राजस्व में बंपर उछाल, GST कलेक्शन ₹1.96 लाख करोड़ के पार गया

नईदिल्ली 

 केंद्र सरकार ने जुलाई महीने के जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े जारी कर दिए हैं। बीते जुलाई में जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। यह लगातार 7वां महीना है जब जीएसटी कलेक्शन 1.80 लाख करोड़ रुपये से जयादा है। हालांकि, यह वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के औसत 2.1 लाख करोड़ रुपये से कम है। यह ग्रोथ डोमेस्टिक ट्रांजैक्शन के साथ-साथ आयात से अधिक कलेक्शन के कारण हुई, जो स्थिर आर्थिक गतिविधि का संकेत है। हालांकि, डेवलपमेंट की गति पिछले महीनों की तुलना में धीमी रही।
कुल ग्रॉस जीएसटी राजस्व में शामिल

ग्रॉस कलेक्शन में सीजीएसटी ₹35470 करोड़ है। वहीं, एसजीएसटी की बात करें तो 44059 करोड़ रुपये है। इसके अलावा आईजीएसटी ₹1,03,536 करोड़ रहा। इसमें आयात पर एकत्रित ₹51626 करोड़ शामिल है। वहीं, उपकर की बात करें तो ₹12670 करोड़ (आयात पर एकत्रित ₹1086 करोड़ सहित) पर पहुंच गया।
किस राज्य के कलेक्शन में कितना ग्रोथ

जुलाई के दौरान मध्य प्रदेश के टैक्स कलेक्शन में 18% की वृद्धि देखी गई, जो बड़े राज्यों में सबसे आगे रहा। वहीं, बिहार के कलेक्शन में 16% की वृद्धि दर्ज की गई जबकि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्रमशः 14% और 12% की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, मणिपुर, मिजोरम और झारखंड में क्रमशः -36%, -21% और -3% की गिरावट दर्ज की गई। महाराष्ट्र 30,590 करोड़ रुपये से अधिक कलेक्शन के साथ सबसे बड़ा कंट्रीब्यूटर बना रहा।
जून में जीएसटी कलेक्शन

इससे पहले जून में जीएसटी कलेक्शन 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। बता दें कि जीएसटी कलेक्शन मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा था। वहीं, इस साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच गया था।

GST के 8 साल पूरे

पिछले महीने देश में GST लागू हुए 8 साल पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को देश में GST लागू किया गया था। इस दौरान टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रॉस GST कलेक्शन 22.08 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो 5 साल पहले 2020-21 में सिर्फ 11.37 लाख करोड़ था।

यानी, 5 साल में टैक्स वसूली लगभग दोगुनी हो गई है। 2024-25 में हर महीने औसत GST कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपए रहा। ये 5 साल पहले 2020-21 में 95 हजार करोड़ रुपए था।

टैक्सपेयर्स की संख्या भी दोगुनी से ज्यादा बढ़ी

GST लागू होने के वक्त 2017 में रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स की संख्या 65 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.51 करोड़ से ज्यादा हो गई है। इससे सरकार का टैक्स बेस भी मजबूत हुआ है।

सरकार का कहना है कि GST लागू होने के बाद टैक्स कलेक्शन और टैक्स बेस दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इससे देश की फिस्कल पोजिशन मजबूत हुई है और टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और आसान बना है।

इतिहास में सबसे बड़ा टैक्स कलेक्शन अप्रैल 2025 में

सरकार ने अप्रैल 2025 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से 2.37 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। सालाना आधार पर इसमें 12.6% की बढ़ोतरी हुई थी। ये GST कलेक्शन का रिकॉर्ड है।

इससे पहले हाईएस्ट जीएसटी कलेक्शन का रिकॉर्ड अप्रैल 2024 में बना था। तब सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे।

इकोनॉमी की हेल्थ दिखाता है GST कलेक्शन

जीएसटी कलेक्शन इकोनॉमिक हेल्थ का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। हायर कलेक्शन मजबूत उपभोक्ता खर्च, औद्योगिक गतिविधि और प्रभावी कर अनुपालन का संकेत देते हैं।

अप्रैल महीने में बिजनेसेज अक्सर मार्च से वर्ष के अंत के लेन-देन को क्लियर करते हैं, जिससे टैक्स फाइलिंग्स और कलेक्शन्स में वृद्धि होती है। KPMG के नेशनल हेड अभिषेक जैन ने कहा कि अब तक का हाईएस्ट GST कलेक्शन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था को दर्शाता है।

2017 में लागू हुआ था GST

सरकार ने 1 जुलाई 2017 को देशभर में GST लागू किया था। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के 17 करों और 13 उपकरों को हटा दिया गया था। GST के 7 साल पूरे होने पर वित्त मंत्रालय ने पिछले सात वर्षों के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों को लेकर पोस्ट किया।

GST एक इनडायरेक्ट टैक्स है। इसे कई तरह के इनडायरेक्ट टैक्स जैसे VAT, सर्विस टैक्स, परचेज टैक्स, एक्साइज ड्यूटी को रिप्लेस करने के लिए 2017 में लागू किया गया था। GST में 5, 12, 18 और 28% के चार स्लैब हैं।

GST को चार हिस्सों में डिवाइड किया गया है:

    CGST (केंद्रीय जीएसटी): केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है।
    SGST (राज्य जीएसटी): राज्य सरकारों द्वारा एकत्र किया जाता है।
    IGST (एकीकृत जीएसटी): अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात पर लागू, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभाजित।
    उपकर: स्पेसिफिक पर्पज के लिए फंड जुटाने के लिए स्पेसिफिक गुड्स (जैसे, लग्जरी आइटम्स, तंबाकू) पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क।

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