इबोला वायरस को लेकर हाई अलर्ट, एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की कड़ी जांच शुरू

नई दिल्ली

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए देश के सभी बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एंट्री पॉइंट्स पर सख्त हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पिछले हफ्ते इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है। एडवाइजरी के अनुसार, अत्यधिक जोखिम वाले देशों से आने या वहां से होकर गुजरने करने वाले यात्रियों की सघन निगरानी की जाएगी। उनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देश शामिल हूं।

इन देशों से आने वाले किसी भी यात्री में यदि बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें इमिग्रेशन चेक से पहले एयरपोर्ट के हेल्थ ऑफिसर या हेल्प डेस्क को इसकी सूचना देनी होगी। यदि कोई यात्री इबोला के किसी संदिग्ध या पुष्ट मरीज के खून या शारीरिक तरल पदार्के सीधे संपर्क में आया है, तो उसे भी अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील करते हुए कहा, "यात्रियों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों को ध्यान में रखते हुए कृपया हेल्थ स्क्रीनिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में सहयोग करें।" यह व्यवस्था काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौर की याद दिलाती है।

राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह एडवाइजरी पूरी तरह से एहतियाती तौर पर जारी की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि यह वायरस बेहद तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद ही इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया।

खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्यों को सभी मोर्चों पर तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

एसओपी के मुताबिक, केंद्र ने राज्यों के साथ विस्तृत SOP साझा की है, जिसमें आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया शामिल है। स्वास्थ्य सचिव ने सभी नामित स्वास्थ्य केंद्रों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी रखने और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार से संबंधित एक जूनोटिक संक्रमण है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकता है। सामान्य फ्लू की तरह बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। गंभीर स्थिति में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण होते हैं।

शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी स्पष्ट कारण के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और विशिष्ट लक्षण है।

कैसे फैलता है यह संक्रमण?

संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीना, आंसू, उल्टी, मल और मां के दूध जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से।

वायरस से दूषित कपड़ों, बिस्तरों या सतहों को छूने से।

संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति के शव के सीधे संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैलता है।

SOP की भी की जा रही समीक्षा
सरकार की ओर से उठाए गए प्रमुख कदमों में स्क्रीनिंग, निगरानी, क्वॉरंटीन और केस मैनेजमेंट से जुड़े एसओपी की समीक्षा शामिल है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को इबोला जांच के लिए नामित किया गया है, जबकि चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रयोगशालाओं को भी तैयार किया जा रहा है।

अपील जारी, घबराएं नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें। कहा, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

कैसे फैलता है इबोला वायरस
बता दें कि इबोला वायरस को जानलेवा संक्रमण माना जाता है। इसमें हेमोरेजिक फीवर यानी रक्त स्त्राव के साथ बुखार होता है। इससे पीड़ित मरीज को तेज बुखार आता है और शरीर के इंटर्नल अंगों में खून बहना शुरू हो जाता है और ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें भी होती हैं।

    इबोला वायरस संक्रमित जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़) का मांस खाने से इंसानों में पहुंच सकता है।
    इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, मल-मूत्र या उल्टी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
    बता दें कि इबोला वायरस पानी या हवा के संपर्क में आने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

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