विदिशा जनगणना में नया बदलाव, मोबाइल एप से किया जाएगा डेटा संग्रह, छह माह चलेगा अभियान

विदिशा
 आगामी जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। जिले में भी पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जनगणना कराई जाएगी। इस बार गणनाकर्मियों को भारी-भरकम रजिस्टर लेकर घर-घर नहीं जाना होगा, बल्कि मोबाइल एप के जरिए ही मकानों की गणना और जनसंख्या से जुड़ी समस्त जानकारी दर्ज की जाएगी।

केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत जिले में जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके लिए जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया भी जल्दी ही प्रारंभ की जा रही है।

पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जनगणना का पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच संपन्न होगा, जिसमें मकानों की गणना की जाएगी। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में वास्तविक जनसंख्या गणना होगी। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल एप आधारित यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता भी बढ़ाएगी।

विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनगणना इकाइयों का निर्धारण कर लिया गया है और प्रशासनिक सीमाएं पहले ही फ्रीज की जा चुकी हैं, ताकि गणना के दौरान किसी प्रकार का परिवर्तन न हो।

छह माह घर-घर दस्तक देंगे कर्मचारी

जनगणना के पहले चरण में जिले के प्रत्येक गांव, कस्बे और शहरी वार्ड में मकानों की गणना की जाएगी। इसमें आवासीय और गैर-आवासीय भवनों का विवरण दर्ज किया जाएगा। मकान किस प्रकार का है, उसका उपयोग क्या है, निर्माण सामग्री, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई गैस, इंटरनेट, वाहन जैसी सुविधाओं की जानकारी मोबाइल एप पर दर्ज होगी।

इस चरण का उद्देश्य जिले के भौतिक ढांचे की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है। इस दौरान शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में तैनात सरकारी अमला घर-घर दस्तक देकर जानकारी हासिल करेगा।

जनसंख्या गणना में दर्ज होगी परिवारों की जानकारी

जनगणना का दूसरा चरण अगले साल फरवरी में शुरू होगा। इसमें जिले की वास्तविक जनसंख्या से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास, दिव्यांगता सहित अन्य सामाजिक और आर्थिक बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी।

केंद्र सरकार के निर्देशानुसार इस चरण में जातिगत आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए होगी और पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

जनगणना एप तैयार, रजिस्टर से मुक्ति

इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह डिजिटल होना है। अब तक सरकारी अमला नागरिकों की सारी जानकारी रजिस्टर में दर्ज करते था, लेकिन इस बार प्रत्येक गणनाकर्मी के पास मोबाइल या टैब रहेगा, जिसमें जनगणना एप इंस्टॉल होगा।

उसी एप के माध्यम से जीपीएस लोकेशन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे दोहराव की संभावना कम होगी और रियल टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही किसी भी स्तर पर त्रुटि होने पर तुरंत सुधार की सुविधा भी रहेगी।
प्रशिक्षण और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था

अधिकारियों का कहना है कि जनगणना को त्रुटिरहित बनाने के लिए कर्मचारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में एप संचालन, डेटा सुरक्षा, नागरिकों से संवाद और गोपनीयता के नियमों की जानकारी दी जाएगी।

जिले में चार्ज अधिकारी, सुपरवाइजर और नोडल अधिकारियों के माध्यम से सतत निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। किसी भी शिकायत या समस्या के त्वरित निराकरण के लिए नियंत्रण तंत्र भी तैयार किया जा रहा है।

रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर जेपी शर्मा का कहना है जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि जिले के भविष्य की नींव है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास, पेयजल, रोजगार और सामाजिक योजनाओं की रूपरेखा इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है। इसलिए जनगणना के दौरान कर्मचारियों को वास्तविक जानकारी ही उपलब्ध कराना चाहिए।

    जनगणना की प्रक्रिया जिले में शुरू हो गई है। दो माह बाद एक अप्रैल से मकानों की गणना का कार्य शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया में नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा है। सही और पूरी जानकारी देने से ही जिले के विकास की सटीक तस्वीर सामने आएगी। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य में योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और नीति निर्धारण का काम किया जाएगा।

    – सेवाराम रैकवार, जिला योजना अधिकारी, विदिशा।

 

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