डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- विदेश में व्यापार पाने के लिए अधिकारियों को रिश्वत देने का मुकदमा ना चलाया जाए

वाशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट 1977 को खत्म करने का आदेश दे दिया है। उन्होंने आधी रात यह आदेश जारी किया है। ट्रंप के इस फैसले से भारत के दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी को बड़ी राहत मिलने जा रही है। इसी कानून के तहत उनके खिलाफ जांच की जा रही थी। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आदेश में कहा है कि विदेश में व्यापार पाने के लिए विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने का मुकदमा ना चलाया जाए। ऐसे में गौतम अडानी के खिलाफ केस ही खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप इस कानून को अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी खत्म करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि इस कानून के चलते दुनिया हमारा मजाक बनाती है। यह कानून अमेरिकी कंपनियों को व्यापार में विस्तार करने से रोकता है और उन्हें कमजोर कर देता है। प्रतिस्पर्धा के इस युग में इस तरह के कानून का कोई काम नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल को आदेश देते हुए कहा है कि नए नियमों के तहत अब इस तरह के मामलों पर नजर रखी जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप ने इस आदेश पर रिपोर्टर्स के सामने ही साइन किए। 2024 में जस्टिस डिपार्टमेंट और सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन ने एफसीपीए से संबंधित 26 मामले दर्ज किए थे। इसके तहत 31 कंपनियों पर शिकंजा कसा गया था। अब इन सभी कंपनियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इसमें अडानी ग्रुप भी शामिल है।

अडानी ग्रुप के खिलाफ क्यों हो रही थी जांच
पिछले साल गौतम अडानी समेत 8 लोगों पर अरबों रुपये के फ्रॉड के आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि अडानी की कंपनी ने भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोजेक्ट अवैध तरीके से हासिल कर लिए थे। इसके लिए सरकारी अधिकारियों को बड़ी रिश्वत दी गई। इसको लेकर न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप पत्र में कहा गया था कि अडानी ग्रुप ने सोलर एनर्जी का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए अधिकारियों को 2110 करोड़ की रिश्वत दी। वहीं फँड देने के लिए अमेरिकी निवेशकों से रकम जुटाई गई। इसे अमेरिका के कानून का उल्लंघन माना गया था।

इस आरोप पत्र में एक ऑस्ट्रेलियाई और सात भारतीय थे। इसमें गौतम अडानी के भतीजे सागर अडानी, विनीत एस जैन, रणजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल का नाम था। वहीं अमेरिका के कुछ सांसदों ने भी गौतम अडानी का समर्थन करते हुए जस्टिस डिपार्टमेंट को पत्र लिखा था। उनका कहना था कि जो बाइडेन के प्रशासन में अडानी ग्रुप के खिलाफ जो कार्रवाई की गई है उसकी जांच होनी चाहिए।

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