भारत का सशक्त कदम: सिंधु नदी पर बांधों का जाल और पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें

नई दिल्ली

ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगर आपने सोचा होगा क‍ि भारत ने पाक‍िस्‍तान की ओर ध्‍यान देना बंद कर द‍िया है तो रुक‍िये… भारत ने जम्मू-कश्मीर की बर्फीली वादियों से बहने वाली चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर कुछ ऐसा क‍िया है क‍ि अगले कुछ महीनों बाद पाक‍िस्‍तान की सांसें अटक जाएंगी. सिंधु जल संध‍ि पर कंप्‍लीट ब्रेक के बाद मोदी सरकार ने इन नद‍ियों पर बांधों का जाल बिछाना शुरू कर द‍िया है. एक दो नहीं, बल्‍क‍ि कई बड़े बांध बनाए जा रहे हैं. सबको इमरजेंसी मोड में पूरा करने को कहा गया है. बजट पहले से अलॉट कर द‍िया गया है. टाइम फ‍िक्‍स है. साफ है क‍ि भारत अब अपनी नदियों के पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखेगा. पाक‍िस्‍तान के ल‍िए यह क‍िसी सर्जिकल स्‍ट्राइक से कम नहीं.

वो प्रोजेक्‍ट जो पाक‍िस्‍तान का हलक सुखा देंगे

च‍िनाब नदी

सवलकोट हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट

    सवलकोट प्रोजेक्‍ट को चिनाब नदी पर भारत का सबसे महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है. यह प्रोजेक्ट ऊधमपुर और रामबन जिलों में फैला हुआ है. यह चिनाब नदी पर पहले से मौजूद बागलीहार प्रोजेक्ट (अपस्ट्रीम) और सलाल प्रोजेक्ट (डाउनस्ट्रीम) के बीच में स्थित है. इसकी लोकेशन ऐसी है कि यह चिनाब के पानी के बहाव को नियंत्रित करने में भारत को अभूतपूर्व बढ़त देती है. पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.

    इमरजेंसी मोड: NHPC ने फरवरी 2026 में इसके लिए टेंडर जारी किए हैं. दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार इसे जितनी जल्दी हो सके (As early as possible) कमीशन करना चाहती है. मानसून के दौरान भी इसका काम 50% गति से जारी रखने का निर्देश दिया गया है.

पाकल दुल परियोजना

    किश्तवाड़ जिले में बन रही यह परियोजना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न है. सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाली पश्चिमी नदियों पर भारत को ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति थी, लेकिन पाकल दुल भारत की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें पानी को स्टोर करने की क्षमता है.167 मीटर की ऊंचाई के साथ यह भारत का सबसे ऊंचा बांध होगा. इसकी मदद से भारत सर्दियों में जब पाकिस्तान को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब पानी के बहाव को रेगुलेट कर सकेगा. सरकार ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

कीरू प्रोजेक्‍ट

    चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में ही एक और महत्वपूर्ण बांध ‘कीरू’ आकार ले रहा है. कीरू को पाकल दुल और अन्य परियोजनाओं के साथ एक ‘चेन’ के रूप में डिजाइन किया गया है. इसका मतलब है कि अगर भारत ऊपर के बांध से पानी रोकता है, तो नीचे के सभी बांधों का प्रबंधन एक साथ किया जा सकेगा. इसे भी दिसंबर 2026 तक पाकल दुल के साथ ही चालू करने का आदेश दिया गया है, ताकि चिनाब पर भारत की पकड़ एक साथ मजबूत हो.

क्वार प्रोजेक्‍ट

    क्वार परियोजना इंजीनियरिंग का एक नमूना है. जनवरी 2024 में चिनाब नदी का रुख मोड़कर इसके निर्माण के लिए रास्ता बनाया गया था, जिसे पाकिस्तान ने बहुत करीब से ट्रैक किया था. केंद्र ने इसके लिए मार्च 2028 की समयसीमा तय की है. नदी का मार्ग परिवर्तन इस बात का सबूत है कि भारत अब पाकिस्तान के कड़े विरोध की परवाह किए बिना निर्माण कार्य जारी रख रहा है.

रतले प्रोजेक्‍ट

    रतले प्रोजेक्ट पिछले एक दशक से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे विवादित मुद्दा रहा है. पाकिस्तान ने इसके डिजाइन, विशेष रूप से इसके स्पिलवे को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का दरवाजा खटखटाया है. भारत ने इन विरोधों को खारिज करते हुए 2024 में नदी का रुख मोड़ा और बांध के कंक्रीट कार्य की आधारशिला रखी. यह प्रोजेक्ट भी 2028 तक चालू होने की उम्मीद है.

दुलहस्ती स्टेज-2

    मौजूदा दुलहस्ती-1 के ठीक नीचे स्टेज-2 को भी पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान ने इस पर हाल ही में यह कहकर आपत्ति जताई कि उसे सूचित नहीं किया गया था, लेकिन भारत ने इसे संधि के दायरे में बताते हुए आपत्ति को दरकिनार कर दिया है.

झेलम नदी

    किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (330 MW): यह झेलम की सहायक नदी किशनगंगा (पाकिस्तान में नीलम) पर है. भारत ने इसे 2018 में चालू किया था. यह पानी को मोड़कर वुलर झील में डालती है, जिससे पाकिस्तान के नीलम-झेलम प्रोजेक्ट की बिजली क्षमता कम हो जाती है.
    उरी स्टेज-II (240 MW): बारामूला जिले में स्थित इस प्रोजेक्ट को सरकार ने अब प्राथमिकता पर रखा है. संधि के स्थगन के बाद इसकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ी हैं ताकि झेलम के पानी का अधिकतम उपयोग भारत की सीमा के भीतर हो सके.

    तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट: यह वुलर झील के मुहाने पर एक ‘बराज’ है. पाकिस्तान के विरोध के कारण यह सालों से लटका था, लेकिन अब भारत इसे नेविगेशन और पानी के स्‍टोरेज के लिए फिर से जीवित कर रहा है.

सिंधु नदी

    निमो-बाजगो (45 MW): लेह के पास अलची गांव में स्थित यह बांध सिंधु नदी पर बना है. यह लद्दाख की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सिंधु के मुख्य बहाव पर भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत करता है.

    चुटक प्रोजेक्ट (44 MW): यह सिंधु की सहायक नदी ‘सुरु’ पर कारगिल जिले में स्थित है.

    दुर्बुक-शायोक और निमू-चिलिंग प्रोजेक्ट: लद्दाख की इन परियोजनाओं पर भी पाकिस्तान ने हाल ही में आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत इन्हें अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए तेजी से आगे बढ़ा रहा है.

रावी नदी

    शाहपुर कंडी बांध: पंजाब के पठानकोट में रावी नदी पर स्थित इस बांध का मुख्य हिस्सा फरवरी 2024 में तैयार हो गया है. यह रणजीत सागर बांध से निकलने वाले पानी को रोकेगा, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी पूरी तरह बंद हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर व पंजाब के खेतों को सिंचाई मिलेगी.
    उझ मल्‍टी परपज प्रोजेक्‍ट: रावी की सहायक नदी ‘उझ’ पर यह प्रोजेक्ट कठुआ में बन रहा है. केंद्र ने हाल ही में यहां नहर प्रणाली को मंजूरी दी है ताकि पाकिस्तान जाने वाले अनियंत्रित पानी को रोककर पंजाब और राजस्थान की ओर मोड़ा जा सके.

पाकिस्तान क्यों डरा हुआ है?

90% खेती दांव पर: पाकिस्तान की लगभग पूरी नहर प्रणाली और 90% से अधिक कृषि इन पश्चिमी नदियों चिनाब, झेलम, सिंधु पर निर्भर है.

प्‍यासा मरने का खतरा: पाकिस्तान के 10 में से 9 नागरिक उस पानी का उपयोग करते हैं जो पहले भारत से होकर गुजरता है. भारत के पास स्टोरेज क्षमता आने का मतलब है कि भारत सूखे के समय पानी रोक सकता है और बाढ़ के समय ज्यादा पानी छोड़ सकता है. पानी संकट आने की भी संभावना है.

संधि का अंत: भारत द्वारा सिंधु जल संधि की बैठकों का बहिष्कार और एकपक्षीय परियोजनाओं की शुरुआत यह संकेत है कि अब ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ का दौर खत्म हो चुका है.

जम्मू-कश्मीर में ये 5 मेगा प्रोजेक्ट्स न केवल केंद्र शासित प्रदेश को पावर सरप्लस’ बनाएंगे, बल्कि भारत को वह वॉटर लेवरेज देंगे जिसकी मांग दशकों से की जा रही थी. दिसंबर 2026 तक जब पाकल दुल और कीरू एक साथ चालू होंगे, तो यह उपमहाद्वीप की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ होगा.

admin

Related Posts

कनाडा का टंबलर रिज बना खौफ का मंजर — स्कूल में गोलीबारी, शूटर सहित 9 मृत, 25 घायल

टंबलर रिज कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया (BC) प्रांत के टंबलर रिज शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. मंगलवार को एक माध्यमिक स्कूल और एक रिहायशी…

शबाना महमूद की ब्रिटेन पीएम बनने की संभावना, कश्मीर पर पड़ सकता है प्रभाव?

लंदन   शबाना महमूद यह नाम विश्व की राजनीति पर हाल ही में चर्चा का केंद्र बन गया है, क्योंकि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि शबाना महमूद ब्रिटेन की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खेल

सजा की जगह इनाम! ICC ने बांग्लादेश मामले में लिया विवादित निर्णय

  • By admin
  • February 10, 2026
  • 2 views
सजा की जगह इनाम! ICC ने बांग्लादेश मामले में लिया विवादित निर्णय

BCCI ने T20 World Cup की शुरुआत में टीम मैनेजमेंट की मांग खारिज की, खिलाड़ियों को दिया झटका

  • By admin
  • February 10, 2026
  • 0 views
BCCI ने T20 World Cup की शुरुआत में टीम मैनेजमेंट की मांग खारिज की, खिलाड़ियों को दिया झटका

टी20 विश्व कप में नीदरलैंड की शानदार जीत, बास डे लीडे रहे मैच के हीरो

  • By admin
  • February 10, 2026
  • 2 views
टी20 विश्व कप में नीदरलैंड की शानदार जीत, बास डे लीडे रहे मैच के हीरो

पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ डबल खेला: पहले बायकॉट, फिर खुद लिया यू-टर्न!

  • By admin
  • February 10, 2026
  • 2 views
पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ डबल खेला: पहले बायकॉट, फिर खुद लिया यू-टर्न!

अमेरिका ने पाकिस्तान की दुखती रग पर रखा हाथ, विश्व कप से पहले बढ़ेगा दबाव

  • By admin
  • February 10, 2026
  • 2 views
अमेरिका ने पाकिस्तान की दुखती रग पर रखा हाथ, विश्व कप से पहले बढ़ेगा दबाव

BCCI का बड़ा फैसला: कोहली-रोहित का डिमोशन, किशन-शमी को नहीं मिली जगह

  • By admin
  • February 10, 2026
  • 2 views
BCCI का बड़ा फैसला: कोहली-रोहित का डिमोशन, किशन-शमी को नहीं मिली जगह