नक्सलवाद पर निर्णायक जीत का दावा, बस्तर ओलम्पिक में अमित शाह की घोषणा बनी चर्चा का केंद्र

रायपुर.

31 मार्च 2026 की यह तारीख नक्सलवाद पर विजयगाथा के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई. बस्तर में शांति की नई शुरुआत के लिए इस दिन को हमेशा याद किया जाएगा. लेकिन इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने से पहले हमें दो साल पीछे लौटना होगा. याद कीजिए वह समय, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे की बात कही थी और 31 मार्च की समयसीमा तय की थी.

उस वक्त यह लक्ष्य कई लोगों को अवास्तविक लगा था. टारगेट भले तय कर लिया गया था, लेकिन इतने कम समय में इसे हासिल करना कठिन ही नहीं, बल्कि लगभग नामुमकिन माना जा रहा था. बस्तर में जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ खुद राजनीतिक दलों के भीतर भी यह विश्वास नहीं बन पा रहा था कि छत्तीसगढ़ की 56 वर्षों पुरानी नक्सल समस्या को इतनी जल्दी समाप्त किया जा सकता है. लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. तय समयसीमा के भीतर नक्सलवाद की समस्या एक “अमिट विजय” में बदल गई है.

तीन सालों में मारे गए 706 नक्सली – अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद में छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त होने की घोषणा करते हुए इसके लिए सीएपीएफ, कोबरा, राज्य पुलिस, डीआरजी के जवान और स्थानीय आदिवासियों को श्रेय जाता है. उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद समाप्त होने जा रहा है, इसमें जनता का भी काफी सहयोग है. इस अभियान में सुरक्षा बलों के जिन जवानों ने अपना बलिदान दिया, उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. गृहमंत्री शाह ने सदन को बताया कि तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए, 4,800 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डालकर सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. देश में अब केवल दो ही जिले नक्सल प्रभावित बचे हैं. पिछले तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए हैं.

अमित- विजय ने खींचा नक्सलवाद के खात्मे का खाका
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर काम करना शुरू कर दिया. सरकार बनने के दो महीने बाद ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ पहुंचे और रणनीति बनाने का काम शुरू हो गया. 24 अगस्त 2024 का वह दिन भी सामने आया जब बस्तर की धरती से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक न केवल प्रदेश से बल्कि देश से नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान कर दिया. यह महज बयान ही नहीं था, बल्कि इसके पीछे पूरी रणनीति थी, जिसके तहत नक्सलवाद को खत्म किया जाना था.

रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कमोबेश छह महीने के अंतराल में अमित शाह छत्तीसगढ़ आते रहे और राज्य सरकार के साथ-साथ सुरक्षा बल और पुलिस के आला अधिकारियों के साथ मिलकर छोटी-छोटी बातों पर चर्चा करते रहे.
बैठकों में शामिल रहे विजय शर्मा ने रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की. योजना को कार्यरूप में बदला जाए, इसके लिए उन्होंने पहले गृह मंत्री के तौर पर बस्तर में धुर नक्सली इलाकों में कदमताल किया. सक्रिय नक्सलियों के परिजनों से मुलाकात कर उनके जरिए मुख्यधारा में लौटने के लिए संदेश दिलवाए.

कैसे फैली नक्सलबाड़ी से लगी आग बस्तर तक
सन् 1967 में जो चिंगारी पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव में जली थी, उसने बस्तर के जंगलों को आग में बदल दिया, इस आग ने हजारों जिंदगियां लीं, अनगिनत घर उजाड़े, और एक पूरे क्षेत्र को बदल कर रख दिया, लेकिन अब जब 31 मार्च 2026 की तारीख है, तो माहौल बदल चुका है.

अंत की शुरुआत सही मायनों में बस्तर ओलम्पिक 2024 के दौरान हुई, जब देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 के तौर पर पहली बार देश से नक्सलवाद के अंत की एक तारीख तय कर दी. इन दो सालों में कुल 3000 नक्सली मुख्यधारा में जुड़ चुके हैं. 2000 नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं. वहीं हथियार छोड़ने से परहेज करने वाले 500 से अधिक नक्सली ढेर कर दिए गए हैं, जिसमें नक्सलियों का महासचिव भी शामिल है. कुल मिलाकर 5000 से अधिक नक्सली कम हो गए.

हालांकि, नक्सल के इतिहास में 1987 से 2026 तक 1416 जवान शहीद हुए हैं, जबकि 1277 आईडी ब्लास्ट हुए, जिसमें 443 जवान शहीद और 915 जवान घायल हुए हैं. इसके अलावा 4580 आईडी बरामद की गई है. 

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