भारत का गेमचेंजर प्‍लान: 6th जेनरेशन वॉरफेयर में F-35 और Su-57 जैसे जेट चक्रव्‍यूह में फंस सकते हैं

बेंगलुरु 

डिफेंस टेक्‍नोलॉजी में लगातार नए बदलाव आ रहे हैं. जो देश खुद को इसके अनुरूप नहीं ढाल पा रहे हैं, उनकी नेशनल सिक्‍योरिटी पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. ईरान और अफगानिस्‍तान पर किए गए हमले इसके ताजा उदाहरण हैं. अमेरिका और इजरायल की तुलना में ईरान की डिफेंस टेक्‍नोलॉजी कमजोर है. यही वजह है कि एयर स्‍ट्राइक में ईरान को व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा है. तेहरान के फर्स्‍ट लाइन टॉप लीडरशिप का तकरीबन खात्‍मा हो चुका है. दूसरी तरफ, ईरानी अटैक में अमेरिका और इजरायल को भी व्‍यापक नुकसान हुआ है. THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के होते हुए भी ईरान ने गहरे जख्‍म दिए हैं. वहीं, अफगानिस्‍तान पर पाकिस्‍तान की ओर से किए गए अटैक में भारी नुकसान हुआ है. बता दें कि काबुल के पास डिफेंसिव और ऑफेंसिव फायर पावर की बेहद कमी है. इन दोनों वॉर सिनेरियो से एक बात साबित होती है- एयर पावर और डिफेंस सिस्‍टम को और मजबूत करने की जरूरत है. भारत इसको बखूबी समझता है. यही वजह है कि 5th और 6th जेनरेशन की टेक्‍नोलॉजी में महारात हासिल करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. भारतीय वैज्ञानिक अब 6th जेनरेशन वॉरफेयर को लेकर नए प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं. प्रोजेक्‍ट के सफल रहने पर पांचवीं पीढ़ी के F-35 और Su-57 जैसे सुपर फाइटर जेट आसमानी चक्रव्‍यूह में उलझ कर रह जाएंगे. साथ ही दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस भी भारत की तरफ झुक जाएगा.

दरअसल, भारत ने छठी पीढ़ी के हवाई युद्ध की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंटीग्रेटेड इंडियन कॉम्बैट एरियल सिस्टम (I²CAS) के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय वायुसेना के भविष्य के कॉम्‍बैट इंफ्रास्‍ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने की दिशा में अहम मानी जा रही है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2040 के दशक के मध्य तक एक अत्याधुनिक, नेटवर्क सेंट्रिक सिस्टम ऑफ सिस्टम्स तैयार करना है, जिसमें मानव चालित लड़ाकू विमान, ऑटोनोमस ड्रोन और एडवांस डिजिटल कॉम्‍बैट नेटवर्क एक साथ काम करेंगे. I²CAS का कॉन्‍सेप्‍ट कन्‍वेंशनल एयर कॉनफ्लिक्‍ट से अलग है, जहां अब सिंगल फाइटर जेट को स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है. इस ढांचे में प्रत्येक विमान एक कमांड नोड के रूप में काम करेगा, जो एक साथ कई ड्रोन, सेंसर और वेपन सिस्‍टम्‍स को कंट्रोल कर सकेगा. यह पहल वैश्विक स्तर पर चल रहे छठी पीढ़ी के कार्यक्रमों जैसे Future Combat Air System (FCAS) और Global Combat Air Programme (GCAP) के समान है. इन कार्यक्रमों में भी AI, ड्रोन और हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क को इंटीग्रेट करने पर जोर दिया जा रहा है.

क्‍या है I²CAS?

I²CAS के केंद्र में एक मानव चालित स्टील्थ फाइटर होगा, जो मदरशिप के रूप में कामय करेगा और कई मानव रहित प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करेगा. भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के इस सिस्टम की रीढ़ बनने की उम्मीद है. इसके उन्नत संस्करण जैसे AMCA Mk2 और संभावित छठी पीढ़ी के मॉडल, युद्धक्षेत्र में कमांड और कंट्रोल हब की भूमिका निभा सकेंगे. इस ढांचे में पायलट की भूमिका भी बदल जाएगी. वह केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैटल मैनेजर के रूप में काम करेगा, जो रियल-टाइम में ड्रोन, सेंसर और स्ट्राइक एसेट्स को ऑपरेट करेगा. I²CAS का एक महत्वपूर्ण स्तंभ लॉयल विंगमैन ड्रोन और मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) होंगे. इस दिशा में भारत पहले ही कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. HAL CATS Warrior, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) का हिस्सा है, जिसे मानव चालित विमानों के साथ उड़ान भरने और सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉर इक्विपमेंट या हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसी तरह DRDO Ghatak UCAV एक स्टील्थ फ्लाइंग-विंग यूसीएवी है, जिसे गहराई में जाकर सटीक हमले करने के लिए विकसित किया जा रहा है. इसकी कम रडार विजिबिलिटी इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करेगी.

कॉम्‍बैट क्‍लाउड क्‍यों है गेमचेंजर?

I²CAS का एक और महत्वपूर्ण पहलू कॉम्बैट क्लाउड है, जो एक सुरक्षित और AI बेस्‍ड डिजिटल नेटवर्क होगा. यह नेटवर्क विमान, ड्रोन, सैटेलाइट और कमांड सेंटर को जोड़कर एक साझा युद्धक्षेत्र सूचना प्रणाली तैयार करेगा. इसके माध्यम से सभी प्लेटफॉर्म रियल टाइम में डेटा साझा कर सकेंगे, जिससे लक्ष्य की पहचान और हमले की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.उदाहरण के तौर पर यदि कोई स्टील्थ ड्रोन दुश्मन के रडार को पहचानता है, तो वह जानकारी कॉम्बैट क्लाउड के जरिए दूर मौजूद फाइटर जेट तक पहुंचा सकता है, जिससे वह बिना खुद को खतरे में डाले हमला कर सके.

क्‍या है फ्यूचर प्‍लान?

भविष्य में I²CAS में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किए जाने की योजना है. इनमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन जैसे एयरबोर्न लेजर सिस्टम शामिल हैं, जिनका उपयोग मिसाइल डिफेंस और ड्रोन इंटरसेप्शन में किया जा सकता है. इसके अलावा ड्रोन स्वार्म तकनीक भी विकसित की जा रही है, जिसमें कई छोटे ड्रोन मिलकर दुश्मन की सुरक्षा प्रणाली को भेद सकते हैं. इसके साथ ही एडैप्टिव इलेक्ट्रॉनिक कैमोफ्लाज तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो विमान की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नेचर को बदलकर उसे रडार से बचाने में सक्षम बनाएगी. यह तकनीक भविष्य के युद्धक्षेत्र में विमान की जीवित रहने की क्षमता को काफी बढ़ा सकती है. हालांकि, भारत इस परियोजना को स्वदेशी रूप से विकसित करने पर जोर दे रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विकल्प भी खुले रखे गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन, सेंसर और नेटवर्किंग तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी से इस कार्यक्रम को गति मिल सकती है. I²CAS भारत की रक्षा रणनीति में एक दीर्घकालिक परिवर्तन का संकेत है, जो देश को भविष्य के नेटवर्क सेंट्रिक और कटिंग एज टेक्‍नोलॉजिकल वॉरगेम के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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