देश में कहीं भी न बने बाबरी मस्जिद, बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली.

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की प्रभावी सुनवाई न हो, इसके लिए कई कोशिशें की गई थीं.  उन्होंने ये बातें वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजू द्वारा लिखी 'केस फॉर राम- द अनटोल्ड इनसाइडर्स स्टोरी' नामक किताब के मौके पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कही हैं. 

'वकीलों ने किया वॉकआउट'
मेहता ने कहा कि कभी-कभी अप्रत्यक्ष कोशिशें तो कभी-कभी बहुत ज्यादा स्पष्ट प्रयास किए गए, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि मामले की सुनवाई न हो. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया, जिससे उनके मन में बहुत कड़वाहट पैदा हो गई. उन्होंने कहा, 'जब देरी करने के सभी कोशिशें विफल हो गईं तो  तो दो प्रख्यात वकीलों ने कोर्ट से वॉकआउट कर दिया, ये कुछ ऐसा था जो हमने केवल संसद में सुना था.' 
सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई को रोकने के लिए किए गए कथित प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने न्यायिक राजनेता का अद्भुत कौशल दिखाया, जिससे ये मामला सही दिशा में आगे बढ़ा.

'हर मामले में टर्निंग पॉइंट था मामला'
मेहता ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला कई मायनों में एक महत्वपूर्ण मोड़ था और वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोताराजू द्वारा लिखित पुस्तक पूरे घटनाक्रम की पूरी कहानी बताती है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ तथ्यों का संकलन नहीं है. ये इतिहास नहीं, बल्कि घटनाओं की जीवंत कथा है. ये मामला इतिहास से जुड़ा था और इतिहास बनाने वाला था. कानूनी, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक- हर दृष्टि से ये एक टर्निंग पॉइंट था. उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटाराजू द्वारा लिखी गई ये किताब पूरे क्रम को बयान करती है. इस कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्वविद् के के मोहम्मद और वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्ण कुमार ने भी भाग लिया.

दरअसल, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2019 के ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की सर्वसम्मति से अनुमति दी थी. अदालत ने अपने फैसले में पूरे 2.77 एकड़ भूखंड को मंदिर के लिए आवंटित किया गया और मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ अलग प्लॉट दिया गया था.

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