जहाँ जंगल बोलते हैं: बारनवापारा अभयारण्य का रोमांचक सफ़र

रायपुर,

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभ्यारण्य साल और सागौन के घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराती है।

बारनवापारा में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंगा, भालू तथा कभी-कभी तेंदुए की झलक भी देखने को मिल जाती है। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां के वातावरण को और जीवंत बनाते हैं। वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी पर्यटकों को जंगल के भीतर सुरक्षित भ्रमण का अवसर देती है। सुबह और शाम का समय वन्यजीवों को देखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह अभयारण्य सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है। रेल यात्रियों के लिए रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक स्टेशन है। रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। निजी वाहन से पहुंचना अधिक सुविधाजनक रहता है।

अभयारण्य में प्रवेश शुल्क और सफारी शुल्क निर्धारित हैं। यहां पार्किंग, गाइड, वॉच टॉवर, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग कराएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। बारनवापारा की यात्रा को और अधिक सुखद बनाने के लिए पर्यटन मंडल द्वारा संचालित मोहदा रिसोर्ट विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह रिसोर्ट प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है और यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे, रेस्टोरेंट, बच्चों के खेलने की जगह तथा हरियाली से घिरा शांत परिसर उपलब्ध है। परिवार और समूह में आने वाले पर्यटकों के लिए यह ठहरने का एक उत्कृष्ट विकल्प है। यहां स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है। जंगल सफारी और मोहदा रिसोर्ट की बुकिंग वनविभाग और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की साइट से की जा सकती है।

बारनवापारा के समीप स्थित तुरतुरिया भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां प्राचीन अवशेष, शांत वन क्षेत्र और जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। तुरतुरिया को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ी मान्यता के कारण धार्मिक और पौराणिक महत्व भी प्राप्त है। यहां पिकनिक और प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है। लोक मान्यता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान यहीं आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ। इस कारण यह स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है। यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहां बहने वाली छोटी जलधाराएं और प्राकृतिक झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए यह आकर्षक स्थान है। तुरतुरिया में प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्राकृतिक गरम जल कुंड भी पाए जाते हैं, जिनके बारे में स्थानीय मान्यता है कि इनका जल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यही “तुर-तुर” ध्वनि से निकले नाम की एक मान्यता भी बताई जाती है।

अभयारण्य से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार और पुरातात्विक अवशेष यहां के प्रमुख आकर्षण हैं, जो इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। बारनवापारा घूमने का सर्वाेत्तम समय अक्टूबर से जून तक माना जाता है। वर्षा ऋतु में हरियाली अपने चरम पर होती है, हालांकि कभी-कभी सफारी सेवाएं सीमित हो सकती हैं। यात्रा के दौरान हल्के रंग के वस्त्र पहनना, दूरबीन और कैमरा साथ रखना तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। बारनवापारा अभयारण्य, सिरपुर और तुरतुरिया मिलकर एक ऐसा पर्यटन परिपथ तैयार करते हैं, जहां प्रकृति, रोमांच, इतिहास और आरामदायक आवास की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। यदि आप सप्ताहांत में सुकून भरी और यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए एक आदर्श गंतव्य सिद्ध हो सकता है।

admin

Related Posts

एसडीएम-तहसीलदार करेंगे मॉनिटरिंग, अवैध रेत उत्खनन रोकने बनेगी ग्राम निगरानी समिति

जांजगीर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने और रेत माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु योजना बनाई है। उन्होंने तस्करों और…

जशपुर के तीन रूट की बसों को दिखाई हरी झंडी, दूरस्थ ग्रामों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू

जशपुर. मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 के तहत तीन रूट के बसों को नगरपालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत द्वारा हरी झण्डी दिखाकर शुभारंभ किया गया। इनमें क्रमशः बिचीटोली से मनोरा, जूनाडीह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

क्या फिर दौड़ेगी F1 कारें? बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर अडानी ग्रुप की नजर

  • By admin
  • February 24, 2026
  • 0 views
क्या फिर दौड़ेगी F1 कारें? बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर अडानी ग्रुप की नजर

107 रन से जीता वेस्टइंडीज, सुपर-8 मुकाबले में जिम्बाब्वे पूरी तरह पस्त

  • By admin
  • February 24, 2026
  • 1 views
107 रन से जीता वेस्टइंडीज, सुपर-8 मुकाबले में जिम्बाब्वे पूरी तरह पस्त

राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में प्रतिदिन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का संकल्प : साक्षी राणा

  • By admin
  • February 23, 2026
  • 2 views
राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में प्रतिदिन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का संकल्प : साक्षी राणा

गुलमर्ग में खेलो इंडिया शीतकालीन खेल का उद्घाटन

  • By admin
  • February 23, 2026
  • 2 views
गुलमर्ग में खेलो इंडिया शीतकालीन खेल का उद्घाटन

विश्व कप के बाद पहले वनडे में भारतीय महिला टीम की नजरें आस्ट्रेलिया को फिर हराने पर

  • By admin
  • February 23, 2026
  • 2 views
विश्व कप के बाद पहले वनडे में भारतीय महिला टीम की नजरें आस्ट्रेलिया को फिर हराने पर

हम अगले मैच में मजबूत वापसी करेंगे: सूर्यकुमार यादव

  • By admin
  • February 23, 2026
  • 2 views
हम अगले मैच में मजबूत वापसी करेंगे: सूर्यकुमार यादव