प्रदेश में चार साल बाद अधिकारी-कर्मचारियों की संशोधित तबादला नीति जारी, संशोधित Guidelines जारी

भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन ने नई ट्रांसफर नीति जारी की है। जारी नीति के कर्णिका 9 में संसोधन किया है। नई तबादला नीति के अनुसार, सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों का एक जिले से दूसरे जिले में प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर तबादले किए जा सकेंगे। नई नीति मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने लागू की है। नई नीति के तहत सरकार के मंत्री भी तबादला कर सकेंगे।

जारी नई ट्रांसफर नीति के अनुसार प्रतिबंध अवधि में तथा स्थानांतरण नीति से हटकर सामान्यतः केवल निम्न अपवादिक परिस्थितियों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के शासकीय सेवकों के स्थानांतरण आदेश विभागीय मंत्री से प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत जारी किए जा सकेंगे। गंभीर बीमारी यथा कैंसर, लकवा, हृदयाघात या पक्षाघात इत्यादि से उत्पन्न तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर। ऐसे न्यायालयीन निर्णय के अनुक्रम में, जिसके माध्यम से प्रदत्त आदेश के अनुपालन के अतिरिक्त और कोई विधिक विकल्प शेष न हो। किंतु ऐसी परिस्थिति में स्थानांतरित किये जा रहे स्थान पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लम्बित न हो।

आज जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान या नीति से हटकर केवल अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में ही प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शासकीय सेवकों के तबादले किए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित विभागीय मंत्री से प्रशासकीय अनुमोदन आवश्यक होगा।

तबादलों के लिए निर्धारित नियम

गंभीर बीमारी के आधार पर

    कैंसर, लकवा, हार्ट अटैक या अन्य गंभीर बीमारियों से उत्पन्न तात्कालिक परिस्थितियों में तबादला किया जा सकेगा।

कोर्ट के आदेश के तहत

    ऐसे न्यायालयीन निर्णय, जिनका पालन करना अनिवार्य हो और कोई अन्य विधिक विकल्प न हो, के आधार पर भी तबादला किया जा सकेगा।
    इस स्थिति में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित नहीं होनी चाहिए।

अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत

    यदि किसी शासकीय सेवक पर गंभीर शिकायत, अनियमितता या लापरवाही के आरोप सिद्ध हो चुके हैं और उसके विरुद्ध मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) 1966 के नियम 14 या 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा चुकी है, तो उसका भी तबादला किया जा सकेगा।

भ्रष्टाचार या आपराधिक प्रकरण में संलिप्तता

    यदि लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या पुलिस द्वारा किसी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया हो या अभियोजन की प्रक्रिया शुरू होने के कारण जांच प्रभावित होने की संभावना हो, तो तबादला किया जा सकता है।

प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर

    निलंबन, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति से वापसी या किसी शासकीय सेवक के निधन के कारण रिक्त पदों पर लोकहित में तबादला किया जा सकेगा।
    हालांकि, इस स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जहां से तबादला किया जा रहा है, वहां पद रिक्त न हो और नए स्थान पर आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों की पदस्थापना न की जाए।

परियोजना पूर्ण होने पर

    किसी भी सरकारी परियोजना का कार्य पूरा होने के बाद या संबंधित पद के अन्यत्र स्थानांतरित होने की स्थिति में तबादला किया जा सकेगा।

सीएम कार्यालय के मामलों में भी अनुमोदन आवश्यक

तबादला नीति के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त उच्च प्राथमिकता वाले प्रकरणों में संबंधित विभाग के सचिव को प्रशासकीय अनुमोदन प्राप्त कर आदेश जारी करना होगा।

यदि कोई तबादला प्रकरण विभागीय नीति के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो ऐसे मामलों में विभागीय सचिव को पहले विभागीय मंत्री से अनुमोदन लेना होगा। इसके बाद, अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को दोबारा प्रस्ताव भेजकर अंतिम आदेश प्राप्त किया जा सकेगा।

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