लुप्त हो रहे वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को मिला अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर

लखनऊ
 प्रदेश के जंगलों, पहाड़ों और नदियों के किनारे गूंजने वाली जनजातीय वाद्य यंत्रों की धुनें आज आधुनिक संगीत की चकाचौंध में खोती जा रही हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश का लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान इन धुनों को फिर से जीवंत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के उद्देश्य से संस्थान देश व प्रदेश की जनजातियों के 200 से अधिक लुप्तप्राय वाद्य यंत्रों का संरक्षण कर रहा है। इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संस्थान द्वारा समय-समय पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से न केवल वाद्य यंत्रों को सहेजा जा रहा है, बल्कि उन्हें बजाने वाले जनजातीय कलाकारों को भी मंच मिल रहा है। 

संरक्षित वाद्य यंत्रों में शामिल हैं प्राचीन ढोलक, नगाड़ा, डफ, ढफली, डमरू व थाली

उत्तर प्रदेश के गोंड, थारू, बुक्सा, खरवार, सहरिया, बैगा, अगरिया, चेरो व माहीगीर जैसी जनजातियों के लोकजीवन में संगीत की विशेष भूमिका रही है। मंजीरा, चिमटा, खड़ताल व घुंघरुओं की खनक,  बीन व सारंगी की सुरमयी धुनें इन समुदायों की पहचान रही हैं। डिजिटल दौर में जब ये वाद्य यंत्र धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं, ऐसे समय में संस्थान का यह प्रयास सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की मिसाल बन रहा है। इस क्रम में संस्थान द्वारा जनजातियों के प्राचीन ताल वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, नगाड़ा, डफ, ढफली, डमरू, ढक व थाली का संरक्षण किया जा रहा है। वहीं, सुर वाद्यों में बांसुरी, बीन व सारंगी तथा लय वाद्यों में मंजीरा, चिमटा, घुंघरू व खड़ताल जैसे 200 से अधिक पारंपरिक वाद्य यंत्रों को भी संरक्षित किया जा रहा है।

कला कुंभ व कला गांव में लगाई गई वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी 

प्रदेश के लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान ने इस दिशा में पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के अवसर पर कला कुंभ में इन वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया था, जिसे देश-विदेश से आए कला प्रेमियों और पर्यटकों ने खूब सराहा। इसी तरह यूपी दिवस के अवसर पर कला गांव में भी इन वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित जनजातीय भागीदारी महोत्सव में जब पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज सुनाई दी, तो यह स्पष्ट हो गया कि ये प्रयास केवल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक खोती हुई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं। लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान की यह पहल संदेश देती है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर ही सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा जा सकता है।

admin

Related Posts

शिक्षा नियमों पर संत समाज में असंतोष, नई UGC गाइडलाइंस पर हंगामा

वाराणसी यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई गाइडलाइंस के बाद से ही लगातार आरोप लग रहे हैं कि यह हिंदू समाज और ऊंची जातियों के युवाओं के साथ भेदभाव…

अवैध पार्किंग पर नकेल, प्रदेश में बनाए गए 117 होल्डिंग एरिया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा माह चला रहा है। 1 से 31 जनवरी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

सुपरस्टार वापसी: सूर्यकुमार यादव टॉप-10 में, अभिषेक नंबर 1 की चौंकाने वाली स्थिरता

  • By admin
  • January 28, 2026
  • 2 views
सुपरस्टार वापसी: सूर्यकुमार यादव टॉप-10 में, अभिषेक नंबर 1 की चौंकाने वाली स्थिरता

आधी टीम पवेलियन लौटी, रिंकू सिंह 50 से चूके, अब शिवम दुबे पर टिकी भारत की उम्मीदें

  • By admin
  • January 28, 2026
  • 1 views
आधी टीम पवेलियन लौटी, रिंकू सिंह 50 से चूके, अब शिवम दुबे पर टिकी भारत की उम्मीदें

PCB का विवादित फैसला: टी20 WC में काली पट्टी के साथ उतरेंगे पाकिस्तानी खिलाड़ी

  • By admin
  • January 28, 2026
  • 2 views
PCB का विवादित फैसला: टी20 WC में काली पट्टी के साथ उतरेंगे पाकिस्तानी खिलाड़ी

ढिलाई नहीं चलेगी! द्रविड़ बोले– एक गलती और खत्म हो सकता है वर्ल्ड कप का सफर

  • By admin
  • January 28, 2026
  • 2 views
ढिलाई नहीं चलेगी! द्रविड़ बोले– एक गलती और खत्म हो सकता है वर्ल्ड कप का सफर

ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान भिड़ंत: टी20 वर्ल्ड कप से पहले ताकत की बड़ी परीक्षा

  • By admin
  • January 28, 2026
  • 0 views
ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान भिड़ंत: टी20 वर्ल्ड कप से पहले ताकत की बड़ी परीक्षा

गेल से भी ज्यादा खतरनाक बने अभिषेक शर्मा? मोहम्मद कैफ ने बांधे तारीफों के पुल

  • By admin
  • January 28, 2026
  • 1 views
गेल से भी ज्यादा खतरनाक बने अभिषेक शर्मा? मोहम्मद कैफ ने बांधे तारीफों के पुल