसमान कई बार धुंध नहीं, धुएं की चादर ओढ़े मिलता है. सड़क पर भागती पुरानी गाड़ियां सिर्फ एक रास्ता नहीं तय कर रहीं, शहर की सांसें भी भारी कर रही हैं. ऐसे में सरकार ने नया दांव चला है. नाम है EV Policy 2.0. सीधी सब्सिडी की जगह अब फोकस है पुरानी, धुआं छोड़ती गाड़ियों को हटाने पर. मतलब साफ है. जो गाड़ी जितनी पुरानी, उस पर उतनी सख्ती. और जो इलेक्ट्रिक अपनाएगा, उसके लिए रास्ता उतना आसान होगा। 

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 2020 की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी की दोबारा समीक्षा कर उसे अपडेट करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि पिछले पांच सालों में टेक्नोलॉजी और नीतियों में बड़े बदलाव हुए हैं, इसलिए अब एक नई और फ्रेश पॉलिसी की जरूरत है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार PM E-DRIVE स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (स्कूटर-बाइक) और थ्री-व्हीलर (ऑटो-ई-रिक्शा) पर मिलने वाली सब्सिडी को 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाने पर विचार कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार इस हफ्ते की शुरुआत में इस मामले की समीक्षा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में की गई है। 

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री (MHI) की ओर से शुरू किया गया यह प्रस्ताव अब फाइनेंस मिनिस्ट्री के पास भेजा गया है. सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई समीक्षा बैठक के बाद इस पर आगे कार्रवाई की गई, जहां फंड के इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक वाहनों के अलग-अलग सेगमेंट में अपनाने की रफ्तार पर चर्चा हुई। 

इसी बीच दिल्ली बजट 2026 में रेखा गुप्ता सरकार ने राज्य के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (EV Policy 2.0) का खाका पेश किया है. जिसमें इन्सेंटिव से लेकर टैक्स छूट तक कुछ नए नियम प्रस्तावित हैं. तो आइये जानें क्या है दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी –

क्या है दिल्ली की नई EV Policy

दिल्ली सरकार द्वारा पेश की गई नई EV Policy 2.0 में अब सीधे सब्सिडी देने के बजाय पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर ज्यादा जोर दिया गया है. ताकि राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिल सके. दिल्ली सरकार ने नई पॉलिसी में पुरानी और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को हटाने पर फोकस किया गया है. 2026 के बजट में इसके लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस नई पॉलिसी का मकसद दिल्ली की सड़कों से पुरानी गाड़ियों को हटाकर प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। 

नई पॉलिसी में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सबसे ज्यादा फायदा उन्हीं लोगों को मिलेगा जो अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराएंगे. इसके लिए खरीदार को यह प्रमाण देना होगा कि उसने दिल्ली में रजिस्टर BS-IV या उससे पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को स्क्रैप कराया है. इसके बाद ही उसे ज्यादा इंसेंटिव मिलेगा। 

नई पॉलिसी में कितनी मिलेगी सब्सिडी
सरकार ने वाहनों के हर सेगमेंट के लिहाज से नई सब्सिडी तय की है. पहले साल के लिए सरकार ने इंसेंटिव को आसान बना दिया है. 15 लाख रुपये तक की कीमत वाली प्राइवेट इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी, जो पहले 1 लाख ग्राहकों तक सीमित होगी. इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर अब बैटरी के आधार पर नहीं बल्कि सीधे 10,000 रुपये की छूट मिलेगी. पहले अलग-अलग बैटरी कैपेसिटी के बेस पर सब्सिडी तय की गई है. हालांकि उसमें भी अधिकतम रकम तय थी. वहीं इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (L5M) पर 25,000 रुपये का फायदा मिलेगा। 

सरकार ने इस पॉलिसी में एक नया विकल्प भी शामिल किया है, जिसमें अगर कोई अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल कार को इलेक्ट्रिक में बदलता है, तो उसे 50,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। 

रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस की 100 प्रतिशत छूट मार्च 2030 तक दी जाएगी. लेकिन अब इसमें एक सीमा तय कर दी गई है. 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक गाड़ियां पूरी तरह टैक्स फ्री रहेंगी, जबकि इससे महंगी गाड़ियों पर रेगुलर टैक्स लागू होगा। 

पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस
सरकार ने प्राइवेट व्हीकल्स के अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी इलेक्ट्रिफाइड करने पर जोर दिया है. नई पॉलिसी के अनुसार साल 2026-27 में 6,130 नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी. मार्च 2027 तक कुल 7,500 बसों का टार्गेट रखा गया है, जिसमें 5,800 इलेक्ट्रिक बसें होंगी. वहीं 2029 तक 12,000 इलेक्ट्रिक बसों का बड़ा टार्गेट तय किया गया है। 

सरकार का कहना है कि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तेजी से बढ़ाया जाएगा. दिल्ली में हर व्हीकल डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग पॉइंट लगाना अनिवार्य होगा. सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक 18,000 चार्जिंग स्टेशन तैयार करना है। 

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बैटरी के रिसाइकल (दोबारा इस्तेमाल करने के लिए) भी सिस्टम तैयार किया जा रहा है. इसके लिए दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी निगरानी करेगी. बस डिपो को इलेक्ट्रिक बनाने और अन्य सुविधाओं के लिए 320 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी की गई है. साथ ही DTC डिपो में 50 करोड़ रुपये की लागत से पांच नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। 

यह नई EV नीति एक बड़े ट्रांसपोर्ट प्लान का हिस्सा है. नई नीति में DBT और आधार बेस्ड e-KYC को जोड़ा गया है, जिससे सब्सिडी मिलने में लगने वाला समय 40 दिन से घटकर एक हफ्ते से भी कम हो जाएगा. इससे लोगों को जल्दी फायदा मिलेगा और प्रोसेस भी आसान होगा. इस तरह दिल्ली की EV Policy 2.0 न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देगी, बल्कि प्रदूषण कम करने और शहर को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। 

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