कांग्रेस की आवाज बने पवन खेड़ा, अब राज्यसभा की राह; राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

 नई दिल्ली

सियासत में संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता, बशर्ते आप सही वक्त पर सही पिच पर बैटिंग कर रहे हों. राजनीति में ये कदम आपके लिए बंद पड़े दरवाजों को खोल देता है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों के लिए अपने 7 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें पवन खेड़ा का नाम शामिल हैं. इस तरह पार्टी उन्हें कर्नाटक से संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेज रही है। 

बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के तेज तर्रार प्रवक्ता पवन खेड़ा फ्रंटफुट पर लगातार मोर्चा खोला रखे थे. बीजेपी के 'एक्शन' पर आक्रामक तरीके से पवन खेडा के 'रिएक्शन' और कांग्रेस का 'पॉलिटिकल कैलकुलेशन' ने क्या राज्यसभा का टिकट कंफर्म करा दिया है? 

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने गुरुवार को अपने सात उम्मीदावरों के नाम का ऐलान किया है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ पवन खेड़ा और मंसूर खान को कर्नाटक से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या के आधार पर पवन खेड़ा का राज्यसभा जाना तय है।  

पवन खेड़ा की तपस्या पूरी हुई?
यह वही पवन खेड़ा हैं, जिन्हें साल 2022 में राजस्थान से राज्यसभा टिकट न मिलने पर मायूसी हाथ लगी थी. तब पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा था. 'शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई.' लेकिन तब और अब के राजनीतिक हालात में जमीन-आसमान का अंतर है. पवन खेडा कल टीवी डिबेट्स का चेहरा थे, वो अब बीजेपी के खिलाफ 'लड़ाई के प्रतीक' बन चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला लिया। 

पिछले कुछ समय में जिस तरह से पवन खेड़ा ने खुद को पार्टी के संकटमोचक और सबसे मुखर चेहरे के रूप में स्थापित किया, उसने कांग्रेस आलाकमान को अपना मुरीद बना लिया. ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व पर यह नैतिक दबाव था कि जो नेता फ्रंटफुट पर रहकर गांधी परिवार और पार्टी के लिए तमाम मुकदमे झेल रहा है, उसे तरजीह दी जाए. इस तरह उनकी 'तपस्या' न सिर्फ पूरी हुई, बल्कि राहुल गांधी की कोर टीम ने उनके नाम पर सबसे पहले मुहर लगाई। 

फ्रंटफुट पर 'लड़ाई लड़ने' का इनाम
कांग्रेस आलाकमान ने अपने प्रवक्ताओं और कार्यकर्ताओं को एक साफ संदेश दिया है कि जो नेता पार्टी के लिए जमीन और कानूनी मोर्चों पर लाठियां या मुकदमे झेलेगा, संगठन उसके साथ खड़ा रहेगा. पवन खेड़ा लगातार बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए एक बयान के बाद जिस तरह असम पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ड्रामाई अंदाज में पवन खेड़ा को फ्लाइट से उतारा था और गिरफ्तार किया, उसने रातों-रात उन्हें कांग्रेस का 'पोस्टर बॉय' बना दिया था। 

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर अघोषित विदेशी संपत्ति और फर्जी पासपोर्ट के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ असम में कई एफआईआर दर्ज हुईं. असम पुलिस ने उनके घर पर दबिश तक दी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जाकर राहत मिली. इस कानूनी लड़ाई में डटे रहने के कारण पार्टी ने उन्हें यह बड़ा इनाम दिया है. इस 'बदले वाली कार्रवाई' ने पवन खेड़ा के लिए राज्यसभा का रास्ता साफ कर दिया है। 

संसद में मुखर 'वक्ता' की जरूरत
पवन खेड़ा कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन हैं. वे टीवी डिबेट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद तार्किक और तीखे हमलों के लिए जाने जाते हैं. कांग्रेस को राज्यसभा में एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश के साथ मिलकर सदन के भीतर मोदी सरकार को पुरजोर तरीके से घेर सके.  इसीलिए कांग्रेस ने पवन खेड़ा को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। 

राहुल और खड़गे के 'गुड बुक्स' में
 पवन खेड़ा को गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों का बेहद करीबी और वफादार माना जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय से राजनीति के केंद्र में रहे पवन खेड़ा ने मुश्किल वक्त में भी कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा.  दिल्ली में शीला दीक्षित के सीएम रहते हुए पवन खेड़ा उनके निजि सचिव के तौर पर काम कर रहे थे, उसके बाद से कांग्रेस के राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह इस मामले को हाथों-हाथ लिया, उससे साफ है कि खेड़ा अब गांधी परिवार के गुड बुक्स में टॉप पर हैं।

कर्नाटक से उनके साथ खुद मल्लिकार्जुन खड़गे भी राज्यसभा जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि उन्हें सबसे सुरक्षित सीट से संसद भेजने का फैसला शीर्ष नेतृत्व की मर्जी से हुआ है. साल 2022 के राज्यसभा चुनावों के दौरान जब कांग्रेस ने बाहरी या अन्य नेताओं (जैसे इमरान प्रतापगढ़ी, प्रमोद तिवारी) को तरजीह दी थी, तब पवन खेड़ा के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी कई आवाजें उठी थीं. इस बार खेड़ा को टिकट देकर आलाकमान ने उस पुराने असंतोष और 'तपस्या' वाले नैरेटिव को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। 

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