जबलपुर जिले में 1,000 करोड़ का बजट, नई सड़क परियोजनाओं से शहर में होगी विकास की बारिश

जबलपुर 

 देश शासन के बजट में जबलपुर को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई सौगाते मिली हैं। सड़कों का निर्माण होगा। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में 34 सड़कों का निर्माण यातायात को सुगम सुगम बनाने का काम करेगा। जिले में पर्यटन की बेहतर संभावनाएं लंबे समय से हैं। कोई बड़ा पैकेज तो नहीं दिया लेकिन भेड़ाघाट में दूसरे रोपवे का प्रावधान कहीं न कहीं पर्यटकों को आकर्षित करेगा। उद्यानिकी क्षेत्र में जबलपुर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सब्जियों के साथ ही औषधियों की खेती में किसान रुचि ले रहे हैं। ऐसे में उद्यानिकी विद्यालय की स्थापना इस क्षेत्र के लिए मददगार बनेगा।

उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों को बड़ी ग्रांट मिलेगी। सरकार दूध के उत्पादन पर फोकस कर रही है। इसके लिए जिले में सहकारी समितियो की संख्या बढ़ाने के लिए भी मदद मिलेगी। कक्षा आठवीं तक के बच्चों को अब ट्रेट्रा पैक में दूध मिलेगा। इसका लाभ जिले के सवा लाख विद्यार्थियों को होगा। जिले में किसानों को सोलर पंप का लाभ मिलेगा। इसी प्रकार जैविक खेती का रकबा बढ़ाने का फायदा भी जबलपुर को मिलेगा। 
मिलेगा फायदा

399 करोड़ रुपए से होगा जिले की नहरों का उन्नयन: बरगी बांध की दायीं और बायीं तट नजर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। हाल में सगड़ा-झपनी में नहर फूटने से बड़े क्षेत्र में सिंचाई प्रभावित हो गई। राज्य सरकार ने दोनों नहरों की मरम्मत व उन्नयन के लिए बजट में 399 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है। बहोरीबंद माइनर उद्वहन सिंचाई योजना के तहत 100 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान किया है।

किसानों को बिल से राहत: बजट में कृषि तथा सम्बद्ध क्षेत्र के लिए बड़ा बजट दिया गया है। जिले में ढाई लाख किसान हैं। ज्यादा के पास बिजली से चलने वाले पंप हैं। एक लाख किसानों को सोलर पम्प देने की योजना बनाई गई है। इससे उन्हें बिजली बिल से राहत मिलेगी। वर्तमान में दो लाख हेक्टेयर में खेती होती है। किसानों को बिजली बिल के कारण काफी परेशानी बिल के कारण काफी परेशानी होती है।

ई-बसों की जल्द मिलेगी सौगात: नगर को शीघ्र ई बसों की सौगात मिलेगी। बजट में इसकी जानकारी दी गई। पहले लॉट में 40 बस की सौगात मिल सकती है। इससे यातायात व्यवस्था सुधरेगी। वर्तमान में नगर में सिटी बस की संख्या घटकर 50 के लगभग रह गई है। हर रूट में यात्रियों को ई बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

चौंसठयोगिनी मंदिर तक बनेगा रोपवे

भेड़ाघाट के चौसठयोगिनी मंदिर में पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए रोपवे का निर्माण होगा। राज्य सरकार ने बजट में रोपवे निर्माण की योजना का संकेत दिया है। चौसठयोगिनी मंदिर तक पहुंचने के लिए 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। बड़ी संख्या में पर्यटक, विशेषकर बुजुर्ग और शारीरिक रूप से असमर्थ लोग, सीढ़ियां नहीं चढ़ पाने के कारण मंदिर तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में रोपवे बनने से पर्यटन को नया विस्तार मिलेगा और श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। यह भेड़ाघाट क्षेत्र में बनने वाला दूसरा रोपवे होगा।

अभी धुआंधार से न्यू भेड़ाघाट छोर तक रोपवे पहले से संचालित है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक सफर करते हैं। भेड़ाघाट की ऊंचाई पर स्थित चौसठयोगिनी मंदिर परिसर में बाबा वैद्यनाथ महादेव विराजमान है। यह मंदिर करीब 870 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसे कलचुरी काल की अद्वितीय कृति माना जाता है। इतिहासकार राजकुमार गुप्ता के अनुसार, मंदिर में सात चक्र भेदन और नाड़ी शोधन से जुड़ी योगनियां गर्भगृह बनने से लगभग 200 वर्ष पहले ही स्थापित हो चुकी थीं।

लेबर चौक-अहिंसा चौक के बीच 17 करोड़ से हाईटेक रोड

जिले में सड़क नेटवर्क को विस्तार देने के लिए सरकार ने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल की घोषणा की है। यह योजना निजी भागीदारी के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण निर्माण और निर्धारित अवधि तक रखरखाव सुनिश्चित करेगी ताकि टिकाऊ और आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार हो सके। इसमें जिले के लिए 382 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से जिले में 34 नई सड़को का निर्माण और उन्नयन किया जाएगा।

इनमें शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की सड़कें शामिल है। इससे यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें मेहता पेट्रोल पम्प से अहिंसा चौक के बीच तीन किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिस पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

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