मुख्यमंत्री डॉ. यादव 23 मार्च को इन सफल अभ्यर्थियों से संवाद करेंगे

भोपाल

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में प्रदेश के 61 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने चयनित होकर न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश में नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 मार्च को इन सफल अभ्यर्थियों से संवाद करेंगे।

इन सफलताओं के पीछे केवल प्रतिभा ही नहीं, अपितु कठिन परिश्रम, अटूट संकल्प और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस भी है। कई विद्यार्थी साधारण परिवारों से हैं; किसी के माता-पिता किसान हैं, तो कोई दुकानदार या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के परिवार से आता है। कई अभ्यर्थियों ने शासकीय स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया है।

यूपीएससी परीक्षा के चयन में बेटियां भी नहीं पीछे

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में सफल होने में बेटियां भी पीछे नहीं है। प्रदेश से चयनित 61 अभ्यर्थियों में कई बेटियां भी हैं, जिन्होंने परीक्षा में उत्कृष्ट स्थान हासिल कर सफलता पाई है। इसमें इंदौर की सु अनन्या शर्मा को देशभर में 13वीं रैंक मिली हैं। जबकि खंडवा की सु रूपल जायसवाल को 43वीं रैंक, इंदौर की सु दीक्षा चौरसिया 44वीं, रीवा की सु समीक्षा द्विवेदी को 56वीं रैंक, नरसिंहपुर की सु दीक्षा पाटकर को 88वीं रैंक प्राप्त हुई हैं।

देशभर में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी

 ईशान भटनागर 5वीं रैंक,  पक्षाल सेक्रेटरी 8वीं रैंक, सु अनन्या शर्मा 13वीं रैंक,  चितवन जैन 17वीं रैंक, सु रूपल जायसवाल 43वीं रैंक, सु दीक्षा चौरसिया 44वीं रैंक, सु समीक्षा द्विवेदी को 56वीं,  अनिमेष जैन 63,  विश्वजीत गुप्ता 67वीं रैंक, सु दीक्षा पाटकर 88वीं रैंक शामिल हैं।

दृष्टिहीनता को बनाया ताकत, अक्षत बल्दवा ने हासिल की 173वीं रैंक

इंदौर निवासी  अक्षत बल्दवा ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। जन्म के डेढ़ माह बाद ‘रेटिनोब्लास्टोमा’ के कारण दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। हिंदी माध्यम से शासकीय विद्यालय में पढ़ाई करने वाले  अक्षत ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट उत्तीर्ण कर बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया। विधि की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा का लक्ष्य तय किया और सीमित समय में ही 173वीं रैंक हासिल कर ली। उनका मानना है, "असली दृष्टि आंखों से नहीं, मन से होती है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर, तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती।"

किसान परिवार की बेटी सु प्राची चौहान ने हासिल की 260वीं रैंक

विदिशा जिले के ग्राम जोहद की रहने वाली सु प्राची चौहान ने चौथे प्रयास में 260वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। किसान पिता और गृहिणी मां की बेटी सु प्राची ने अभावों में रहकर भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। गणित में स्नातक करने के बाद उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा। वे कहती हैं, "हर असफलता हमें कुछ नया सिखाती है। धैर्य और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।"

दुकानदार पिता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मां की बेटी सु मोहसिना बानो को 648वीं रैंक

टीकमगढ़ की निवासी सु मोहसिना बानो ने 648वीं रैंक प्राप्त कर यह साबित किया कि सही रणनीति और निरंतरता सफलता की कुंजी है। उनके पिता  मोहम्मद इकराम दुकानदार हैं और मां  शाहजहां बेगम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता। सु मोहसिना का मानना है कि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की गहरी समझ और विश्लेषण ही तैयारी को सही दिशा देता है।
वे अभ्यर्थियों को सलाह देती हैं, "तैयारी को केवल ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उसे रणनीति से जोड़ें और धैर्य बनाए रखें।"

सरकारी कॉलेज से पढ़ाई, तीसरे प्रयास में सु प्राची जैन को मिली सफलता (714वीं रैंक)

नरसिंहपुर की सु प्राची जैन ने तीसरे प्रयास में 714वीं रैंक हासिल की। उन्होंने सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय से वाणिज्य विषय में स्नातक किया। उनके पिता  प्रमोद जैन इलेक्ट्रीशियन और मां  बबीता जैन गृहिणी हैं। सु प्राची कहती हैं कि यह सफलता निरंतर प्रयास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का परिणाम है। उनका संदेश है, "यदि आप अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट और ईमानदार हैं, तो सफलता अवश्य मिलेगी।"

किसान परिवार के  अंकुश पाटीदार ने चार प्रयासों के बाद पाई 780वीं रैंक

मंदसौर जिले के गांव नारिया बुजुर्ग के  अंकुश पाटीदार ने 780वीं रैंक हासिल कर अपने संघर्ष को सफलता में बदला है।किसान परिवार से आने वाले  अंकुश ने शासकीय स्कूल-कॉलेज से पढ़ाई की और चार प्रयासों के बाद यह मुकाम हासिल किया है। इस यात्रा में उनकी बहनों ने उनका मनोबल बढ़ाया। वे कहते हैं, "संघर्ष इस परीक्षा का हिस्सा है, लेकिन यदि संकल्प मजबूत हो तो सफलता निश्चित है।"

 अंकुश ने आगे कहा, "मेरी प्राथमिक शिक्षा गांव से ही शुरू हुई, जिसके बाद शामगढ़ तहसील से उच्चतर माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण कर इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से अपना स्नातक किया।सिविल सेवा की वास्तविक यात्रा इंदौर से ही आरंभ हुई। उन्होंने बताया कि यह पथ सरल नहीं था, मैंने कुल चार प्रयास किए, जिनमें से दो बार मुझे साक्षात्कार तक पहुंचने का अवसर मिला। इस लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा में मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा मेरी बहनें रही हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर मेरा संबल बनकर मुझे आगे बढ़ने का साहस दिया।

चयनित कुल 61 विद्यार्थियों में से 15 ने की शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से पढ़ाई

यूपीएससी परीक्षा में चयनित कुल 61 विद्यार्थियों में से 15 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त कर सफलता अर्जित की है। यह आंकड़ा प्रदेश के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों की प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसमें  आशीष शर्मा, स्नातक जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर,  पुलकित जैन, बीएससी उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल, सु प्राची चौहान, बीएससी, सुभद्रा शर्मा, शासकीय कन्या महाविद्यालय गंजबासौदा, सु सौम्या जैन बीए गांधी पीआर कॉलेज, भोपाल,  आयुष स्वामी, बीए जेएलएन कॉलेज सोहागपुर नर्मदापुरम,  निकित सिंह बीए अर्थशास्त्र अटल बिहारी बाजपेयी महाविद्यालय इंदौर,  दीपक बघेल बीए जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर,  राजवर्धन सिंह सिसोदिया बीए गुजराती समाज कॉलेज, इंदौर, सु प्राची जैन बीकॉम सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल,  रूपल बान बीएससी, एम उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल,  रोहन जैन बीएससी मैथ्स शासकीय होल्कर साइंस कॉलेज इंदौर,  अंकुश पाटीदार बीएससी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर,  गौरव जाट बैचलर ऑफ आर्ट्स देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर,  पवित्र मिश्रा बीएससी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रीवा,  उज्ज्वल जैन बीए मंत माधवराव सिंधिया शासकीय महाविद्यालय कोलारस शामिल हैं।

इन सभी अभ्यर्थियों की कहानियां यह संदेश देती हैं कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और आत्मविश्वास अटूट हो, तो सफलता जरूर मिलती है। मध्यप्रदेश के ये युवा न सिर्फ अपनी उपलब्धि से प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं। 

 

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